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UP Election 2022: प्रियंका गांधी के कंधों पर सारा दारोमदार, क्या वे कांग्रेस को वेंटिलेटर से उठाकर फिर से जिंदा करने की कोशिश कर रही हैं
Mon, 13 Sep 2021 02:50 PM IST
प्रतिभा ज्योति
प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली।
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Published by: प्रतिभा ज्योति
Updated Mon, 13 Sep 2021 02:50 PM IST
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प्रियंका गांधी लखनऊ में एक बैठक के दौरान
- फोटो :
PTI
विस्तार
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के उत्तर प्रदेश के दौरे के बाद जब पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद से पूछा गया कि कांग्रेस का सीएम चेहरा कौन है तो उन्होंने कहा 'उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव 2022 हम लोग प्रियंका गांधी की अगुवाई में लड़ेंगे। वह यूपी में पार्टी की जीत के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं। सलमान खुर्शीद के बयान का राजनीतिक पंडित यह मतलब निकाल रहे हैं कि यूपी चुनाव में पार्टी को जीत दिलाना प्रियंका गांधी के सामने एक बड़ी चुनौती है और इस चुनौती से पार पाना उनके लिए बेहद कठिन है।हालांकि अमर उजाला डिजिटल से बातचीत में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद पी एल पुनिया ने कहा- ‘हम उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा यह अभी तय नहीं है। हां लेकिन इतना तय है कि उन्होंने प्रदेश कांग्रेस में जान फूंक दी है और पार्टी पूरे जोश के साथ उत्तर प्रदेश का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।‘
तो क्या यह माना जाए कि चुनाव में पार्टी को जीत दिलाने का पूरा दारोमदार प्रियंका गांधी पर ही है। इसके जवाब में कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा कि ‘प्रियंका गांधी पार्टी महासचिव हैं, उत्तर प्रदेश का प्रभार उनके पास है, तो सुपरवाइज तो वहीं करेंगी। हर राज्य का अलग प्रभारी है। कांग्रेस भी वैसे ही चलती है जैसे दूसरी पार्टियां चलती है। उन्होंने कहा हम वोट बैंक की राजनीति नहीं करते, जनता का दिल जीतना हमारा लक्ष्य है।
प्रियंका के लिए यह लड़ाई कितनी मुश्किल
2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान, कांग्रेस ने 28 सीटें जीती थीं, लेकिन 2017 के विधानसभा चुनावों यह संख्या फिसल कर महज सात सीटों पर सिमट गई। हाल ही में हुए पंचायत चुनाव में पार्टी 270 सीटें जीतकर तीसरे स्थान पर रही। जबकि 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 403 सदस्यीय विधानसभा में 312 सीटें मिली थीं। पार्टी पिछले कुछ सालों में लड़ाई लड़ने में विफल रही है, लेकिन इस बार पार्टी नेता मानते हैं कि कोरोना महामारी की रोकथाम का कुप्रबंधन और किसान आंदोलन की वजह से मौजूदा राजनीतिक मिजाज भाजपा के पक्ष में नहीं है, और यह कांग्रेस के लिए उत्प्रेरक का काम कर सकता है। कांग्रेस के कुछ नेता यह मानते हैं कि भाजपा के खिलाफ जनता का मूड राज्य में पुरानी पार्टी की किस्मत को पलट सकता है।
ये भी पढ़ें: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022: तालिबान का शासन अफगानिस्तान में, लेकिन भाजपा की इस बहाने सपा पर चढ़ाई
प्रियंका को सीएम चेहरा प्रोजेक्ट कर दें तो
प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए अपनी चुनावी रणनीति पर गंभीरता से अमल कर रही हैं। पार्टी ने 2017 में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया लेकिन गठबंधन भाजपा को प्रचंड बहुमत हासिल करने से नहीं रोक सकी। इस बार कांग्रेस ने सभी 403 सीटों पर अकेले लड़ने की योजना बनाई है। हालांकि भाजपा और सपा के सामने उसकी लड़ाई अब भी आसान नहीं होने वाली है, लेकिन प्रियंका गांधी इस लड़ाई में जुटी हुई हैं।
उत्तर प्रदेश की राजनीति की नब्ज समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान कहते हैं यह उन्हें सीएम चेहरे के तौर पर प्रोजेक्ट कर दिया जाए जो कि पार्टी को पहले करना चाहिए था उससे प्रदेश की राजनीति पर बहुत फर्क पड़ सकता है। कांग्रेस के पारंपरिक वोटर उनसे जुड़ना चाहते हैं। हालांकि पिछले कुछ समय से प्रियंका का करिश्मा थोड़ा कम हुआ है, लेकिन इतना तो है कि वे चुनौती ले रही हैं और यदि वे पूरे मन से जुट जाएं तो कुछ हद तक पारंपरिक वोटर्स को साध सकती हैं।
कांग्रेस की यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी
- फोटो :
amar ujala
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को वेंटिलेटर से उठाकर फिर से जिंदा करने की कोशिश कर रही हैं। 32 साल पहले 1989 में सत्ता से बाहर होने के बाद से कांग्रेस पार्टी का का मुख्य पारंपरिक वोट बैंक ब्राह्मण, दलित और मुसलमान को भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने अपने हिस्से में कर लिया है। यूपी में ब्राह्मण वोट करीब 12 फीसदी, 18 फीसदी मुस्लिम वोट और 40 फीसदी युवा वोट है ऐसे में लड़ाई तो कठिन है लेकिन कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं ‘आप देखिए न वे फाइटर की तरह मैदान में डटी हुई हैं और वे सभी वोटरों का दिल जीतने में कामयाब होंगीं।’
पार्टी ने नहीं मानी थी प्रशांत किशोर की राय
2017 के चुनाव में तब कांग्रेस के रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर प्रियंका गांधी को पार्टी के मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में पेश करने का सुझाव दिया था लेकिन पार्टी ने उनकी राय खारिज कर दी थी, क्योंकि तब तक राजनीति में प्रियंका की भूमिका सीमित थी। लगभग दो दशक से वे अपने भाई और मां सोनिया गांधी के चुनाव अभियानों का प्रबंधन करती रही थीं। हालांकि उन्हें सक्रिय राजनीति में उतारे जाने की मांग कार्यकर्ता लंबे समय से कर रहे थे।
इसलिए जब जनवरी 2019 में यह घोषणा की गई कि उन्हें उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से का महासचिव बनाया जा रहा है तो समर्थकों ने पार्टी कार्यालय के बाहर आतिशबाजी की और नृत्य करके जश्न मनाया। कार्यकर्ताओं ने इस कदम को "ब्रह्मास्त्र" कहकर पुकारा। प्रियंका को 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उत्तर प्रदेश में 'लॉन्च' किया गया। जब उनके साथ लखनऊ में एक मेगा रोड शो के बाद, राहुल गांधी ने लखनऊ में कांग्रेस कार्यालय में कहा कि पार्टी को 2019 में यूपी से ज्यादा उम्मीदें नहीं हैं, पार्टी को असली उम्मीद 2022 के विधानसभा चुनाव से है। 2019 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस के लिए एक आपदा की तरह रहा क्योंकि राहुल अमेठी से चुनाव हार गए। प्रियंका ने चुनाव नहीं लड़ा और केवल सोनिया गांधी ही अपनी रायबरेली की सीट बचा पाई थीं।
प्रियंका ने देर कर दी?
उत्तर प्रदेश से जुड़े कांग्रेस के कुछ नेता मानते हैं प्रियंका गांधी बेशक ईमानदारी से अपना प्रयास कर रही हैं लेकिन सच तो यह है कि उन्होंने कांग्रेस के चुनाव अभियान को शुरु करने में देर कर दी। भाजपा जैसी पार्टी जो एक चुनाव जीतते ही दूसरे चुनाव की तैयारी कर देती है और जहां सपा यह चुनाव जीतने के लिए एड़ी-चोटी का जोड़ लगाए हुए है वहां प्रियंका गांधी की सक्रियता देर से शुरू हुई है। चुनाव में अब जबकि कुछ महीने ही बचे हैं, वे डेढ़ साल बाद जुलाई में यूपी दौरे पर पहुंची। इस दौरान पार्टी कार्यकर्ता उनके लखनऊ आने का इंतजार ही करते रहे।
पार्टी ने नहीं मानी थी प्रशांत किशोर की राय
2017 के चुनाव में तब कांग्रेस के रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर प्रियंका गांधी को पार्टी के मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में पेश करने का सुझाव दिया था लेकिन पार्टी ने उनकी राय खारिज कर दी थी, क्योंकि तब तक राजनीति में प्रियंका की भूमिका सीमित थी। लगभग दो दशक से वे अपने भाई और मां सोनिया गांधी के चुनाव अभियानों का प्रबंधन करती रही थीं। हालांकि उन्हें सक्रिय राजनीति में उतारे जाने की मांग कार्यकर्ता लंबे समय से कर रहे थे।
इसलिए जब जनवरी 2019 में यह घोषणा की गई कि उन्हें उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से का महासचिव बनाया जा रहा है तो समर्थकों ने पार्टी कार्यालय के बाहर आतिशबाजी की और नृत्य करके जश्न मनाया। कार्यकर्ताओं ने इस कदम को "ब्रह्मास्त्र" कहकर पुकारा। प्रियंका को 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उत्तर प्रदेश में 'लॉन्च' किया गया। जब उनके साथ लखनऊ में एक मेगा रोड शो के बाद, राहुल गांधी ने लखनऊ में कांग्रेस कार्यालय में कहा कि पार्टी को 2019 में यूपी से ज्यादा उम्मीदें नहीं हैं, पार्टी को असली उम्मीद 2022 के विधानसभा चुनाव से है। 2019 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस के लिए एक आपदा की तरह रहा क्योंकि राहुल अमेठी से चुनाव हार गए। प्रियंका ने चुनाव नहीं लड़ा और केवल सोनिया गांधी ही अपनी रायबरेली की सीट बचा पाई थीं।
प्रियंका ने देर कर दी?
उत्तर प्रदेश से जुड़े कांग्रेस के कुछ नेता मानते हैं प्रियंका गांधी बेशक ईमानदारी से अपना प्रयास कर रही हैं लेकिन सच तो यह है कि उन्होंने कांग्रेस के चुनाव अभियान को शुरु करने में देर कर दी। भाजपा जैसी पार्टी जो एक चुनाव जीतते ही दूसरे चुनाव की तैयारी कर देती है और जहां सपा यह चुनाव जीतने के लिए एड़ी-चोटी का जोड़ लगाए हुए है वहां प्रियंका गांधी की सक्रियता देर से शुरू हुई है। चुनाव में अब जबकि कुछ महीने ही बचे हैं, वे डेढ़ साल बाद जुलाई में यूपी दौरे पर पहुंची। इस दौरान पार्टी कार्यकर्ता उनके लखनऊ आने का इंतजार ही करते रहे।
पीड़ित महिला से मिलीं प्रियंका गांधी
- फोटो :
amar ujala
पैराशूट दौरे पर रहती हैं प्रियंका
2019 में कांग्रेस की शर्मनाक हार के बाद भी प्रियंका ने लखनऊ में रुकने का विकल्प नहीं चुना, बल्कि वे राज्य में पैराशूट के दौरे को प्राथमिकता देती रहीं। जैसे दो साल पहले आदिवासियों की हत्या के बाद सोनभद्र गईं, सीएए के विरोध प्रदर्शनों में घायल हुए लोगों से मिलने के लिए दिसंबर 2019 में लखनऊ पहुंचीं। पिछले अक्टूबर में हाथरस में दलित लड़की के साथ हुए दुष्कर्म और बाद में उसकी हत्या की शिकार पीड़ित परिवार से मिलने गईं 11 फरवरी को प्रयागराज में संगम में डुबकी भी लगाई।
इसके अलावा उन्होंने इस साल फरवरी-मार्च में पश्चिम यूपी में किसान महापंचायत में भी शामिल हुईं। यूपी से जुड़े पार्टी के कई वरिष्ठ नेता पिछले दो साल से प्रियंका गांधी को यह सुझाव दे रहे हैं कि उन्हें लखनऊ में अपना एक आवास जरूर रखना चाहिए जिससे कार्यकर्ताओं को उनके प्रदेश में रहने का आभास हो। एक साल पहले इन अटकलों के बीच कांग्रेस पार्टी में हड़कंप मच गया था कि प्रियंका चुनाव तक अपना प्रवास लखनऊ में रखना चाहती हैं। सूत्रों के मुताबिक पिछले अक्तूबर से दिसंबर तक लखनऊ में उनके रहने के लिए एक अच्छे घर की तलाश भी शुरू हुई। उनके एक रिश्तेदार का घर उनके लंबे प्रवास के लिए तैयार किया गया, लेकिन फिर कोरोना आने के बाद यह सब प्रयास बंद कर दिया गया।
हालांकि भाजपा के एक वरिष्ठ नेता सीधे तौर तो यह नहीं मानते कि प्रियंका की मौजूदगी यूपी में दिख रही है लेकिन वे कहते हैं वे किसी भी मौके को हाथ से जाने नहीं दे रही हैं। शरत प्रधान बताते हैं प्रियंका गांधी पॉलिटिकल टूरिज्म पर आ रही हैं। इससे न तो कांग्रेस को फायदा हो रहा है और न ही उन्हें। यदि वे लखनऊ में ही डेरा डाल लें तो निश्चित तौर पर उसका फर्क पड़ेगा। कांग्रेस से पारंपरिक वोटर अभी भी जुड़ना चाहते हैं और प्रियंका के व्यक्तित्व में एक आकर्षण है। लेकिन अभी तक तो उन्होंने निराश ही किया है। उन्हें असल में मैदान में उतरना होगा।
ये भी पढ़ें: उत्तर प्रदेश की सियासत: ब्राह्मणों का साथ, पार्क बनाने से तौबा और बाहुबलियों से दूरी, ये हैं बसपा के चरित्र बदलने के संकेत
प्रियंका में दमखम, वे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा रहीं
प्रियंका गांधी के आने से कांग्रेस को कितना फायदा होगा इसके जवाब में वरिष्ठ पत्रकार और लेखक रशीद किदवई कहते हैं हर राजनीतिक दल का यह प्रयास होता है कि वह अपनी जमीन तैयार करे। लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह अधिकार हर पार्टी का है। कांग्रेस अभी उत्तर प्रदेश में लगभग शून्य पर है और जब तक कांग्रेस का उत्तर प्रदेश में जनाधार नहीं बनेगा उसे चुनाव में कोई फायदा नहीं होगा। इस लिहाज से कांग्रेस को कहीं न कहीं से शुरूआत करनी है, जो प्रियंका गांधी कर रही हैं। उनमें दमखम है।
वे कहते हैं प्रियंका पार्टीजन का मनोबल बढ़ा रही है। पार्टी की कोशिश की है कि 100 ऐसी सीटों पर फोकस किया जाए जहां कांग्रेस की थोड़ी-बहुत पकड़ है। वे यही प्रयास कर रही हैं। यदि कांग्रेस की 25-30 सीटें भी आ जाती हैं तो यह कांग्रेस में नई जान फूंक देगा। यदि त्रिशंकु विधानसभा बनती है तो कांग्रेस की भूमिक अहम हो सकती है।
2019 में कांग्रेस की शर्मनाक हार के बाद भी प्रियंका ने लखनऊ में रुकने का विकल्प नहीं चुना, बल्कि वे राज्य में पैराशूट के दौरे को प्राथमिकता देती रहीं। जैसे दो साल पहले आदिवासियों की हत्या के बाद सोनभद्र गईं, सीएए के विरोध प्रदर्शनों में घायल हुए लोगों से मिलने के लिए दिसंबर 2019 में लखनऊ पहुंचीं। पिछले अक्टूबर में हाथरस में दलित लड़की के साथ हुए दुष्कर्म और बाद में उसकी हत्या की शिकार पीड़ित परिवार से मिलने गईं 11 फरवरी को प्रयागराज में संगम में डुबकी भी लगाई।
इसके अलावा उन्होंने इस साल फरवरी-मार्च में पश्चिम यूपी में किसान महापंचायत में भी शामिल हुईं। यूपी से जुड़े पार्टी के कई वरिष्ठ नेता पिछले दो साल से प्रियंका गांधी को यह सुझाव दे रहे हैं कि उन्हें लखनऊ में अपना एक आवास जरूर रखना चाहिए जिससे कार्यकर्ताओं को उनके प्रदेश में रहने का आभास हो। एक साल पहले इन अटकलों के बीच कांग्रेस पार्टी में हड़कंप मच गया था कि प्रियंका चुनाव तक अपना प्रवास लखनऊ में रखना चाहती हैं। सूत्रों के मुताबिक पिछले अक्तूबर से दिसंबर तक लखनऊ में उनके रहने के लिए एक अच्छे घर की तलाश भी शुरू हुई। उनके एक रिश्तेदार का घर उनके लंबे प्रवास के लिए तैयार किया गया, लेकिन फिर कोरोना आने के बाद यह सब प्रयास बंद कर दिया गया।
हालांकि भाजपा के एक वरिष्ठ नेता सीधे तौर तो यह नहीं मानते कि प्रियंका की मौजूदगी यूपी में दिख रही है लेकिन वे कहते हैं वे किसी भी मौके को हाथ से जाने नहीं दे रही हैं। शरत प्रधान बताते हैं प्रियंका गांधी पॉलिटिकल टूरिज्म पर आ रही हैं। इससे न तो कांग्रेस को फायदा हो रहा है और न ही उन्हें। यदि वे लखनऊ में ही डेरा डाल लें तो निश्चित तौर पर उसका फर्क पड़ेगा। कांग्रेस से पारंपरिक वोटर अभी भी जुड़ना चाहते हैं और प्रियंका के व्यक्तित्व में एक आकर्षण है। लेकिन अभी तक तो उन्होंने निराश ही किया है। उन्हें असल में मैदान में उतरना होगा।
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प्रियंका में दमखम, वे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा रहीं
प्रियंका गांधी के आने से कांग्रेस को कितना फायदा होगा इसके जवाब में वरिष्ठ पत्रकार और लेखक रशीद किदवई कहते हैं हर राजनीतिक दल का यह प्रयास होता है कि वह अपनी जमीन तैयार करे। लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह अधिकार हर पार्टी का है। कांग्रेस अभी उत्तर प्रदेश में लगभग शून्य पर है और जब तक कांग्रेस का उत्तर प्रदेश में जनाधार नहीं बनेगा उसे चुनाव में कोई फायदा नहीं होगा। इस लिहाज से कांग्रेस को कहीं न कहीं से शुरूआत करनी है, जो प्रियंका गांधी कर रही हैं। उनमें दमखम है।
वे कहते हैं प्रियंका पार्टीजन का मनोबल बढ़ा रही है। पार्टी की कोशिश की है कि 100 ऐसी सीटों पर फोकस किया जाए जहां कांग्रेस की थोड़ी-बहुत पकड़ है। वे यही प्रयास कर रही हैं। यदि कांग्रेस की 25-30 सीटें भी आ जाती हैं तो यह कांग्रेस में नई जान फूंक देगा। यदि त्रिशंकु विधानसभा बनती है तो कांग्रेस की भूमिक अहम हो सकती है।
कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी
- फोटो :
amar ujala
प्रियंका चुनाव के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं
कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी को उत्तर प्रदेश में पार्टी के पुनर्निर्माण का काम सौंपा गया है। उन्होंने पार्टी के आधार को मजबूत करने और कैडर को जुटाने के लिए राज्य के पार्टी नेताओं के साथ मिलकर काम करना शुरू कर दिया है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया प्रियंका गांधी ने ग्राम स्तर पर पार्टी को मजबूत करने पर सबसे ज्यादा जोर दिया है।
उन्होंने पद संभालने के बाद से कई बदलाव किए हैं। उन्होंने न केवल छोटी नई कार्यकारी समितियों का गठन किया, बल्कि नए जिला अध्यक्षों को भी नियुक्त किया, कुछ चुनाव संबंधी समितियों का गठन किया और पार्टी विधायक अजय कुमार लल्लू को प्रदेश अध्यक्ष बनाया। उनके मार्गदर्शन में, कांग्रेस जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन करती रही है। जहां प्रियंका गांधी स्थानीय नेताओं की उपस्थिति में उन्हें सीधे संबोधित करती हैं। वे जमीनी घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रही हैं और उन्होंने नेताओं से किसी भी मुद्दे पर उनसे सीधे बात करने को कहा है।
स्वतंत्रता के 75वें वर्ष को देखते हुए कांग्रेस राज्य इकाई के वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों को उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में 30,000 गांवों को कवर करते हुए 75 घंटे बिताने को कहा। कांग्रेस का लक्ष्य करीब 90 लाख लोगों तक सीधे पहुंचना था।
पार्टी ने उत्तर प्रदेश के लिए एक चुनाव समिति का गठन किया है। कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं को जमीन पर उतरने और लोगों को प्रभावित करने वाले मुद्दों को उठाने की भी योजना बनाई है, चाहे वह कोरोना की दूसरी लहर में हुई तबाही का मुद्दा हो या बेरोजगारी और महंगाई का।
कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी को उत्तर प्रदेश में पार्टी के पुनर्निर्माण का काम सौंपा गया है। उन्होंने पार्टी के आधार को मजबूत करने और कैडर को जुटाने के लिए राज्य के पार्टी नेताओं के साथ मिलकर काम करना शुरू कर दिया है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया प्रियंका गांधी ने ग्राम स्तर पर पार्टी को मजबूत करने पर सबसे ज्यादा जोर दिया है।
उन्होंने पद संभालने के बाद से कई बदलाव किए हैं। उन्होंने न केवल छोटी नई कार्यकारी समितियों का गठन किया, बल्कि नए जिला अध्यक्षों को भी नियुक्त किया, कुछ चुनाव संबंधी समितियों का गठन किया और पार्टी विधायक अजय कुमार लल्लू को प्रदेश अध्यक्ष बनाया। उनके मार्गदर्शन में, कांग्रेस जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन करती रही है। जहां प्रियंका गांधी स्थानीय नेताओं की उपस्थिति में उन्हें सीधे संबोधित करती हैं। वे जमीनी घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रही हैं और उन्होंने नेताओं से किसी भी मुद्दे पर उनसे सीधे बात करने को कहा है।
स्वतंत्रता के 75वें वर्ष को देखते हुए कांग्रेस राज्य इकाई के वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों को उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में 30,000 गांवों को कवर करते हुए 75 घंटे बिताने को कहा। कांग्रेस का लक्ष्य करीब 90 लाख लोगों तक सीधे पहुंचना था।
पार्टी ने उत्तर प्रदेश के लिए एक चुनाव समिति का गठन किया है। कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं को जमीन पर उतरने और लोगों को प्रभावित करने वाले मुद्दों को उठाने की भी योजना बनाई है, चाहे वह कोरोना की दूसरी लहर में हुई तबाही का मुद्दा हो या बेरोजगारी और महंगाई का।