UP Chunav 2022: लोकसभा चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे आरपीएन सिंह भाजपा के लिए कितने उपयोगी साबित होंगे?
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विस्तार
जितिन प्रसाद, अदिति सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरह राहुल-प्रियंका के एक और करीबी आरपीएन सिंह ने मंगलवार को कांग्रेस का साथ छोड़ दिया। कांग्रेस का साथ छोड़ वे उसी भगवा खेमे में शामिल हो गए, जिसका वे लंबे समय तक वैचारिक विरोध करते रहे थे। इसके पहले ललितेशपति त्रिपाठी और इमरान मसूद ने भी कांग्रेस का साथ छोड़ प्रियंका गांधी की उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को मजबूत करने की मुहिम को चोट पहुंचाई थी। आरपीएन सिंह खेमे का भी आरोप है कि कांग्रेस में उनकी उपेक्षा की जा रही थी। इसके बारे में उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से बात भी की थी, लेकिन उनके मुद्दों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। उपेक्षा से नाराज आरपीएन सिंह ने अंततः पार्टी छोड़ने का फैसला कर लिया।
एक दिन पहले ही बनाया था स्टार प्रचारक
मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे आरपीएन सिंह के कांग्रेस छोड़ने को पार्टी के बड़े नुकसान के रूप में देखा जा रहा है। उन्हें एक दिन पहले ही कांग्रेस के स्टार प्रचारकों में शामिल किया गया था। भाजपा नेताओं का दावा है कि आरपीएन सिंह पड़रौना-कुशीनगर क्षेत्र में पार्टी को मजबूत करने में सहायक साबित होंगे। इससे स्वामी प्रसाद मौर्या के बागी होने के नुकसान की भरपाई भी की जा सकेगी, जिन्होंने आखिरी वक्त पर पार्टी छोड़कर भाजपा की छवि को भारी नुकसान पहुंचाया था। पार्टी आरपीएन के जरिए उस नुकसान की भरपाई करने की कोशिश करती हुई दिखाई पड़ रही है। भाजपा उन्हें पड़रौना से विधानसभा चुनाव लड़ा सकती है जहां भाजपा के बागी नेता स्वामी प्रसाद मौर्या मैदान में हैं।
मां को भी नहीं दिलवा पाए थे जीत
लेकिन आरपीएन सिंह भाजपा के लिए कितने सहायक साबित हो सकेंगे, यह बड़ा सवाल है। केंद्रीय मंत्री रहने के बाद मोदी लहर में हुए 2014 के लोकसभा चुनाव में वे कुशीनगर लोकसभा सीट हार चुके हैं। कुशीनगर से भाजपा के राजेश पांडेय के 3.70 लाख वोटों के मुकाबले उन्हें 2.84 लाख वोट हासिल हुए थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में वोटों का यह अंतर और बढ़ गया। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के विजय कुमार दुबे को 5.97 लाख वोट हासिल हुए थे। दूसरे नंबर पर रहे सपा उम्मीदवार राजेश पांडेय को 2.59 लाख और तीसरे नंबर पर रहे आरपीएन सिंह को 1.46 लाख वोट ही हासिल हुए थे।
वे स्वयं पड़रौना विधानसभा चुनाव भी हार चुके हैं। इतना ही नहीं, आरपीएन सिंह अपनी मां मोहिनी देवी को भी जीत दिलवाने में नाकाम साबित हुए थे। उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा था।
हालांकि, भाजपा में शामिल होते हुए उन्होंने कहा कि यह उनकी नई पारी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश की प्राचीन संस्कृति को गौरव दिलाने का काम किया है। पूरे देश के साथ-साथ पूर्वांचल में विकास की धारा बह रही है। वे भी भाजपा के साथ जुड़कर जनता के हितों की राजनीति को आगे बढ़ाना चाहते हैं। पार्टी में शामिल होते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री का आभार भी जताया।
पूर्वांचल में पार्टी को मिलेगा लाभ
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने अमर उजाला से कहा कि आज पूरे देश में जो भी राष्ट्रवाद की राजनीति करना चाहता है और जनता के हितों के लिए काम करना चाहता है, उसके लिए भाजपा ही सबसे उपयुक्त विकल्प है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की अगुवाई वाली भाजपा केवल राष्ट्रवाद की राजनीति को महत्त्व देती है। उसके लिए राष्ट्र का हित ही सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी नीतियों पर स्वमूल्यांकन करना चाहिए कि लोग उसे छोड़कर क्यों जा रहे हैं।
लाभ के लिए राजनीति करने वाले लोग छोड़ रहे कांग्रेस
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष विश्वविजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस का इतिहास संघर्ष का इतिहास रहा है। यहां केवल वही नेता जनता को स्वीकार्य हुए हैं, जिन्होंने जनता के लिए संघर्ष किया है। विचारधारा को समर्पित ऐसे लोग ही पार्टी की मजबूत रीढ़ हुआ करते थे। लेकिन जो नेता पार्टी छोड़ रहे हैं, उनका संघर्ष का कोई इतिहास नहीं रहा है। वे केवल अपने पूर्वजों की कमाई खा रहे थे। यही कारण है कि आज जब प्रियंका गांधी यूपी में कांग्रेस को खड़ी करने में संघर्ष कर रही हैं, इस तरह के लाभपरस्त लोग पार्टी छोड़ रहे हैं।