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यूपी और उत्तराखंड के करीब 80 हजार होमगार्डों को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत

Tue, 30 Jul 2019 08:32 PM IST
Trainee Trainee अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Trainee Trainee Updated Tue, 30 Jul 2019 08:32 PM IST
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up and uttrakhand home guards will get allowance according to minimum wage of Constable
होम गार्ड (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Social Media
उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के करीब 80 हजार होम गार्डों को मंगलवार सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन सभी होम गार्डों को कांस्टेबल के न्यूनतम वेतन के अनुरूप भत्ता मिलेगा। कोर्ट ने कहा कि उन्हें इस तरह से प्रताड़ित नहीं किया जा सकता। हालांकि शीर्ष अदालत ने होम गार्डों को नियमित करने से इनकार कर दिया है। अब तक यूपी में होम गार्डों को 500 रुपये प्रति कार्यदिवस के हिसाब से भत्ता मिलता था। यानी होमगार्ड से जितने दिनों की सेवा ली जाएगी, उसे कांस्टेबल को मिलने वाले न्यूनतम वेतन के अनुरूप भत्ता मिलेगा। 
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न्यायमूर्ति एसए बोबडे, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति बीआर गवई की पीठ ने मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए यूपी सरकार की याचिका को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने होम गार्ड को कांस्टेबल के न्यूनतम वेतन के बराबर भत्ता देने का आदेश दिया था। साथ ही शीर्ष अदालत ने यूपी सरकार को इन होमगार्डों को दिसंबर, 2019 से ये भत्ता देने के लिए कहा है। यूपी सरकार को आठ हफ्ते के भीतर इस संबंध में आदेश जारी करने के लिए कहा गया है। 
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शीर्ष अदालत ने होम गार्डों को नियमित करने से तो इनकार कर दिया लेकिन कहा कि चूंकि वे नियमित कांस्टेबल के समान काम करते हैं लिहाजा उन्हें न्यूनतम वेतन तो मिलना ही चाहिए। राज्य द्वारा उन्हें न्यूनतम वेतन न देना उचित नहीं है। पीठ ने कहा कि इन लोगों को इस तरह से प्रताड़ित नहीं किया जा सकता।
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यूपी सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने कहा कि करीब तीन वर्ष पूर्व से भत्ता देने से राज्य पर सालाना करीब 18 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा, लिहाजा ऐसा न किया जाए लेकिन पीठ ने इस आग्रह को ठुकरा दिया। सुनवाई के दौरान रंजीत कुमार ने कहा कि होम गार्ड स्वेच्छा से सेवा देते हैं। ऐसे में उन्हें नियमित कांस्टेबल के समान वेतन कैसे दिया जा सकता है? पीठ ने कुमार से कहा कि अगर कुछ खास मौकों पर मसलन दिवाली, गणपति महोत्सव व कांवड़ के दौरान अगर सेवा लेने की बात तो समझ में आती है लेकिन इन होमगार्डों की नियमित रूप से सेवा ली जाती है तो इन्हें कांस्टेबल के समान वेतन मिलना चाहिए। 


वहीं सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के भी करीब 10 हजार होमगार्डों को भी कांस्टेबल के न्यूनतम वेतन के अनुरूप भत्ता देने का आदेश दिया है। उत्तराखंड के होमगार्ड को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
 
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