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UNSC: क्या है संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, क्यों सुधार देखने की जल्दी में नहीं हैं इसके स्थायी सदस्य देश?
Wed, 04 Jan 2023 05:15 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Wed, 04 Jan 2023 05:15 PM IST
सार
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, UN के छह प्रमुख अंगों में से एक है। इस पर अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने, महासभा में संयुक्त राष्ट्र के नए सदस्यों के प्रवेश की सिफारिश करने और UN में किसी भी बदलाव को मंजूरी देने की जिम्मेदारी है।
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UNSC में भारत की दावेदारी
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में एक इंटरव्यू में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि स्थायी सदस्यता का लाभ उठा रहे देश स्पष्ट तौर पर संयुक्त राष्ट्र के सुधारों को देखने की जल्दी में नहीं हैं। जयशंकर ने पाकिस्तान पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वह सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने में पाकिस्तान की भूमिका को बताने के लिए "केंद्र" शब्द की तुलना में और भी ज्यादा कठोर शब्दों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद पर विदेश मंत्री का ताजा बयान क्या है? संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद क्या है? इसमें कौन शामिल हो सकता है? UNSC में सुधार के लिए भारत ने हाल के वर्षों में क्या प्रयास किए हैं? UNSC में सुधार में भारत के समर्थन और विरोध में कौन-कौन है? आइये जानते हैं…
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद पर विदेश मंत्री का ताजा बयान क्या है? संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद क्या है? इसमें कौन शामिल हो सकता है? UNSC में सुधार के लिए भारत ने हाल के वर्षों में क्या प्रयास किए हैं? UNSC में सुधार में भारत के समर्थन और विरोध में कौन-कौन है? आइये जानते हैं…
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर
- फोटो : ANI
जयशंकर का ताजा बयान क्या है?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर 29 दिसंबर से 3 जनवरी तक साइप्रस और ऑस्ट्रिया के दो देशों की यात्रा पर थे। उनकी ऑस्ट्रिया की यात्रा 3 जनवरी को खत्म हुई। जयशंकर ने सोमवार को ऑस्ट्रिया के राष्ट्रीय प्रसारक ओआरएफ को एक इंटरव्यू दिया। इस इंटरव्यू में विदेश मंत्री से पूछा गया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के इस सुधार में कितना समय लगेगा। इसके जवाब में उन्होंने कहा, "...जो लोग आज स्थायी सदस्यता के लाभों का आनंद ले रहे हैं, वे स्पष्ट रूप से सुधार देखने की जल्दी में नहीं हैं। मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही अदूरदर्शी दृष्टिकोण है... क्योंकि अंततः संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता और उनके अपने हित और प्रभावशीलता दांव पर हैं।"
उन्होंने आगे कहा, “मेरी समझ में, इसमें कुछ समय लगेगा, उम्मीद है कि बहुत अधिक समय नहीं होगा। मैं संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों के बीच बढ़ती राय देख सकता हूं जो मानते हैं कि इसमें बदलाव होना चाहिए। यह सिर्फ हमारी बात नहीं हैं।"
विदेश मंत्री एस. जयशंकर 29 दिसंबर से 3 जनवरी तक साइप्रस और ऑस्ट्रिया के दो देशों की यात्रा पर थे। उनकी ऑस्ट्रिया की यात्रा 3 जनवरी को खत्म हुई। जयशंकर ने सोमवार को ऑस्ट्रिया के राष्ट्रीय प्रसारक ओआरएफ को एक इंटरव्यू दिया। इस इंटरव्यू में विदेश मंत्री से पूछा गया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के इस सुधार में कितना समय लगेगा। इसके जवाब में उन्होंने कहा, "...जो लोग आज स्थायी सदस्यता के लाभों का आनंद ले रहे हैं, वे स्पष्ट रूप से सुधार देखने की जल्दी में नहीं हैं। मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही अदूरदर्शी दृष्टिकोण है... क्योंकि अंततः संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता और उनके अपने हित और प्रभावशीलता दांव पर हैं।"
उन्होंने आगे कहा, “मेरी समझ में, इसमें कुछ समय लगेगा, उम्मीद है कि बहुत अधिक समय नहीं होगा। मैं संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों के बीच बढ़ती राय देख सकता हूं जो मानते हैं कि इसमें बदलाव होना चाहिए। यह सिर्फ हमारी बात नहीं हैं।"
UNSC
- फोटो : iStock
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद क्या है?
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) संयुक्त राष्ट्र (UN) के छह प्रमुख अंगों में से एक है। इसकी स्थापना 24 अक्टूबर 1945 को हुई थी। इस पर अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने, महासभा में संयुक्त राष्ट्र के नए सदस्यों के प्रवेश की सिफारिश करने और संयुक्त राष्ट्र में किसी भी बदलाव को मंजूरी देने की जिम्मेदारी है।
सुरक्षा परिषद की संरचना की बात करें तो इसमें पांच स्थायी सदस्य हैं- अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस और रूस। यह सामूहिक रूप से P5 के रूप में जाने जाते हैं। इनमें से कोई भी प्रस्ताव को वीटो कर सकता है। परिषद के दस निर्वाचित सदस्य भी होते हैं जिनका कार्यकाल सिर्फ दो साल का होता है। निर्वाचित सदस्यों को वीटो शक्ति नहीं दी जाती है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) संयुक्त राष्ट्र (UN) के छह प्रमुख अंगों में से एक है। इसकी स्थापना 24 अक्टूबर 1945 को हुई थी। इस पर अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने, महासभा में संयुक्त राष्ट्र के नए सदस्यों के प्रवेश की सिफारिश करने और संयुक्त राष्ट्र में किसी भी बदलाव को मंजूरी देने की जिम्मेदारी है।
सुरक्षा परिषद की संरचना की बात करें तो इसमें पांच स्थायी सदस्य हैं- अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस और रूस। यह सामूहिक रूप से P5 के रूप में जाने जाते हैं। इनमें से कोई भी प्रस्ताव को वीटो कर सकता है। परिषद के दस निर्वाचित सदस्य भी होते हैं जिनका कार्यकाल सिर्फ दो साल का होता है। निर्वाचित सदस्यों को वीटो शक्ति नहीं दी जाती है।
यूएनएससी ब्रीफिंग में यूएन में भारत की राजदूत रुचिरा कंबोज।
- फोटो : ANI
UNSC में सीट पाने के लिए भारत क्यों बड़ा दावेदार है?
UNSC का स्थायी सदस्य बनने के इच्छुक सभी उम्मीदवारों में भारत सबसे अधिक मुखर है। भारत आज एक प्रमुख वैश्विक शक्ति केंद्र बन चुका है। भारत की सदस्यता का दावा इन तथ्यों पर आधारित है कि यह संयुक्त राष्ट्र के संस्थापक सदस्यों में से एक है, सबसे बड़ा लोकतंत्र है, दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश है, और पांचवीं सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है।
साथ ही, भारत जलवायु परिवर्तन, सतत विकास लक्ष्यों और अन्य संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलनों से संबंधित सभी अहम मंचों में सक्रिय रूप से खुद को शामिल करता रहा है। भारत दुनिया के अधिकांश अविकसित और विकासशील देशों के हितों का भी प्रतिनिधित्व करता है। भारत एक देश है जो दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने की विचारधारा रखता है।
UNSC का स्थायी सदस्य बनने के इच्छुक सभी उम्मीदवारों में भारत सबसे अधिक मुखर है। भारत आज एक प्रमुख वैश्विक शक्ति केंद्र बन चुका है। भारत की सदस्यता का दावा इन तथ्यों पर आधारित है कि यह संयुक्त राष्ट्र के संस्थापक सदस्यों में से एक है, सबसे बड़ा लोकतंत्र है, दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश है, और पांचवीं सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है।
साथ ही, भारत जलवायु परिवर्तन, सतत विकास लक्ष्यों और अन्य संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलनों से संबंधित सभी अहम मंचों में सक्रिय रूप से खुद को शामिल करता रहा है। भारत दुनिया के अधिकांश अविकसित और विकासशील देशों के हितों का भी प्रतिनिधित्व करता है। भारत एक देश है जो दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने की विचारधारा रखता है।
यूएनएससी की बैठक को संबोधित करने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- फोटो : यूट्यूब स्क्रीनग्रैब
UNSC में सुधार के लिए भारत ने हाल के वर्षों में क्या प्रयास किए हैं?
भारत समेत कई देश UNSC के साथ-साथ अन्य अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों जैसे कि विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व व्यापार संगठन को एक संरचनात्मक सुधार की मांग कर रहे हैं। इनमें से कुछ बहुपक्षीय मंचों में सुधारों के लिए अपने रुख को मजबूत करने के लिए, भारत हाल ही में बहुपक्षीय समूहों जैसे आईबीएसए (भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका) और जी4 देशों (ब्राजील, जर्मनी, भारत और जापान) के साथ गठबंधन कर रहा है।
इसके अलावा भारत दुनिया के सभी छोटे बड़े देशों से मधुर संबंध स्थापित करने के प्रयास कर रहा है। इसके लिए भारत की ओर से दुनिया भर के देशों के दौरे किए जा रहे हैं। सितंबर 2022 में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सऊदी अरब की अपनी तीन दिवसीय यात्रा के दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनने के लिए भारत के लिए एक मजबूत दावेदार बताया था। इसी महीने यूएनएससी की स्थायी सदस्यता के लिए भारत सहित चार उम्मीदवारों ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा था कि संयुक्त राष्ट्र को समकालीन दुनिया के अनुकूल होने के लिए, तत्काल और व्यापक सुधार होने चाहिए। सुरक्षा परिषद और परिषद को विकासशील दुनिया के प्रति चिंतनशील होना चाहिए।
भारत समेत कई देश UNSC के साथ-साथ अन्य अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों जैसे कि विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व व्यापार संगठन को एक संरचनात्मक सुधार की मांग कर रहे हैं। इनमें से कुछ बहुपक्षीय मंचों में सुधारों के लिए अपने रुख को मजबूत करने के लिए, भारत हाल ही में बहुपक्षीय समूहों जैसे आईबीएसए (भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका) और जी4 देशों (ब्राजील, जर्मनी, भारत और जापान) के साथ गठबंधन कर रहा है।
इसके अलावा भारत दुनिया के सभी छोटे बड़े देशों से मधुर संबंध स्थापित करने के प्रयास कर रहा है। इसके लिए भारत की ओर से दुनिया भर के देशों के दौरे किए जा रहे हैं। सितंबर 2022 में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सऊदी अरब की अपनी तीन दिवसीय यात्रा के दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनने के लिए भारत के लिए एक मजबूत दावेदार बताया था। इसी महीने यूएनएससी की स्थायी सदस्यता के लिए भारत सहित चार उम्मीदवारों ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा था कि संयुक्त राष्ट्र को समकालीन दुनिया के अनुकूल होने के लिए, तत्काल और व्यापक सुधार होने चाहिए। सुरक्षा परिषद और परिषद को विकासशील दुनिया के प्रति चिंतनशील होना चाहिए।
पाक चीन
UNSC में सुधार में भारत के समर्थन और विरोध में कौन-कौन है?
भारत के लिए समस्या यह है कि वह तब तक स्थायी निकाय का हिस्सा नहीं बन सकता जब तक कि इसके सुधारों के लिए पांच स्थायी सदस्यों के बीच आम सहमति नहीं बन जाती। इन सदस्यों के पास वीटो शक्ति है जो UNSC में अन्य देशों के प्रवेश को रोकने की शक्ति प्रदान करती है।
UNSC के पांच स्थायी सदस्यों में से चीन को छोड़कर चार अन्य देशों, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और रूस ने UNSC में स्थायी सीट के लिए भारत की उम्मीदवारी के लिए द्विपक्षीय रूप से अपना समर्थन दिया है। हालांकि, चीन ने भारत की दावेदारी में हमेशा बाधा डाली है। चीन के करीबी सहयोगी पाकिस्तान, तुर्किये, उत्तर कोरिया और इटली जैसे देश भी UNSC में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की उम्मीदवारी का विरोध करते रहे हैं।
भारत के लिए समस्या यह है कि वह तब तक स्थायी निकाय का हिस्सा नहीं बन सकता जब तक कि इसके सुधारों के लिए पांच स्थायी सदस्यों के बीच आम सहमति नहीं बन जाती। इन सदस्यों के पास वीटो शक्ति है जो UNSC में अन्य देशों के प्रवेश को रोकने की शक्ति प्रदान करती है।
UNSC के पांच स्थायी सदस्यों में से चीन को छोड़कर चार अन्य देशों, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और रूस ने UNSC में स्थायी सीट के लिए भारत की उम्मीदवारी के लिए द्विपक्षीय रूप से अपना समर्थन दिया है। हालांकि, चीन ने भारत की दावेदारी में हमेशा बाधा डाली है। चीन के करीबी सहयोगी पाकिस्तान, तुर्किये, उत्तर कोरिया और इटली जैसे देश भी UNSC में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की उम्मीदवारी का विरोध करते रहे हैं।
यूएनएससी
- फोटो : Twitter
UNSC का स्थाई सदस्य बनने के लिए प्रक्रिया क्या है?
UNSC का स्थाई सदस्य बनने की मौजूदा प्रक्रिया काफी जटिल है। इसके लिए सबसे पहले संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन की आवश्यकता होती है। चार्टर में संशोधन तभी हो सकता है जब 1. महासभा के सदस्यों के कम से कम 2/3 सदस्यों (129 देश) के मत द्वारा प्रस्ताव पारित किया जाए। और 2. सभी स्थायी सदस्यों सहित कम से कम 2/3 सदस्यों द्वारा अनुसमर्थन मिले। इसलिए, सुधार के लिए सदस्य देशों के बीच सहयोग आवश्यक है। सुरक्षा परिषद के सभी स्थायी सदस्य अपने स्वयं के प्रभाव को कम करने वाले कदम के समर्थन से अक्सर परहेज करते रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों के बीच व्यापक सहमति है कि सुरक्षा परिषद का ढांचा पुराना है लिहाजा इसमें सुधार होने चाहिए। इसके अलावा कुछ प्रस्ताव अतिरिक्त स्थायी सदस्यों की मांग करते हैं। 2021 की शुरुआत में, संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष वोल्कन बोजकिर ने कहा था कि सुरक्षा परिषद में सुधार एक महत्वपूर्ण उद्देश्य होना चाहिए। बोजकिर ने कहा था, "अगर परिषद को और अधिक प्रतिनिधि, प्रभावी, कुशल, जवाबदेह और पारदर्शी बनाने के लिए सुधार किया गया तो परिषद के फैसलों के कार्यान्वयन, और इसकी वैधता को बढ़ाया जा सकता है।"
UNSC का स्थाई सदस्य बनने की मौजूदा प्रक्रिया काफी जटिल है। इसके लिए सबसे पहले संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन की आवश्यकता होती है। चार्टर में संशोधन तभी हो सकता है जब 1. महासभा के सदस्यों के कम से कम 2/3 सदस्यों (129 देश) के मत द्वारा प्रस्ताव पारित किया जाए। और 2. सभी स्थायी सदस्यों सहित कम से कम 2/3 सदस्यों द्वारा अनुसमर्थन मिले। इसलिए, सुधार के लिए सदस्य देशों के बीच सहयोग आवश्यक है। सुरक्षा परिषद के सभी स्थायी सदस्य अपने स्वयं के प्रभाव को कम करने वाले कदम के समर्थन से अक्सर परहेज करते रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों के बीच व्यापक सहमति है कि सुरक्षा परिषद का ढांचा पुराना है लिहाजा इसमें सुधार होने चाहिए। इसके अलावा कुछ प्रस्ताव अतिरिक्त स्थायी सदस्यों की मांग करते हैं। 2021 की शुरुआत में, संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष वोल्कन बोजकिर ने कहा था कि सुरक्षा परिषद में सुधार एक महत्वपूर्ण उद्देश्य होना चाहिए। बोजकिर ने कहा था, "अगर परिषद को और अधिक प्रतिनिधि, प्रभावी, कुशल, जवाबदेह और पारदर्शी बनाने के लिए सुधार किया गया तो परिषद के फैसलों के कार्यान्वयन, और इसकी वैधता को बढ़ाया जा सकता है।"
संयुक्त राष्ट्र
- फोटो : Getty
क्या संयुक्त राष्ट्र में इसे लेकर कोई प्रस्ताव लंबित है?
- दिसंबर 1993, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सुरक्षा परिषद की सदस्यता में वृद्धि और सुरक्षा परिषद से संबंधित अन्य मामलों के प्रश्न के सभी पहलुओं पर विचार करने के लिए ओपन-एंडेड वर्किंग ग्रुप की स्थापना की।
- सितम्बर 2003, तत्कालीन महासचिव कोफी अन्नान ने शांति और सुरक्षा के लिए भविष्य के खतरों का विश्लेषण करने और प्रभावी सामूहिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के उपायों की सिफारिश करने के लिए एक उच्च स्तरीय पैनल की स्थापना की।
- सितंबर 2004 में जापान, ब्राजील, जर्मनी और भारत ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के बाद जी4 समूह (ब्राजील, भारत, जापान और जर्मनी) ने स्थायी सदस्यता प्राप्त करने के उद्देश्य से छह स्थायी सदस्यों और चार गैर-स्थायी सदस्यों को जोड़कर UNSC सदस्यता को 15 से बढ़ाकर 25 करने का प्रस्ताव दिया था। G-4 ने कम से कम 15 वर्षों के लिए वीटो के अपने अधिकार को त्यागने के लिए भी सहमत व्यक्त की थी।
- मार्च 2005, "खतरों, चुनौतियों और परिवर्तन पर उच्च स्तरीय पैनल" की रिपोर्ट के आधार पर, तत्कालीन महासचिव कोफी अन्नान ने तर्क दिया था कि सुरक्षा परिषद को आज की दुनिया में शक्ति की वास्तविकताओं का व्यापक रूप से प्रतिनिधि होना चाहिए और दो सुधार मॉडल प्रस्तावित किए।
- जुलाई 2005, G4 ने सुरक्षा परिषद सुधार पर एक मसौदा प्रस्ताव पेश किया और अन्य सदस्य देशों के साथ सहयोग करने का रास्ता बताने की मांग की। हालांकि, एयू और यूएफसी ने दो अन्य मसौदों के साथ इसमें मतदान नहीं कराया।
- महासभा में शुरू हुई अंतर-सरकारी वार्ताओं और अधिकांश सदस्य देशों ने 2009 में बातचीत के दौर के माध्यम से सुधार की आवश्यकता व्यक्त की।