उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022: तालिबान का शासन अफगानिस्तान में, लेकिन भाजपा की इस बहाने सपा पर चढ़ाई
तालिबान का शासन बेशक अफगानिस्तान के लिए है, लेकिन उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव को लेकर उसकी चर्चा ज्यादा यहां है। तालिबान का कब्जा और इसके मद्देनजर विभिन्न मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर उत्तर प्रदेश भाजपा के सोशल मीडिया अभियान के निशाने पर समाजवादी पार्टी है।
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अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा है लेकिन तालिबान के बहाने उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी पर हमले हो रहे हैं। तालिबानी शासन को लेकर भारतीय जनता पार्टी के प्रचार अभियान में सबसे ज्यादा निशाने पर सपा है। जिसमें सपा पर यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि सपा मुसलमानों का तुष्टिकरण करती है। जानकारी के मुताबिक भाजपा सोशल मीडिया को तब तक सपा पर हमले जारी रखने को कहा गया है जब तक अंतरराष्ट्रीय समुदाय में तालिबान राज की चर्चा हो रही है।
व्हाट्सएप, ट्विटर समेत पार्टी के तमाम सोशल मीडिया हैंडल से साझा किए गए संदेशों पर एक नजर डालने से यह साफ पता चलता है भाजपा तालिबानी राज के बहाने लोगों की जेहन में सपा के पुराने शासन को याद दिलाने की कोशिश कर रही है। पिछले दो हफ्तों में कम से कम 30 फीसदी पोस्ट तालिबान से संबंधित मुद्दों पर किए गए हैं। जिसमें कट्टरपंथी संगठन के नियंत्रण में आने के बाद अफगानिस्तान में फैली अराजकता और मानवाधिकारों के उल्लंघन को व्यापक रूप से प्रचारित किया जा रहा है और सपा नेताओं के बयान साझा करके यह बताने की कोशिश हो रही है कि कैसे सपा नेता तालिबान के इन कृत्यों का समर्थन कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने अमर उजाला डिजिटल से बातचीत में कहा- तालिबान महिला विरोधी, बच्चे विरोधी और युवा विरोधी है। वे विकास के विरोधी हैं। सपा की भी यही सोच है। उनके नेता तालिबान के समर्थन में बोलते रहते हैं। हम ऐसी सोच रखने वालों के खिलाफ हैं। दुनिया तालिबान का चेहरा देख रही है और यूपी की जनता को भी सपा का चेहरा देखना चाहिए। हम इनकी तालिबानी सोच और माफिया से इनकी सांठगांठ को लेकर उन्हें घेरेगें। आने वाले समय में यह हमला और तेज होगा।
भाजपा-सपा में मुख्य मुकाबला
भाजपा के सोशल मीडिया पोस्ट में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को एक "मजबूत व्यक्तित्व" और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को "हिंदुत्व के ब्रांड" के रूप में कट्टरपंथी इस्लाम से मुकाबला करने के एकमात्र विकल्प के रुप में बताया जा रहा है। भाजपा के सोशल मीडिया अभियान में इसका जमकर प्रचार किया जा रहा है कि पिछली सरकार तुष्टीकरण और वोटबैंक की राजनीति कर रही थी।
दरअसल तालिबान को लेकर भाजपा की सपा पर यह चढ़ाई इसलिए है क्योंकि यह माना जा रहा है कि अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश के चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा और सपा के बीच है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि भाजपा ने कथित मुस्लिम तुष्टीकरण के प्रचार को तेजी से आगे बढ़ा रही है और सोशल मीडिया के लिए भी उसी आधार पर रणनीति बनाई गई है, जिससे कि हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण में मदद मिल सके। भाजपी इसी नीति के तहत बसपा और कांग्रेस पर भी हमले तेज कर रही है, लेकिन उसके मुख्य निशाने पर सपा है क्योंकि वह चुनाव में अपना मुख्य प्रतिद्वंदी उसे ही मान रही है।
यूपी भाजपा ने 15 अगस्त के बाद काबुल में बढ़ते मानवीय संकट को दर्शाने वाले वीडियो पोस्ट किए। विशेष रूप से देश से बाहर निकलने के लिए बेताब हवाई अड्डों पर लोगों की भीड़, शरणार्थियों को निकालने के लिए खचाखच भरे विमान, राजधानी पर तालिबान के कब्जे के बाद हुए विस्फोट, महिलाओं पर लगाए गए प्रतिबंध, बुर्का पहनने को मजबूर महिलाएं और पत्रकारों का उत्पीड़न से संबंधित वीडियो पोस्ट हुए। दूसरी तरफ यूपी भाजपा की तरफ से कुछ ऐसे वीडियो भी पोस्ट किए गए हैं जिसमें कुछ मुस्लिम महिलाएं यह बता रही हैं कि कैसे उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने उनकी जिंदगी बदल दी है।
तालिबानी सोच वाले नेता
एक विशेष वीडियो में, पार्टी की राज्य इकाई उन "तालिबानी मानसिकता वाले समाजवादी पार्टी के नेता" की आलोचना कर रही है जिन्होंने तालिबान के समर्थन में बयान दिया। वीडियो में इसे भारतीय समाज और उसके जीवन के लिए खतरा पैदा करने वाला बताया जा रहा है।
गौरतलब है कि तालिबान पर दिए गए बयान को लेकर समाजवादी पार्टी के सांसद और दो अन्य लोगों के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज हो चुका है। सपा सांसद डॉक्टर शफीक उर रहमान बर्क ने तालिबान के समर्थन में बयान दिया था। बर्क ने कहा था कि तालिबान एक ताकत है और उसने अमेरिका के भी पैर नहीं जमने दिए। तालिबान अब अपना देश खुद चलाना चाहता है तो किसी को क्या दिक्कत है?
बर्क के बयान ने भाजपा को दिया मौका
बर्क के बयान ने भाजपा को सपा पर हमला करने का एक बढ़िया मौका दे दिया। भाजपा सोशल मीडिया टीम ने बिना देरी किए बर्क की निंदा में पोस्ट की बौछार कर दी। राज्य इकाई ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कुछ सदस्यों की टिप्पणियों की भी आलोचना की। मौलाना सज्जाद नोमानी ने अपने बयान में अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे को सही बताया था. उन्होंने बयान में कहा था कि अफगानिस्तान पर तालिबानियों का कब्जा जायज है।
सोशल मीडिया टीम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 19 अगस्त को विधानसभा सत्र के दौरान सदन को संबोधित करते समय तालिबान समर्थकों पर दिए गए बयान का भी प्रचार कर रही है। सीएम योगी ने कहा था- कुछ लोग बेशर्मी से कर रहे तालिबान का समर्थन कर रहे हैं। हमें जरूरत है कि वैसे लोगों को एक्सपोज किया जाए। अफगानिस्तान में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ क्रूरता की जा रही है।
अखिलेश जी... जनता आपके कारनामे देख रही है
— BJP Uttar Pradesh (@BJP4UP) August 28, 2021
तालिबानी सोच वाले सपा के बेशर्म नेताओं का समर्थन क्यों कर रहे हैं ? pic.twitter.com/ps6hK86LIK
साथ ही सोशल मीडिया अभियान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस बयान का भी जमकर प्रचार किया गया है कि पहले राज्य में हर तीसरे दिन एक दंगा होता था, लेकिन पिछले साढ़े चार साल में एक भी दंगा नहीं हुआ। राज्य पार्टी इकाई की तरफ से ट्वीट किए गए एक कार्टून में दिखाया गया है कि कैसे सपा, बसपा और कांग्रेस जैसी पार्टियां कथित तौर पर मुस्लिमों का तुष्टिकरण करती हैं।
एक का कुछ कहना, पूरी पार्टी की राय नहीं
हालांकि, सपा के एक नेता का कहना है ‘किसी एक सांसद के कुछ कहने से यह समझ लेना गलत है कि तालिबान के बारे में पूरी पार्टी की राय वही है ऐसा कहना गलत है। भाजपा तालिबान के बहाने हिंदू वोटों के धुव्रीकरण की कोशिश कर रही है। वहीं पार्टी प्रवक्ता नावेद सिद्दीकी ने मीडिया से कहा कि तालिबान मुद्दे को यूपी चुनाव में लाकर भाजपा कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान कुशासन और बदइंतजामी को जनता की याद्दाश्त से दूर करने की कोशिश कर ही है। जबकि भाजपा राज्य इकाई के सोशल मीडिया समन्वयक अंकित चंदेल का कहना है पार्टी सकारात्मक चुनाव अभियान पर ध्यान केंद्रित कर रही है लेकिन विपक्ष के झूठ को भी तो उजागर करना है।