फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   up election 2022: Mant assembly seat of Mathura become very crucial because Samajwadi Party National President Akhilesh Yadav friend sanjay lathar is contesting from this seat

उत्तर प्रदेश चुनाव: दोस्त को जिताने के लिए मथुरा के मांट में अखिलेश यादव ने झोंकी पूरी ताकत

Wed, 09 Feb 2022 08:19 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Wed, 09 Feb 2022 08:19 PM IST
सार

मांट इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि यहां से बसपा के श्याम सुंदर शर्मा विधायक हैं। श्याम सुंदर शर्मा लगातार आठ बार के विधायक हैं। मांट में बड़ी संख्या में जाट हैं। राष्ट्रीय लोकदल के 2017 में प्रत्याशी रहे योगेश नौहवार चुनाव जीतते-जीतते रह गए थे। उन्हें श्याम सुंदर शर्मा से 400 वोटों से हार झेलनी पड़ी थी...

विज्ञापन
up election 2022: Mant assembly seat of Mathura become very crucial because Samajwadi Party National President Akhilesh Yadav friend sanjay lathar is contesting from this seat
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ एमएलसी संजय लाठर - फोटो : Amar Ujala (File Photo)

विस्तार

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 58 विधानसभा सीटों पर 10 फरवरी को मतदान होगा। इनमें मथुरा की मांट विधानसभा सीट काफी हाई प्रोफाइल हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने करीबी और मित्र डा. संजय लाठर को जिताने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। यहां से राजेश चौधरी भाजपा के प्रत्याशी हैं। राजेश चौधरी को मैदान में उतारने के लिए दिल्ली से लेकर लखनऊ तक पार्टी के बड़े नेताओं ने पैरवी की। उन्हें एसके शर्मा के स्थान पर टिकट दिया गया।

विज्ञापन

मांट में प्रत्याशी उतारने को लेकर अंदर की बात

मांट इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि यहां से बसपा के श्याम सुंदर शर्मा विधायक हैं। श्याम सुंदर शर्मा लगातार आठ बार के विधायक हैं। मांट में बड़ी संख्या में जाट हैं। राष्ट्रीय लोकदल के 2017 में प्रत्याशी रहे योगेश नौहवार चुनाव जीतते-जीतते रह गए थे। उन्हें श्याम सुंदर शर्मा से 400 वोटों से हार झेलनी पड़ी थी। इस बार समाजवादी पार्टी से गठबंधन के बाद जयंत चौधरी ने योगेश नौहवार को मांट से प्रत्याशी घोषित कर दिया था। इसके ठीक अगले दिन अखिलेश यादव ने भी डा. संजय लाठर को प्रत्याशी घोषित कर दिया। इसके बाद अखिलेश यादव ने खुद जयंत चौधरी से फोन पर बात की और उन्हें मनाया। लेकिन जाट समाज को इसमें कई चीजें असहज लगीं। लिहाजा अखिलेश यादव खुद मथुरा आए। जयंत चौधरी के साझा प्रचार किया और डा. संजय लाठर को ही गठबंधन का उम्मीदवार बनाने पर सहमति बनी। इसी दौरे में जाट समाज में सही संदेश देने और भितरघात को रोकने के लिए सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने योगेश नौहवार को विधान परिषद में भेजने का वादा किया। इस तरह से मांट में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के गठबंधन की प्रतिष्ठा दांव पर लग गई है।

विज्ञापन

जीते तो जयंत जाट नेता और हार हुई तो गए चौधरी

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई सीटें जयंत चौधरी के लिए भी नाक का सवाल बन गई हैं। इनमें मेरठ विधानसभा की जाट बहुल सिवालखास सीट भी है। यह पहले अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी, लेकिन परिसीमन के बाद 2008 में सामान्य सीट घोषित कर दी गई थी। यह बागपत संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आती है। यहां से समाजवादी पार्टी-रालोद गठबंधन ने गुलाम मोहम्मद को चुनाव मैदान में उतारा है। बसपा ने भी मुकर्रम अली उर्फ नन्हें खान को टिकट दिया है। जबकि भाजपा ने 2017 के विजयी उम्मीदवार जितेंद्र सतवई को बदलकर मनेंद्र पाल सिंह को टिकट दिया है। 2012 में इस सीट से गुलाम मोहम्मद समाजवादी पार्टी के टिकट पर विधायक बने थे, लेकिन इस बार जयंत चौधरी का राष्ट्रीय लोकदल सिवालखास से अपना प्रत्याशी उतारना चाह रहा था। हालांकि 2017 में यहां से रालोद के प्रत्याशी यशवीर सिंह तीसरे नंबर पर थे। इस सीट से फिर गुलाम मोहम्मद के उतारे जाने के बाद जाटों में थोड़ी नाराजगी देखी जा रही थी।

विज्ञापन
विज्ञापन


इसी तरह से जेवर से अवतार सिंह भड़ाना को टिकट देना भी राष्ट्रीय लोकदल के तमाम नेताओं को कम रास आया। अवतार सिंह भड़ाना ने प्रत्याशी के तौर पर नाम घोषित होने के कुछ दिन बाद चुनाव न लड़ने की घोषणा तक कर दी थी, लेकिन बाद में फिर प्रत्याशी के तौर चुनाव मैदान में उतर आए थे। कई जाट नेताओं ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि प्रत्याशियों का चयन और टिकट वितरण सही ढंग से हुआ होता तो भाजपा का क्षेत्र से पत्ता साफ हो जाता। एक वरिष्ठ किसान जाट नेता कहते हैं कि रालोद के खाते में कम से कम 40 सीटें आनी चाहिए थीं। जबकि चुनाव में सही मायने में 30 सीट ही मिली हैं। वह कहते हैं कि सवाल सीटों का ही नहीं है, राजनीति में जाटों के प्रतिनिधित्व का भी है।  

घर-घर मतदाताओं से मिल रहे हैं लोग

भाजपा, बसपा, सपा-रालोद और कांग्रेस के प्रत्याशियों ने मतदाताओं को अपने पाले में करने के लिए आखिरी कोशिश को काफी तेज कर दिया है। चार-पांच कार्यकर्ताओं की टोली बनाकर हर पार्टी के प्रत्याशियों ने घर-घर संपर्क अभियान पर जोर दिया है। नोएडा की सीट पर भाजपा के उम्मीदवार पंकज सिंह की टीम की सक्रियता भी काफी तेज है। वहीं भाजपा सांसद सुरेंद्र नागर की टीम भी जीत सुनिश्चित करने में लगी है। भाजपा के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री डा. महेश शर्मा ने पार्टी के पक्ष में परिणाम लाने के लिए अपनी सक्रियता काफी बढ़ाई है।



संजय लाठर कहते हैं कि अब तो कुछ घंटे की बात है। गुरुवार को मतदान शुरू होने के साथ समाजवादी पार्टी-रालोद का गठबंधन बढ़त लेता हुआ दिखाई देने लगेगा। मेरठ से आने वाले कांग्रेस के मनोज त्यागी को भी इस बार चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में हवा बहती हुई दिखाई दे रही है। मनोज त्यागी के मुताबिक लोग भले कांग्रेस की गिनती कम कर रहे हैं, लेकिन जनता कर रही है। प्रियंका गांधी की जनसभाओं में उमड़ रही भीड और उत्साह काफी कुछ कह रहा है। बस 10 मार्च का इंतजार कीजिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed