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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Up election 2022: A large section of Muslim women wanted to vote for Yogi, but the hijab controversy scared off the voters

उत्तर प्रदेश चुनाव: मुसलमानों का एक तबका योगी को वोट देना चाहता था, लेकिन हिजाब मामले ने फेरा पानी!

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 19 Feb 2022 05:32 PM IST
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सार
हिजाब मामले पर पार्टी नेताओं की बयानबाजी से यह मुद्दा 'हिंदू-मुस्लिम' बन गया। जो मुस्लिम भाजपा और योगी सरकार को लेकर पॉजिटिव थे, वे पीछे हट गए। उनमें डर बैठ गया। दूसरी तरफ इस मुद्दे से हिंदू वोटरों का वैसा धुर्वीकरण नहीं हो सका, जैसा सोचा गया था। जब ये मामला राजनीतिक रंग में रंगा तो फायदे की जगह, नुकसान में बदल गया...
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Up election 2022: A large section of Muslim women wanted to vote for Yogi, but the hijab controversy scared off the voters
मुस्लिम महिलाओं के साथ योगी आदित्यनाथ - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

उत्तर प्रदेश चुनाव में मुसलमानों का एक बड़ा तबका 'योगी' सरकार के पक्ष में था। इनमें बहुत से कारोबारी, नौकरी पेशा और छोटा मोटा कामधंधा करने वाले मुस्लिम परिवार शामिल हैं। पहले तीन चरण के मतदान के दायरे में आने वाली विधानसभा सीटों पर लोगों से की गई बातचीत में यह बात सामने आई है कि उत्तर प्रदेश में मुसलमानों का एक तबका 'योगी' को वोट देना चाहता था, मगर 'हिजाब' ने उस पर पानी फेर दिया। भाजपा की झोली में जो फायदा आना था, वह नुकसान में बदल गया। राजनीतिक जानकारों का भी यही कहना है कि उत्तर प्रदेश में सुरक्षा के माहौल को 'भाजपा' अच्छे से कैश कर सकती थी, क्योंकि इसका फायदा हिंदू-मुस्लिम और दूसरे सभी धर्मों के लोगों को बराबर मिला है। शिक्षण संस्थान या ट्रेनिंग सेंटर, जहां पर अनुशासन की नींव पड़ती है, वहां ड्रेस कोड में हिजाब ठीक नहीं है। भाजपा नेता, इस मुद्दे पर फायरब्रांड बन गए। नतीजा, अनेक सीटों पर 'हिंदू-मुस्लिम' का संदेश चला गया। जो मुस्लिम परिवार भाजपा के लिए आगे बढ़ रहे थे, उन्होंने कदम पीछे खींच लिया। इस प्रकरण में भाजपा को यूपी चुनाव में करीब तीन दर्जन सीटों का नुकसान हो सकता है।

पक्के मकान मिले, काम-धंधे का माहौल और राशन

कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र के जफर कहते हैं, योगी सरकार में राजनीतिक आरोप प्रत्यारोपों को एक तरफ रख कर देखें तो सुरक्षा का माहौल सामने आता है। इसमें तो सभी धर्मों और बिरादरियों का फायदा है। ऐसे में जो मुस्लिम तरक्की और अमन पसंद हैं, वे भाजपा को वोट देंगे। इसी विधानसभा क्षेत्र के रियाज्जुदीन फारूख कहते हैं, विकास तो कुछ खास नहीं हुआ। हां, पुलिस अब तंग नहीं करती। गुंडागर्दी भी खत्म हो गई है। सुकून से कामधंधा कर पा रहे हैं। पक्के मकान तो मिले हैं। कोरोनाकाल में राशन भी बराबर आता रहा।



ऐसे में मुसलमानों को अपने वोट को लेकर सोचना चाहिए। मुरादाबाद के सिराज अहमद का कहना था, विकास हुआ है। लोगों को दो वक्त का भोजन मिल रहा है। ढाई लाख रुपये मिले, मकान मिल गया, और क्या चाहिए। पांच साल में सुरक्षा का जो वातारण मिला है, वह सबसे सही काम हुआ है। माफिया, वह तो सलाखों के पीछे हैं।

जो पढ़ा-लिखा मुस्लिम तबका है, वह भाजपा को वोट देगा

मुजफ्फरनगर के प्रसिद्ध 'शिव चौक' के निकट सब्जी मंडी में विक्रेता शब्बीर ने कहा, मेरा अपना अनुमान है कि मौजूदा सरकार दोबारा आएगी। जो पढ़ा-लिखा मुस्लिम है, वह भाजपा को वोट देगा। मौजूदा सरकार ने गुंडागर्दी खत्म कर दी। लड़की आजाद है, मां बाप उससे बेफिक्र हो गए। एक आम आदमी को और क्या चाहिए। उसकी जरूरत तो बस इतनी सी है। कुंदरकी में प्रधान यासीन बाकीपुर ने स्वीकार किया कि भाजपा के समय में खाद्यान्न तो मिला है, मगर विकास ठीक नहीं रहा। हमारे कुछ लोग भाजपा को वोट दे सकते हैं। नकुड़ विधानसभा क्षेत्र में गांव बोड़पुर के किसान इरशाद साजिद कहते हैं, चुनाव में महंगाई मुद्दा है। बाकी तो कोई दिक्कत नहीं है। कानून व्यवस्था ठीक है। देर रात तक कोल्हू पर काम करते हैं। गन्ने की पेमेंट देर-सवेर आ ही जाती है। प्रगतिशील मुस्लिम हैं तो वह योगी को वोट देगा। सरधना के प्रसिद्ध चर्च के सामने बैठे जहीर खान ने कहा, सुरक्षा का माहौल तो बना है। 'थाना भवन' विधानसभा के गांव 'भैसानी इस्लामपुर' में बदले हुए मुस्लिम रहते हैं। जो पहले राजपूत थे, मगर बाद में वे किन्हीं कारणों से मुस्लिम बन गए। इसी गांव के राहुल राणा कहते हैं, गांव में 11 हजार वोटों में से एक हजार वोट भाजपा प्रत्याशी को मिल सकते हैं।

90 फीसदी मुसलमानों को मकान मिले

करहल बाईपास रोड पर सर्वेश यादव ने कहा, सरकारी योजना के तहत 90 फीसदी मुसलमानों को मकान मिल गए, हिंदुओं को उनके मुकाबले बहुत कम मिले हैं। चुनाव में हकीकत दिखाई दे रही है। सरकारी योजनाओं को अधिकांश फायदा मुसलमानों को मिला है। कुछ मुसलमान, भाजपा को वोट दे रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार निर्मल यादव का कहना है कि 'हिजाब' का विवाद उल्टा पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था, पक्के मकान और राशन, इन मुद्दों पर अनेक मुस्लिम परिवार सहमत हैं। अराजकता जैसा कुछ नहीं है। हिजाब, किसी शिक्षण संस्थान के लिए ठीक नहीं है। भाजपा इस मसले को ठीक से हैंडल नहीं कर सकी। अगर वह संभलकर इस मुद्दे पर सकारात्मक पक्ष के साथ आगे बढ़ती तो इससे पार्टी को चुनाव में फायदा हो सकता था।


पार्टी नेताओं की बयानबाजी से यह मुद्दा 'हिंदू-मुस्लिम' बन गया। जो मुस्लिम भाजपा और योगी सरकार को लेकर पॉजिटिव थे, वे पीछे हट गए। उनमें डर बैठ गया। दूसरी तरफ इस मुद्दे से हिंदू वोटरों का वैसा धुर्वीकरण नहीं हो सका, जैसा सोचा गया था। जब ये मामला राजनीतिक रंग में रंगा तो फायदे की जगह, नुकसान में बदल गया। हालांकि यूपी भाजपा के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने कहा था, हिजाब विवाद का असर यूपी चुनाव में नहीं होने वाला है। यूपी चुनाव विकास और कानून व्यवस्था के नाम पर हो रहा है। प्रदेश में आज 12 बजे रात में भी हिंदू हो या मुस्लिम लड़की, वह अपने घर पहुंच रही है।

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