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जितेंद्र सिंह बोले: अंतरिक्ष में महिला रोबोट 'व्योममित्र' भेजी जाएगी, अगले साल लॉन्च होगा ISRO का गगनयान मिशन

Tue, 21 Feb 2023 10:32 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Tue, 21 Feb 2023 10:32 PM IST
सार

जितेंद्र सिंह ने दावा किया कि गगनयान मिशन आत्मनिर्भर भारत का सबसे अच्छा उदाहरण होगा। यह भारत की अंतरिक्ष यात्रा के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में 10,000 करोड़ रुपये की लागत से गगनयान मिशन की घोषणा की थी।

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Union minister Jitendra Singh says ISRO to launch 2 missions under Gaganyaan programme in 2023
गगनयान मिशन। - फोटो : Istock

विस्तार

इसरो इस साल के आखिर में अंतरिक्ष के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाएगा। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को बड़ी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि इसरो अपने पहले ह्यूमन स्पेस-फ्लाइट मिशन 'गगनयान' के तहत साल के आखिर में दो प्रारंभिक मिशन लॉन्च करेगा। इसके अगले चरण में 2024 में देश का पहला मानव अंतरिक्ष-उड़ान मिशन लॉन्च किया जाएगा। जितेंद्र सिंह ने दावा किया कि गगनयान मिशन आत्मनिर्भर भारत का सबसे अच्छा उदाहरण होगा। यह भारत की अंतरिक्ष यात्रा के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में 10,000 करोड़ रुपये की लागत से गगनयान मिशन की घोषणा की थी।

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साल के आखिर में लॉन्च होंगे दो मिशन 
केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि इस साल के आखिर में गगनयान कार्यक्रम के तहत दो शुरुआती मिशन लॉन्च किए जाएंगे। पहला मिशन पूरी तरह से मानव रहित होगा, जबकि दूसरे में 'व्योममित्र' नाम की एक महिला रोबोट भेजी जाएगी। ये दोनों मिशन प्रक्रिया को पूरा करेंगे। उन्होंने कहा कि इन मिशनों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गगनयान रॉकेट उसी रास्ते से सुरक्षित लौट आए, जिस रास्ते से उसने उड़ान भरी थी।  इस मिशन के अगले हिस्से के रूप में 2024 में देश का पहला मानव अंतरिक्ष-उड़ान मिशन लॉन्च किया जाएगा। जिससे भारतीय मूल का व्यक्ति अंतरिक्ष जाएगा। इस दौरान उन्होंने राकेश शर्मा का जिक्र भी किया, जो कि पहले ही अंतरिक्ष में जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि राकेश शर्मा जिस मिशन के तहत अंतरिक्ष गए थे, वह मिशन सोवियत रूस ने लॉन्च किया था। जबकि गगनयान एक भारतीय मिशन है।
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बनाई गई थी ये योजना
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि इन मिशनों को भारतीय स्वतंत्रता के 75 वें वर्ष में शुरू करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इन कार्यक्रमों में दो से तीन सालों की देरी हो गई। उन्होंने बताया कि महामारी के कारण रूस में हमारे अंतरिक्ष यात्रियों के चल रहे प्रशिक्षण को बीच में ही रोक दिया गया था। अब कोरोना की स्थिति कम होने के बाद उन्हें अपना प्रशिक्षण पूरा करने के लिए वापस भेज दिया गया है।
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चंद्रयान -3 और सूर्य के अध्ययन के लिए भी काम कर रहा इसरो 
इस दौरान केंद्रीय मंत्री  ने इसरो के मिशन चंद्रयान-3 और आदित्य एल1 के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इसरो ने अगले साल जून में चंद्रयान -3 मिशन को चंद्रमा पर लॉन्च करने की योजना बनाई है। इसके साथ ही सूर्य के अध्ययन के लिए मिशन आदित्य एल1 की तैयारी भी सुचारू रूप से चल रही है। उन्होंने कहा कि यह अपनी तरह का पहला मिशन होगा जिसमें सूर्य के वातावरण, पर्यावरण और उससे जुड़े सभी पहलुओं पर शोध और अध्ययन किया जाएगा।  

भारत की अंतरिक्ष यात्रा देर से शुरू हुई
इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा देर से शुरू हुई। जब देश ने इस सपने को देखना शुरू किया उस समय संयुक्त राज्य अमेरिका और तत्कालीन सोवियत संघ अपने नागरिकों को चंद्रमा पर उतारने की तैयारी कर रहे थे। हालांकि कुछ साल पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र को खोलने का फैसला किया। जिसके बाद अंतरिक्ष क्षेत्र में देश का अनुसंधान बढ़ा और आज भारत अमेरिका और रूस के समकक्ष खड़ा है।  


अब अंतरिक्ष में बढ़ रहे भारत के कदम
जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज इस क्षेत्र में 130 से अधिक स्टार्टअप हैं। इतना ही नहीं निजी क्षेत्र रॉकेट लॉन्च कर रहे है, जिससे अंतरिक्ष क्षेत्र को गति और वैज्ञानिकों को प्रोत्साहन और प्रतिष्ठा मिल रही है। उन्होंने कहा कि आज यूरोप और अमेरिका के उपग्रह भारत के लॉन्चिंग पैड्स से अंतरिक्ष में भेजे जा रहे हैं। इसरो ने अकेले अमेरिकी उपग्रहों को लॉन्च करके 5.6 करोड़ डॉलर से अधिक की कमाई की है।

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