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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   up election 2022: Leaders are disappointed with virtual rally but supporters says digital rallies are cheaper than physical rally because of high cost

उत्तर प्रदेश चुनाव: डिजिटल प्रचार से नेता मायूस तो समर्थक खुश, लोग क्यों बोले- भगवान करे कभी न हो फिजिकल रैली

Mon, 31 Jan 2022 08:06 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Mon, 31 Jan 2022 08:06 PM IST
सार

भाजपा के इस समर्थक ने अमर उजाला से कहा कि लोगों को लाने-ले जाने में भारी धन खर्च करना पड़ता है। उनके चाय-नाश्ते और भोजन की भी पूरी जिम्मेदारी उन्हें ही उठानी पड़ती है। जेवर एयरपोर्ट वाले कार्यक्रम के दौरान भी लोगों को एकत्र करने में भारी धन खर्च करना पड़ा था...

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up election 2022: Leaders are disappointed with virtual rally but supporters says digital rallies are cheaper than physical rally because of high cost
वर्चुअल रैली के दौरान प्रधानमंत्री मोदी। - फोटो : Agency

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को भाजपा के चुनाव प्रचार के लिए वर्चुअल रैली को संबोधित किया। इसके लिए पश्चिम के पांच जिलों में 7800 से अधिक स्थानों पर डिजिटल प्रोजेक्टर लगाए गए थे, जहां बैठकर लोगों ने प्रधानमंत्री का संबोधन सुना। इसके पहले समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव भी डिजिटल रैलियों को संबोधित कर चुके हैं। इस तरह की रैलियों से सभी दलों के नेता मायूस बताए जा रहे हैं क्योंकि इस तरह की रैली के जरिए नेताओं को 'चाल' नहीं मिल पा रही है। नेता पार्टी के लिए हवा बनाने में भी सही भूमिका नहीं निभा पा रहे हैं। लेकिन इन्हीं राजनीतिक दलों के वे कार्यकर्ता डिजिटल रैली से बेहद खुश नजर आ रहे हैं जिन्हें इस तरह की रैलियों को सफल बनाने के लिए बसों का इंतजाम करने जैसी कई खर्चीली जिम्मेदारियां सौंप दी जाती थीं।

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समर्थकों को खर्च करनी पड़ती है रकम

जेवर एयरपोर्ट के शिलान्यास के समय भी पश्चिमी यूपी के इसी हिस्से को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक रैली को संबोधित किया था। इस रैली के दौरान एक नेता को दस बसों के जरिए शामली, कैराना और मुजफ्फरनगर से भाजपा समर्थकों को लाने-ले जाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। भाजपा के इस समर्थक ने अमर उजाला से कहा कि लोगों को लाने-ले जाने में भारी धन खर्च करना पड़ता है। उनके चाय-नाश्ते और भोजन की भी पूरी जिम्मेदारी उन्हें ही उठानी पड़ती है। जेवर एयरपोर्ट वाले कार्यक्रम के दौरान भी लोगों को एकत्र करने में भारी धन खर्च करना पड़ा था।

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इसके पहले प्रयागराज में आयोजित किए गए प्रधानमंत्री के ‘नारीशक्ति सम्मान कार्यक्रम’ के दौरान भी उनकी बसें लोगों को लेकर कार्यक्रम स्थल तक गई थीं। उस कार्यक्रम में महिलाओं को एक दिन पहले ले जाकर प्रयागराज के एक स्कूल में ठहराने का इंतजाम भी किया गया था। ठहरने का इंतजाम स्थानीय नेताओं के द्वारा किया गया था, लेकिन आने-जाने का पूरा खर्च इस समर्थक को उठाना पड़ा था। इसके अलावा पश्चिमी यूपी से चुनाव लड़ने वाले एक बड़े नेता पुत्र के विधानसभा चुनाव में भी उन्हें पैसा खर्च करना पड़ा था।

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फिजिकल रैलियों से तौबा

लेकिन सोमवार को आयोजित डिजिटल रैली में इन समर्थकों को कोई धन नहीं खर्च करना पड़ा। प्रोजेक्टर का काम पार्टी के माध्यम से किया गया था, तो स्थानीय लोगों के ही कार्यक्रम में आने के कारण परिवहन के नाम पर कोई खर्च नहीं हुआ। कुछ जगहों पर आने-जाने वालों के लिए नाश्ते का प्रबंध किया गया था, तो कई जगहों पर सड़कों पर खड़े होकर लोगों ने प्रोजेक्टर पर प्रधानमंत्री को सुना। इससे इन समर्थकों को धन खर्च से भारी राहत मिली है। उन्होंने कहा कि भगवान करे कि अब कभी फिजिकल रैलियों का आयोजन न करना पड़े।


भारतीय जनता पार्टी की तरफ से दावा किया गया है कि इस रैली के जरिए लगभग 50 हजार लोगों ने प्रधानमंत्री को सुना। इसके लिए विभिन्न स्थलों पर प्रोजेक्टर लगाने का काम किया गया था। विभिन्न नेता अलग-अलग जगहों पर उपस्थित रहकर लोगों को जोड़ने का काम करते रहे। पार्टी सांसद महेश शर्मा दादरी में तो जिलाध्यक्ष ग्रेटर नोएडा के स्थलों पर उपलब्ध रहे। हालांकि, डिजिटल रैली में लोगों को वह जोश नहीं महसूस हुआ जो उनकी फिजिकल रैलियों में हुआ करता था।

पार्टी को हो सकता है नुकसान

पार्टी के एक नेता ने स्वीकार किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत हैं। वे केवल अपनी अपील से पूरे चुनाव का परिदृश्य पलटने की क्षमता रखते हैं और 2014 के आम चुनाव से लेकर अब तक वे बार-बार अपनी यह प्रतिभा साबित भी कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि जिस समय पार्टी यूपी चुनाव में कठिन स्थिति का मुकाबला कर रही है, फिजिकल रैलियों पर प्रतिबंध पार्टी की उम्मीदों को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है।  



समाजवादी पार्टी के एक नेता ने भी स्वीकार किया कि इस तरह की डिजिटल रैलियों से चुनाव का खर्च बचाने में बड़ी राहत मिली है, लेकिन इससे जनता के साथ नेताओं का कनेक्ट नहीं बन पा रहा है। नेताओं को भी इस बात का अहसास नहीं हो पा रहा है कि वे अपनी बात से जनता को कितना संतुष्ट कर पा रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि चुनाव आयोग कोरोना की परिस्थितियों को देखकर जल्द से जल्द प्रतिबंधों को हटाए जिससे पूरे जोश के साथ रैलियों का आयोजन किया जा सके।

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