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UP Assembly Election: नेतागण कृपया ध्यान दें, वर्चुअल रैली को शारीरिक रैली में बदलने की परंपरा सेट करने से क्यों बचना चाहिए?
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स्वामी प्रसाद मौर्य के सपा में शामिल होने के दौरान सपा कार्यालय में जुटी भीड़।
- फोटो :
ANI
विस्तार
शुक्रवार को लखनऊ में सपा कार्यालय में स्वामी प्रसाद मौर्य समेत बाकी नेताओं के पार्टी ज्वाइन करने के दौरान कोरोना गाइडलाइन की धज्जियां उड़ाई गईं। कार्यक्रम में सैकड़ों लोग शामिल हुए, जबकि चुनाव आयोग ने 15 जनवरी तक रैलियों पर रोक लगा रखी है।इस बारे में लखनऊ के जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने कहा है कि ये कार्यक्रम बिना अनुमति के हुआ है। सूचना मिलने पर मजिस्ट्रेट के साथ पुलिस टीम को सपा कार्यालय भेजा गया। रिपोर्ट के आधार पर जिला निर्वाचन अधिकारी ने जांच कराने के साथ ही इस मामले में एफआइआर कराने का निर्देश दिया है।गौर करने वाली बात यह है कि कोरोना दिशानिर्देश का उल्लंघन नहीं हो यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी जिलाधिकारियों और निर्वाचन अधिकारियों के पास ही है। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग 15 जनवरी के बाद भी शारीरिक रैली, रोड शो और जनसभाओं पर पूरी तरह पाबंदी लगा सकता है।
आयोग ने दिए थे जिम्मेदारी तय करने के निर्देश
चुनाव आयोग ने बीते सप्ताह चुनावों की घोषणा से पहले ही गृह मंत्रालय के साथ बैठक में में यह सुनिश्चित करने के लिए कहा था कि राष्ट्रीय और राज्य आपदा प्रबंधन अधिनियम के प्रावधानों के तहत अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए ताकि मतदान वाले राज्यों में कोरोना दिशानिर्देशों को सख्ती से लागू किया जा सके। चुनाव के दौरान कोरना गाइडलाइन के उल्लंघन के मामले नामांकन और चुनाव प्रचार के दौरान पहले भी आते रहे हैं, क्योंकि राजनीतिक दल अधिक से अधिक भीड़ जुटाकर अपना शक्ति प्रदर्शन करना चाहते हैं।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुशील चंद्रा
- फोटो :
एएनआई
क्या कार्रवाई कर सकता है आयोग
बीते साल पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान नियमों में ढिलाई के चलते आलोचना का शिकार होने वाला चुनाव आयोग इस बार किसी भी तरह की कोताही बरतने के मूड में नहीं है। आयोग के सूत्रों के मुताबिक इस मामले में आयोग जिलाधिकारी से रिपोर्ट तलब कर सकता है और सपा नेताओं के 24 से 48 घंटे तक चुनाव प्रचार पर रोक भी लगाई जा सकती है।
आयोग के एक अधिकारी ने कहा वर्चुअल रैली का मतलब है कि नेता अपने पार्टी कार्यालय या घरों में बैठकर डिजिटल रैली करें या भाषण दें और लोग अपने घरों में बैठकर मोबाइल फोन या लैपटॉप पर अपने नेताओं को सुनें। वर्चुअल रैली में यदि इस तरह भीड़ जुटती है तो यह तो शारीरिक रैली के समान हुई और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन कानून 2005, महामारी एक्ट 1897 और राज्य आपदा नियमन कानून के तहत उन पर कार्रवाई भी की जा सकती है।
इन्हीं एक्ट के आधार पर जिलाधिकारियों और निर्वाचन अधिकारियों को राजनीतिक दलों के भीड़भाड़ वाले कार्यक्रमों पर नजर रखने और उसे रोकने की शक्ति दी गई है। पिछले सप्ताह शनिवार को चुनावों की घोषणा के बाद कोरोना गाइडलाइन के कड़े नियम बनाए गए थे जिसके अनुसार यदि कोई उम्मीदवार या कोई पार्टी इस गाइडलाइन का उल्लंघन करती है तो इस पर जिलाधिकारी या निर्वाचन अधिकारी फैसला कर सकते हैं और उन्हें आगे और रैली करने से रोका जा सकता है।
बीते साल पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान नियमों में ढिलाई के चलते आलोचना का शिकार होने वाला चुनाव आयोग इस बार किसी भी तरह की कोताही बरतने के मूड में नहीं है। आयोग के सूत्रों के मुताबिक इस मामले में आयोग जिलाधिकारी से रिपोर्ट तलब कर सकता है और सपा नेताओं के 24 से 48 घंटे तक चुनाव प्रचार पर रोक भी लगाई जा सकती है।
आयोग के एक अधिकारी ने कहा वर्चुअल रैली का मतलब है कि नेता अपने पार्टी कार्यालय या घरों में बैठकर डिजिटल रैली करें या भाषण दें और लोग अपने घरों में बैठकर मोबाइल फोन या लैपटॉप पर अपने नेताओं को सुनें। वर्चुअल रैली में यदि इस तरह भीड़ जुटती है तो यह तो शारीरिक रैली के समान हुई और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन कानून 2005, महामारी एक्ट 1897 और राज्य आपदा नियमन कानून के तहत उन पर कार्रवाई भी की जा सकती है।
इन्हीं एक्ट के आधार पर जिलाधिकारियों और निर्वाचन अधिकारियों को राजनीतिक दलों के भीड़भाड़ वाले कार्यक्रमों पर नजर रखने और उसे रोकने की शक्ति दी गई है। पिछले सप्ताह शनिवार को चुनावों की घोषणा के बाद कोरोना गाइडलाइन के कड़े नियम बनाए गए थे जिसके अनुसार यदि कोई उम्मीदवार या कोई पार्टी इस गाइडलाइन का उल्लंघन करती है तो इस पर जिलाधिकारी या निर्वाचन अधिकारी फैसला कर सकते हैं और उन्हें आगे और रैली करने से रोका जा सकता है।
सपा में शामिल होने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य, धर्म सिंह सैनी।
- फोटो :
ANI
राज्यों को जारी हो चुके हैं दिशा-निर्देश
आयोग के अधिकारी का कहना है कि मुख्य निर्वाचन अधिकारियों और जिला मशीनरी से यह अपेक्षा की जाती है कि वह संबंधित उम्मीदवारों के साथ-साथ ऐसे उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार आयोजकों के खिलाफ उचित और दंडात्मक प्रावधान लागू करें। दिशा-निर्देशों के कड़ाई से अनुपालन के लिए अलग-अलग निर्देश और चुनाव वाले राज्यों की राज्य सरकारों को जारी किए जा चुके हैं।
वर्चुअल रैली में कैसे जुटी भीड़
स्वामी प्रसाद मौर्य समेत कई नेताओं के सपा में शामिल होने का कार्यक्रम वर्चुअली रखा गया था तो इतने लोगों की भीड़ कैसे जुटी, क्या आपलोगों को कोरोना गाइडलाइन का ख्याल नहीं आया? इस बारे में पूछे जाने पर सपा के नेता ने बताया ‘लोगों में बाहर आने और हमारे नेताओं को सुनने के लिए जबरदस्त उत्साह था। स्वामी प्रसाद मौर्य के पार्टी में आने से हमारे साथ-साथ उनके कार्यकर्ता और समर्थकों में भी खूब जोश था। हम सभी को वापस जाने या उन्हें नहीं आने के लिए तो नहीं कर सकते थे।’
वर्चुअल रैलियों में भीड़ इकट्ठी होने से कैसे रोका जा सकता है?
इस बारे में आयोग के अधिकारी का कहना है कि पार्टियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी हाल में, किसी भी तरह, कहीं भीड़ इकट्ठी नहीं हो। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को अपने कार्यकर्ताओं को यह संदेश देना होगा कि वे अपने घरों में बैठकर ही ऑनलाइन रैलियों में शामिल हों। यदि रैलियों के लिए बड़े स्क्रीन लगाए जा रहे हों यह खुली जगह पर हो और इस बात का ध्यान रखा जाए कि लोग कम हों और वे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। साथ ही मास्क जरूर पहनें। उनका कहना है कि राजनीतिक पार्टियों को यह समझना होगा कि वर्चुअल रैलियां भविष्य के लिए भी बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं, इसलिए इसे नियमों के अनुसार करने की परंपरा विकसित करनी होगी।
आयोग के अधिकारी का कहना है कि मुख्य निर्वाचन अधिकारियों और जिला मशीनरी से यह अपेक्षा की जाती है कि वह संबंधित उम्मीदवारों के साथ-साथ ऐसे उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार आयोजकों के खिलाफ उचित और दंडात्मक प्रावधान लागू करें। दिशा-निर्देशों के कड़ाई से अनुपालन के लिए अलग-अलग निर्देश और चुनाव वाले राज्यों की राज्य सरकारों को जारी किए जा चुके हैं।
वर्चुअल रैली में कैसे जुटी भीड़
स्वामी प्रसाद मौर्य समेत कई नेताओं के सपा में शामिल होने का कार्यक्रम वर्चुअली रखा गया था तो इतने लोगों की भीड़ कैसे जुटी, क्या आपलोगों को कोरोना गाइडलाइन का ख्याल नहीं आया? इस बारे में पूछे जाने पर सपा के नेता ने बताया ‘लोगों में बाहर आने और हमारे नेताओं को सुनने के लिए जबरदस्त उत्साह था। स्वामी प्रसाद मौर्य के पार्टी में आने से हमारे साथ-साथ उनके कार्यकर्ता और समर्थकों में भी खूब जोश था। हम सभी को वापस जाने या उन्हें नहीं आने के लिए तो नहीं कर सकते थे।’
वर्चुअल रैलियों में भीड़ इकट्ठी होने से कैसे रोका जा सकता है?
इस बारे में आयोग के अधिकारी का कहना है कि पार्टियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी हाल में, किसी भी तरह, कहीं भीड़ इकट्ठी नहीं हो। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को अपने कार्यकर्ताओं को यह संदेश देना होगा कि वे अपने घरों में बैठकर ही ऑनलाइन रैलियों में शामिल हों। यदि रैलियों के लिए बड़े स्क्रीन लगाए जा रहे हों यह खुली जगह पर हो और इस बात का ध्यान रखा जाए कि लोग कम हों और वे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। साथ ही मास्क जरूर पहनें। उनका कहना है कि राजनीतिक पार्टियों को यह समझना होगा कि वर्चुअल रैलियां भविष्य के लिए भी बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं, इसलिए इसे नियमों के अनुसार करने की परंपरा विकसित करनी होगी।
पश्चिम बंगाल के दक्षिणी दिनाजपुर में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते रक्षामंत्री राजनाथ सिंह (फाइल फोटो)
- फोटो :
PTI
पार्टियां मानती नहीं
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में अंतिम तीन चरणों के चुनावों में सभी रैलियों पर प्रतिबंध लगा दिया था। पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान कोरोना बचाव नियमों के उल्लंघन को देखते हुए चुनाव आयोग ने तत्काल प्रभाव से रोड शो और वाहन रैलियों के आयोजन पर रोक लगा दी थी। चुनाव आयोग ने कोरोना प्रोटोकॉल फॉलो करने की जिम्मेदारी राजनीतिक पार्टी और उम्मीदवार पर डाल दी थी और साफ चेतावनी दी थी कि अगर ऐसा नहीं होता है तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले सभी पार्टियों की रैलियों में कोरोना गाइडलाइन की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही थीं।
कुछ इसी तरह की तस्वीरें 2020 में बिहार से दिखाई दी थीं। बिहार में राजनीतिक रैलियों में भारी भीड़ आ रही थी और नेताओं ने बिना मास्क के प्रचार किया। सामाजिक दूरी के नियम का उल्लंघन किया जा रहा था। तब भी आयोग ने कहा था कि उम्मीदवारों और आयोजकों के खिलाफ कोविड प्रोटोकॉल के उल्लंघन और अवहेलना के लिए दंडात्मक प्रावधान लागू किए जाएंगे। हालांकि किसी राजनीतिक दल पर कोई ऐसी कार्रवाई नहीं की गई जो दूसरों के लिए सबक होती।
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में अंतिम तीन चरणों के चुनावों में सभी रैलियों पर प्रतिबंध लगा दिया था। पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान कोरोना बचाव नियमों के उल्लंघन को देखते हुए चुनाव आयोग ने तत्काल प्रभाव से रोड शो और वाहन रैलियों के आयोजन पर रोक लगा दी थी। चुनाव आयोग ने कोरोना प्रोटोकॉल फॉलो करने की जिम्मेदारी राजनीतिक पार्टी और उम्मीदवार पर डाल दी थी और साफ चेतावनी दी थी कि अगर ऐसा नहीं होता है तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले सभी पार्टियों की रैलियों में कोरोना गाइडलाइन की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही थीं।
कुछ इसी तरह की तस्वीरें 2020 में बिहार से दिखाई दी थीं। बिहार में राजनीतिक रैलियों में भारी भीड़ आ रही थी और नेताओं ने बिना मास्क के प्रचार किया। सामाजिक दूरी के नियम का उल्लंघन किया जा रहा था। तब भी आयोग ने कहा था कि उम्मीदवारों और आयोजकों के खिलाफ कोविड प्रोटोकॉल के उल्लंघन और अवहेलना के लिए दंडात्मक प्रावधान लागू किए जाएंगे। हालांकि किसी राजनीतिक दल पर कोई ऐसी कार्रवाई नहीं की गई जो दूसरों के लिए सबक होती।