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सीएम योगी की पहली पसंद है ये गाय, जानिए ऐसा क्या है खास ?
Updated Tue, 28 Mar 2017 01:05 PM IST
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सीएम योगी आदित्यनाथ
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सीएम बनने के बाद से मीडिया की सुर्खियों में छाए योगी आदित्यनाथ अपने गौ प्रेम के लिए भी विशेष रूप से जाने जाते हैं। आश्रम में रहते हुए उनके दिन की शुरुआत गौ सेवा से ही होती थी। अभी दो दिन के गोरखपुर दौरे के दौरान भी उन्होंने दिनचर्या गौ सेवा से ही शुरू की। इतना ही नहीं मीडिया से बातचीत के दौरान भी उनका गऊ के प्रति प्रेम देखने को मिलता है।
गोरखपुर आश्रम में करीब 400 गाय हैं। इनमें साहिवाल और गुजरात के गीर नस्ल की गाय भी शामिल हैं। आश्रम के लोग बताते हैं कि सीएम योगी को इन दोनों नस्लों की गायें बहुत पसंद हैं। आखिर ऐसा क्या है कि योगी आदित्यनाथ को इन नस्लों के प्रति विशेष प्रेम है। दरअसल, ये दोनों नस्लें बहुत सारी खूबियां समेटे हैं। संकर नस्ल इनके मुकाबले कहीं नहीं ठहरती।
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गोरखपुर आश्रम में करीब 400 गाय हैं। इनमें साहिवाल और गुजरात के गीर नस्ल की गाय भी शामिल हैं। आश्रम के लोग बताते हैं कि सीएम योगी को इन दोनों नस्लों की गायें बहुत पसंद हैं। आखिर ऐसा क्या है कि योगी आदित्यनाथ को इन नस्लों के प्रति विशेष प्रेम है। दरअसल, ये दोनों नस्लें बहुत सारी खूबियां समेटे हैं। संकर नस्ल इनके मुकाबले कहीं नहीं ठहरती।
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साहिवाल पर बरेली के वैज्ञानिक की रिसर्च
डॉक्टर रणवीर सिंह, साहिवाल गाय
बरेली स्थित MRI में सीनियर वैज्ञानिक डॉ. रणवीर सिंह देश में साहिवाल नस्ल पर रिसर्च के लिए जाने जाते हैं। उनकी मानें तो ये चमत्कार ही है कि जितने भी लोग साहिवाल का दूध पीते हैं, उनमें कोई डायबिटीज और कैंसर जैसी कोई बीमारी नहीं मिलती।
एक इंटरव्यू में रणवीर सिंह बताते हैं कि जब उन्होंने साहिवाल नस्ल के बारे में जानना शुरू किया तो उनकी खोज पंजाब में इस नस्ल को पालने वाले मुस्लिम गुर्जरों पर रुकी। ये एक घुमंतू जाति है जो राजस्थान के गढ़साना क्षेत्र से चारे की खोज में पंजाब पहुंची। फिलहाल ये लोग पंजाब के अबोहर, फाजिल्का, और बठिंडा में डेरों के रूप में रहते हैं।
रणवीर सिंह कहते हैं कि उन्हें ये देखकर हैरानी हुई कि पंजाब के जिस इलाके में कैंसर मरीजों की औसत संख्या देश के मुकाबले दुगुने से भी ज्यादा है। वहां, साहिवाल नस्ल का दूध पीने वालों में कैंसर और डायबिटीज जैसी कोई बीमारी नहीं दिखी। बता दें कि कैंसर का औसत देश में एक लाख पर 38 लोगों का है जबकि पंजाब में यही औसत 78 का है।
एक इंटरव्यू में रणवीर सिंह बताते हैं कि जब उन्होंने साहिवाल नस्ल के बारे में जानना शुरू किया तो उनकी खोज पंजाब में इस नस्ल को पालने वाले मुस्लिम गुर्जरों पर रुकी। ये एक घुमंतू जाति है जो राजस्थान के गढ़साना क्षेत्र से चारे की खोज में पंजाब पहुंची। फिलहाल ये लोग पंजाब के अबोहर, फाजिल्का, और बठिंडा में डेरों के रूप में रहते हैं।
रणवीर सिंह कहते हैं कि उन्हें ये देखकर हैरानी हुई कि पंजाब के जिस इलाके में कैंसर मरीजों की औसत संख्या देश के मुकाबले दुगुने से भी ज्यादा है। वहां, साहिवाल नस्ल का दूध पीने वालों में कैंसर और डायबिटीज जैसी कोई बीमारी नहीं दिखी। बता दें कि कैंसर का औसत देश में एक लाख पर 38 लोगों का है जबकि पंजाब में यही औसत 78 का है।
साहिवाल और उसके दूध की खासियत
साहिवाल गाय
- इसके दूध में वसा की मात्रा संकर प्रजाति की गाय से करीब-करीब दोगुनी होती है। यह साढ़े पांच से छः प्रतिशत तक होती है।
- इसके दूध में बीटा प्रोटीन में 12 तरह की विभिन्नाताएं पाई जाती हैं। बीटा ए-2 सिर्फ इसी नस्ल में पाया जाता है। साधारण भाषा में कहें तो इस तत्व की वजह से साहीवाल के दूध में औषधीय गुण आ जाता है।
- इसके दूध से कोलेस्ट्रोल लेवल कम होता है।
- डायबिटीज और दिल की बीमारियों में कमी आती है।
- यह करीब 20-25 लीटर तक दूध देती है।
- इसके दूध की कीमत ज्यादा मिलती है।
- यह करीब 20-21 तक तक गर्भधारण कर सकती है यानि पूरे जीवन दूध देती रहती है।
- गाय की इस नस्ल को गर्मी और सर्दी में ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं पड़ती। यह दोनों मौसमों में अच्छे से एडजस्ट कर लेती है।
- इसके दूध में बीटा प्रोटीन में 12 तरह की विभिन्नाताएं पाई जाती हैं। बीटा ए-2 सिर्फ इसी नस्ल में पाया जाता है। साधारण भाषा में कहें तो इस तत्व की वजह से साहीवाल के दूध में औषधीय गुण आ जाता है।
- इसके दूध से कोलेस्ट्रोल लेवल कम होता है।
- डायबिटीज और दिल की बीमारियों में कमी आती है।
- यह करीब 20-25 लीटर तक दूध देती है।
- इसके दूध की कीमत ज्यादा मिलती है।
- यह करीब 20-21 तक तक गर्भधारण कर सकती है यानि पूरे जीवन दूध देती रहती है।
- गाय की इस नस्ल को गर्मी और सर्दी में ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं पड़ती। यह दोनों मौसमों में अच्छे से एडजस्ट कर लेती है।