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Family planning: UP और झारखंड ने दी केंद्र सरकार को जानकारी; सास, बहू व पति बनेंगे आबादी नियंत्रण का माध्यम
Fri, 12 Jul 2024 06:21 AM IST
विशांत श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विशांत श्रीवास्तव
Updated Fri, 12 Jul 2024 06:21 AM IST
सार
परिवार नियोजन के लिए उत्तर प्रदेश और झारखंड लिए योजना बनाई है। दोनों राज्यों ने केंद्र सरकार को जानकारी दी है कि वह सास, बहू और पति के जरिए आबादी नियंत्रण पर काम करेंगे।
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परिवार नियोजन (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : ANI
विस्तार
उत्तर प्रदेश और झारखंड ने परिवार नियोजन के लिए सास, बहू और पति को पहले तीन टारगेट बनाया है। इस अनूठे प्रयोग पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में काफी चर्चाएं हो रही हैं। बृहस्पतिवार को विश्व जनसंख्या दिवस पर राज्यों के साथ वर्चुअल बैठक में यूपी और झारखंड के अधिकारियों ने कहा कि सास, बहू और पति कार्यक्रम के जरिये वे कुल प्रजनन दर को नीचे लाने का प्रयास कर रहे हैं।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल की मौजूदगी में उत्तर प्रदेश के प्रमुख स्वास्थ्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि परिवार नियोजन के किसी भी अभियान में महिलाओं के साथ पुरुषों की भागीदारी होनी चाहिए क्योंकि पुरुषों के बिना इस अभियान को बहुत लंबे समय तक लक्ष्य के नजदीक नहीं ले जा सकते। ऐसे में उत्तर प्रदेश में सास, बहू और बेटा कार्यक्रम चलाया जा रहा है जो पूरे परिवार की खुशहाली की बात करता है। झारखंड के प्रमुख सचिव अजय कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश की तरह उनके राज्य में भी पुरुषों को शामिल करते हुए परिवार नियोजन पर काम किया जा रहा है। पूरे राज्य में सास, बहू और पति कार्यक्रम संचालित हैै। दोनों राज्यों ने अगले पांच से 10 वर्ष में प्रजनन दर को राष्ट्रीय औसत से भी नीचे ले जाने का दावा किया।
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पांच राज्य में प्रजनन अधिक
राष्ट्रीय स्वास्थ्य परिवार सर्वेक्षण-5 के अनुसार, भारत की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) घटकर 2.1 से दो पर आई है जिसका मतलब प्रति महिला से दो बच्चों का जन्म हो रहा है। 21 राज्यों में प्रजनन दर राष्ट्रीय औसत की तुलना में नीचे है, लेकिन बिहार, मेघालय, उत्तर प्रदेश, झारखंड और मणिपुर में यह दर काफी ज्यादा 3-4 बच्चों तक है।
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पुरुषों की भूमिका पहली बार : केंद्र
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि परिवार नियोजन की नीति में सास बहू कार्यक्रम शामिल है लेकिन पहली बार उत्तर प्रदेश व झारखंड में पुरुषों को भी इससे जोड़ा गया है। इसका परिणाम यह है कि उत्तर प्रदेश में कुल प्रजनन दर बीते कुछ सालों में 2.7 से घटकर 2.4 पर आई है जबकि इसी अवधि में पारंपरिक गर्भनिरोधक विधियों की स्वीकार्य दर 31 से बढ़कर 44 फीसदी तक पहुंची है। इसी तरह झारखंड में प्रजनन दर 2.6 से घटकर 2.3 पर आया है। साथ ही 49 फीसदी परिवार गर्भनिरोधक विधियों को स्वीकार कर रहे हैं।