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Hindi News ›   India News ›   up assembly election 2022 The battle of UP elections has come from Ganga Expressway to Western UP, preparing for Expressway Politics to Power

UP Election 2022: यूपी चुनाव की लड़ाई Ganga Expressway से अब पश्चिमी यूपी तक आई, ‘एक्सप्रेसवे पॉलिटिक्स टू पावर’ की तैयारी

Sat, 18 Dec 2021 04:19 PM IST
Pratibha Jyoti प्रतिभा ज्योति
Updated Sat, 18 Dec 2021 04:19 PM IST
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सार
उत्तर प्रदेश में  एक्सप्रेस वे परियोजनाएं सिसायत के साथ इतनी करीब से जुड़ी हुई हैं कि वे लगातार तीन शासनों के लिए प्रमुख उपलब्धि तो रहीं। लेकिन दो के लिए चुनावी नतीजे ऐसे उलट आए कि सत्ता से दूरी बन गई। 
 
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up assembly election 2022 The battle of UP elections has come from Ganga Expressway to Western UP, preparing for Expressway Politics to Power
गंगा एक्सप्रेस वे - फोटो : social Media

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को शाहजहांपुर में गंगा एक्सप्रेसवे का शिलान्यास किया। यूपी के पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्र को आपस में जोड़ने वाले इस गंगा एक्सप्रेसवे को उत्तरप्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेस वे बताया जा रहा है। 36,200 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेस वे  मेरठ से शुरू होकर हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ होते हुए प्रयागराज जिले में समाप्त होगा। यह यूपी के करीब 12 जिलों को छूएगा।



हाल ही में पूर्वी उत्तर प्रदेश में कई परियोजनाओं को शुरू करने के बाद भारतीय जनता पार्टी 2022 के विधानसभा चुनाव की लड़ाई अब राज्य के पश्चिमी हिस्से में लेकर आई है। पीएम मोदी पहले ही पूर्वी यूपी में कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, पूर्वांचल एक्सप्रेस वे, सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना, उर्वरक कारखाना और गोरखपुर में एम्स, सिद्धार्थनगर में नौ मेडिकल कॉलेजों और वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के उद्घाटन सहित कई परियोजनाओं की शुरुआत कर चुके हैं।




पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन की छाप
पश्चिमी उत्तर प्रदेश वही क्षेत्र हैं जहां किसान आंदोलन के बाद लोगों में भाजपा के खिलाफ असंतोष होने की अलग-अलग रिपोर्ट आ रही थी। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का अनुमान रहा है कि  इस बार किसान अंदोलन के चलते भाजपा को कुछ सीटों का नुकसान उठाना पड़ सकता है। यहां भाजपा की चिंता समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल के  गठबंधन को लेकर भी है क्योंकि इससे पश्चिमी यूपी की 136 सीटों के समीकरण के प्रभावित होने की संभावना है। यहां जाट और मुस्लिम समुदाय का क्षेत्र में खासा असर है और ये दोनों मिलकर क्षेत्र की लगभग 55 सीटों पर असर डालते हैं।

पीएम मोदी व सीएम योगी।
पीएम मोदी व सीएम योगी। - फोटो : अमर उजाला।

कमजोर सीटों पर भी कमल खिलाने की कोशिश 
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 16 जिलों में कुल 136 विधानसभा सीट हैं। भाजपा ने 2017 के चुनाव में 109 सीटें जीती थीं। जबकि 27 सीटों पर उसे हार का मुंह देखना पड़ा। भाजपा जहां एक तरफ अपने जीतने वाले सीटों पर पकड़ बनाए रखना चाहती हैं वहीं कमजोर सीटों पर कमल खिलाने की कोशिश में लगी है। इसलिए सीएम योगी इस तरफ खास ध्यान दे रहे हैं। योगी ने जहां शाहजहांपुर और बदायूं को करोड़ों के प्रॉजेक्ट का तोहफा दिया वहीं पिछले महीने वे आठ नवंबर से 15 नवंबर तक आठ जिलों के दौरे पर रहे।

मैदान में उतरी भाजपा
गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना के जरिए भाजपा समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल के गठबंधन के साथ-साथ राकेश टिकैत के नेतृत्व वाली भारतीय किसान यूनियन (जो पश्चिमी यूपी में किसानों के आंदोलन का नेतृत्व कर रही थी) से मुकाबला करने के लिए मैदान में उतर चुकी है। भाजपा की योजना 2017 के विधानसभा चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी पकड़ मजबूत करने की है जहां सपा और रालोद पार्टी के समर्थन आधार में पैठ बनाने की कोशिश कर रही है। 

भाजपा नेता मानते हैं कि स्वास्थ्य और पोषण जैसे सामाजिक संकेतकों को लेकर देश के बाकी हिस्सों के मुकाबले यूपी को अभी भी बहुत कुछ करने की जरूरत है लेकिन एक्सप्रेस वे और सड़कों को लेकर यह दूसरे राज्यों को कड़ी प्रतिस्पर्धा दे रहा है। यही बात चुनाव में हमें दूसरी पार्टियों से आगे लेकर जाएगी, क्योंकि सड़कों के रास्ते राज्य की तरक्की के रास्ते खुलते हैं और लोगों की जेब में पैसा आएगा। 

पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे
पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे - फोटो : अमर उजाला

एक्सप्रेस वे चुनाव में मुद्दा बनेगा
गंगा एक्सप्रेस वे से पहले पीएम मोदी पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कर चुके हैं। चुनाव से ठीक पहले पीएम नरेंद्र मोदी जिस तरह एक के बाद एक एक्सप्रेस वे का उद्घाटन किया है उससे राजनीतिक जानकारों को यह लगता है कि 'सत्ता के लिए एक्सप्रेस वे राजनीति' उत्तर प्रदेश के चुनावों में एक प्रमुख मुद्दा बन रहा है। कहा जा रहा है कि भाजपा इन परियोजनाओं को चुनावों में 'सफलता के एक्सप्रेस वे' रूप में देख रही है।

भाजपा के इसी दांव को भांपते हुए पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के उद्घाटन से पहले समाजवादी पार्टी ने उसे अपना प्रोजेक्ट कहना शुरू किया और पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने गाजीपुर से लखनऊ के लिए अपनी पूर्वांचल एक्सप्रेसवे विजय रथ यात्रा शुरू कर दी। सपा ने दावा किया कि पूर्वांचल एक्सप्रेस वे उनकी सरकार का आईडिया है। वहीं गंगा एक्सप्रेस वे के उद्घाटन के लिए पीएम से पहुंचने से अखिलेश यादव ने एक आश्चर्यजनक बयान में कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना बसपा प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व सीएम मायावती ने शुरू की थी।

अतीत गवाह, एक्सप्रेस वे से चुनाव नहीं जीते गए
यूपी के वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक टिप्पणीकार राम दत्त त्रिपाठी के मुताबिक अतीत गवाह है कि एक्सप्रेस वे की राजनीति से चुनाव नहीं जीते गए हैं। भाजपा यदि सत्ता में आती है तो केवल एक्सप्रेस वे इसकी वजह नहीं होगी बल्कि उसका हिंदुत्व का एजेंडा इसका एक बड़ा कारण होगा। यह चुनाव जीतने के लिए भाजपा के सफल फॉर्मूलों में एक है। 

मायावती व अखिलेश यादव।
मायावती व अखिलेश यादव। - फोटो : amar ujala

एक्सप्रेस वे की राजनीति नई नहीं
एक्सप्रेस वे राजनीति की संस्कृति नई नहीं है। 2007-2012 से मायावती के दिनों से चल रही है जब पहले ग्रेटर नोएडा-आगरा एक्सप्रेसवे का निर्माण किया गया था। लेकिन 2012 के चुनावों से पहले, वह उसका उद्घाटन नहीं कर पाईं। 2012 में सपा की सरकार बनी तो तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे बनाने का फैसला किया। इसका निर्माण 2014 में शुरू हुआ और 2017 में होने वाले चुनाव से पहले दिसंबर 2016 में इसे जनता के लिए खोल दिया गया।  अखिलेश यादव ने 2017 के चुनावों में इसे अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धि बताई थी। लेकिन अखिलेश की सत्ता में वापसी नहीं हुई। लेकिन इसके उलट भाजपा एक्सप्रेस वे के जरिए सत्ता तक दोबारा पहुंचने की उम्मीद में है। 

विकास के मॉ़डल की धारणा मजबूत होगी
पश्चिमी यूपी में पार्टी के कार्यक्रम की देखरेख करने वाले राज्य भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि चुनावी लड़ाई ‘कहानी और धारणा’ पर टिकी हुई है, और पार्टी अपनी परियोजनाओं और योजनाओं को लोगों के बीच प्रचारित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है। एक्सप्रेस वे बनने से निश्चित तौर पर यह धारणा मजबूत होती है कि भाजपा का विकास मॉड़ल बेहतर है और मोदी विकास पुरुष हैं। चाहे पश्चिमी उत्तर प्रदेश हो या पूर्वांचल हमने पहले से अधिक मार्जिन से जीतने का लक्ष्य रखा है। 

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