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Manipur: उत्तर-पूर्व में उग्रवाद पर बड़े वार की तैयारी में गृह मंत्रालय! क्या BSF तोड़ेगी घुसपैठियों की कमर?

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 10 Jul 2023 07:18 PM IST
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सार
पांच साल पहले भारत और म्यांमार के बीच इंडो-म्यांमार फ्रेंडशिप ब्रिज को खोला गया था। यह ब्रिज मणिपुर की सीमा से सटे 'मोरे' में स्थित है। इस सीमा के खुलने के बाद म्यांमार जाने वाले किसी भी भारतीय को विशेष परमिट की आवश्यकता नहीं होती। म्यांमार बॉर्डर पर यह 16 किलोमीटर का खुला क्षेत्र है। इसका भी कुछ हद तक बॉर्डर गार्ड करने पर असर पड़ता है...
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Union Home Ministry seriously considering the proposal to hand over the security of Myanmar border to BSF
Manipur: Myanmar Border - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

केंद्रीय गृह मंत्रालय, मणिपुर सहित उत्तर पूर्व में फैले 'उग्रवाद' की जड़ें काटने के मूड में है। मणिपुर से लगता म्यांमार बॉर्डर, जिसे उग्रवाद, हथियारों एवं नशीले पदार्थों की तस्करी और घुसपैठ का द्वार कहा जाता है, अब उस पर पूरी तरह से लगाम लगाने की तैयारी हो रही है। विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि म्यांमार बॉर्डर की सुरक्षा की जिम्मेदारी 'असम राइफल' के पास है। असम राइफल, अपने सैनिकों की भर्ती खुद करती है, लेकिन इसकी कमान और संचालन, भारतीय सेना के अधिकारियों द्वारा किया जाता है। यह सशस्त्र बल, आंतरिक सुरक्षा के अलावा बॉर्डर की चौकसी का काम भी देखता है। असम राइफल की काम की प्रकृति, कंपनी ऑपरेटिंग बेस पर आधारित है। केंद्रीय गृह मंत्रालय इस प्रपोजल पर गंभीरता से आगे बढ़ रहा है कि 1,643 किमी लंबे म्यांमार बॉर्डर की सुरक्षा, बीएसएफ को सौंप दी जाए। इसके लिए बीएसएफ में 27 नई बटालियन, (लगभग 28-30 हजार जवान) सृजित की जाएं।

यह भी पढ़ें: Manipur: जरूरी वस्तुओं-दवाओं की कमी से पहाड़ी इलाके के लोग परेशान, मैतेई लोगों ने नाकाबंदी हटाने से किया इनकार

म्यांमार के कई उग्रवादी समूहों को चीन से मदद

पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगती भारतीय सीमा की सुरक्षा करने वाले 'सीमा सुरक्षा बल' को देश की 'पहली रक्षा पंक्ति' कहा जाता है। गत तीन मई से मणिपुर में हिंसा की वारदात होती रही हैं। करीब सत्तर हजार लोगों को अपना घर छोड़कर सुरक्षा कैंपों में रहना पड़ा है। पुलिस थानों से करीब पांच हजार हथियार लूटे गए। उपद्रवियों ने सुरक्षा बलों का रास्ता रोक दिया। मणिपुर से लगते म्यांमार बॉर्डर पर हो रही देश विरोधी गतिविधियों को भी हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। म्यांमार के कई उग्रवादी समूहों को चीन से मदद मिलती है। इसका इस्तेमाल वे मणिपुर सहित उत्तर-पूर्व के दूसरे राज्यों में गैर कानूनी गतिविधियों के लिए करते हैं। म्यांमार बॉर्डर की सुरक्षा, अभी तक 'असम राइफल' के हाथ में है। केंद्रीय गृह मंत्रालय में पिछले एक दशक के दौरान कई बार इस विषय पर चर्चा हुई है कि म्यांमार बॉर्डर की सुरक्षा करने वाले बल की जिम्मेदारी बदली जाए।   

ऐसे में सुरक्षा चक्र टूटने की गुंजाइश

पांच साल पहले भारत और म्यांमार के बीच इंडो-म्यांमार फ्रेंडशिप ब्रिज को खोला गया था। यह ब्रिज मणिपुर की सीमा से सटे 'मोरे' में स्थित है। इस सीमा के खुलने के बाद म्यांमार जाने वाले किसी भी भारतीय को विशेष परमिट की आवश्यकता नहीं होती। म्यांमार बॉर्डर पर यह 16 किलोमीटर का खुला क्षेत्र है। इसका भी कुछ हद तक बॉर्डर गार्ड करने पर असर पड़ता है। म्यांमार बॉर्डर, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश से सटा है। वहां पर आतंकवादी संगठनों की गतिविधियां चलती रहती हैं। यह नशे का भी एक बड़ा कॉरिडोर है। 2015 में भारतीय सेना ने म्यांमार सीमा में दो किलोमीटर अंदर घुसकर उग्रवादियों के दो कैंप नष्ट किए थे। इसके बाद भी वहां आतंकी गतिविधियां जारी रहती हैं। बीएसएफ के पूर्व एडीजी एसके सूद बताते हैं, असम राइफल के पास दो तरह की ड्यूटी है। वह आंतरिक सुरक्षा के अलावा बॉर्डर की चौकसी भी करती है। बीएसएफ, विशेष रूप से एक बॉर्डर गार्डिंग फोर्स है। इसकी ड्यूटी का आधार बीओपी यानी बॉर्डर आउट पोस्ट है। असम राइफल की ड्यूटी, कंपनी ऑपरेटिंग बेस पर आधारित है। इसके तहत नियमित तौर पर बॉर्डर की चौकसी नहीं हो पाती। कभी एक दो दिन तो कभी इससे ज्यादा अंतराल पर बल की उपस्थिति नजर आती है। ऐसे में सुरक्षा चक्र टूटने की संभावना बनी रहती है।

बीएसएफ तोड़ सकती है घुसपैठियों की कमर

एसके सूद के मुताबिक, बीएसएफ म्यांमार बॉर्डर पर घुसपैठियों की कमर तोड़ सकती है। अगर इस बॉर्डर को बीएसएफ के नियंत्रण में दिया जाता है, तो नतीजे भी उत्साहवर्धक मिलेंगे। इस तरह के आरोप भी लगते रहे हैं कि मणिपुर के पहाड़ी क्षेत्र में जिस रफ्तार से जनसंख्या बढ़ी है, वह राज्य की औसत से कहीं अधिक है। ये बात कथित तौर से घुसपैठ की तरफ इशारा करती है। बीएसएफ को जब यहां की चौकसी की जिम्मेदारी मिलेगी, तो घुसपैठ पर काफी हद तक रोक लग जाएगी। पाकिस्तान और बांग्लादेश की सीमा पर बीएसएफ ने इस बात को साबित कर दिखाया है। बीएसएफ को 27 बटालियन एक साथ नहीं मिल सकती। मौजूदा समय में एक बटालियन में सात कंपनी हैं। उन्हें छह कंपनी में तब्दील करना चाहिए। इससे एक अतिरिक्त कंपनी मिल जाएगी। ऑपरेशन कार्य और पर्यवेक्षण भी अच्छा होगा। बीएसएफ में साढ़े तीन किलोमीटर के अंतराल पर 'बीओपी' स्थापित करने का नियम है। हालांकि सभी जगह पर यह नियम एक जैसा नहीं है। पहाड़, मैदानी भाग, नदी नाले या रेगिस्तान में 'बीओपी' का अंतराल कम या ज्यादा हो सकता है। म्यांमार बॉर्डर पर जब बीएसएफ तैनात होगी, तो यही नियम लागू होगा। ऐसे में घुसपैठ की कोई संभावना नहीं बचेगी। म्यांमार बॉर्डर 24 घंटे बीएसएफ की नजर में रहेगा।

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