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Yogi Cabinet: यूपी में आयातित ब्राह्मणों पर आश्रित भाजपा, योगी सरकार के आठ ब्राह्मण मंत्रियों में पांच बाहरी

Tue, 12 May 2026 06:54 AM IST
Himanshu Mishr हिमांशु मिश्र
Updated Tue, 12 May 2026 06:54 AM IST
सार

उत्तर प्रदेश में हाल ही में राज्य सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया है। मंत्रिमंडल की मौजूदा स्थिति को देखकर यही प्रतीत होता है कि सत्ता धारी दल भाजपा राज्य में आयातित ब्राह्मणों पर आश्रित हो गई। क्योंकि योगी सरकार के आठ ब्राह्मण मंत्रियों में पांच बाहरी हैं।

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UP Cabinet: BJP relies on imported Brahmins in UP, 5 outsiders among 8 Brahmin ministers in Yogi govt
योगी कैबिनेट का विस्तार - फोटो : amar ujala

विस्तार

उत्तर प्रदेश में विधानसभा की करीब सौ सीटों पर प्रभावशाली उपस्थिति रखने वाले ब्राह्मण बिरादरी को साधे रखने के लिए भाजपा दूसरे दलों से आयातित नेताओं के भरोसे है। राज्य में 2022 में पहली बार अपनी सत्ता बरकरार रखने वाली भाजपा की सरकार में आठ ब्राह्मण मंत्रियों में से पांच दूसरे दलों से आयातित हैं। बीते लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस से आए जितिन प्रसाद के केंद्र में मंत्री बनने के बाद रविवार को हुए मंत्रिमंडल विस्तार में सपा से आए मनोज पांडे को योगी सरकार में जगह दी गई है।
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योगी मंत्रिमंडल की वर्तमान स्थिति
वर्तमान स्थिति की बात करें तो मंत्रिमंडल में शामिल डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, प्रतिभा शुक्ला बसपा से, मनोज पांडे, रजनी तिवारी सपा से और दयाशंकर मिश्र दयालू कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए थे। साल 2022 में दोबारा सरकार बनने पर कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में आए जितिन प्रसाद को पीडब्ल्यूडी जैसा अहम विभाग मिला था। हालांकि बाद में प्रसाद जब केंद्र में मंत्री बने तो सपा से आए मनोज पांडे को योगी मंत्रिमंडल में जगह मिली।
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पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं से महज तीन नाम
योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं में सतीश चंद्र शर्मा, सुनील शर्मा और योगेंद्र उपाध्याय को ही मंत्रिमंडल में जगह मिली है। बीती सरकार में बेहद अहम ऊर्जा विभाग संभालने वाले श्रीकांत शर्मा को दूसरे कार्यकाल में मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली, जबकि डिप्टी सीएम रहे दिनेश शर्मा को राज्यसभा भेजा गया।

ऐसी रणनीति क्यों?
दरअसल, 10 से 13 फीसदी आबादी वाली ब्राह्मण बिरादरी का राज्य में मुख्य रूप से पूर्वांचल, अवध, बुंदेलखंड में व्यापक उपस्थिति है। यह बिरादरी सौ से अधिक सीटों पर हार-जीत के निर्णय में अहम भूमिका निभाती है। बीते कई चुनावों में इस बिरादरी ने राज्य के चुनाव परिणाम को तय करने में अहम भूमिका निभाई है। ऐसे में पार्टी की रणनीति अलग-अलग क्षेत्रों के बिरादरी के कद्दावर नेताओं को साधने की रही है।

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