Manipur: जरूरी वस्तुओं-दवाओं की कमी से पहाड़ी इलाके के लोग परेशान, मैतेई लोगों ने नाकाबंदी हटाने से किया इनकार
राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) दो इंफाल घाटी में रह रहे लोगों के लिए जीवनरेखा की तरह काम करता है। चुराचांदपुर में कुकी समुदाय के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं। चुराचांदपुर में करीब चार लाख लोग रहते हैं और इसके अलावा 10,000 विस्थापित लोग जिले में बनाए गए राहत शिविरों में रह रहे हैं।
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मणिपुर में जारी हिंसा के कारण आवश्यक वस्तुओं और दवाओं की कमी ने पूर्वोत्तर राज्य के निवासियों के बीच हताशा और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है। केंद्र के आह्वान पर कुकी समुदाय ने राष्ट्रीय राजमार्ग दो से नाकाबंदी हटा दी है, लेकिन मैतेई समुदाय ने नाकाबंदी नहीं हटाई है, जिसके कारण राज्य के सबसे बड़े चुराचांदपुर जिले में जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति नहीं हो पा रही है।
जरूरतमंद लोगों को नहीं मिल रहे आवश्यक चिकित्सकीय उपचार
राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) दो इंफाल घाटी में रह रहे लोगों के लिए जीवनरेखा की तरह काम करता है। चुराचांदपुर में कुकी समुदाय के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं। चुराचांदपुर में करीब चार लाख लोग रहते हैं और इसके अलावा 10,000 विस्थापित लोग जिले में बनाए गए राहत शिविरों में रह रहे हैं। चिकित्सकों, खासकर सर्जन की अत्यधिक कमी हो गई है, जिसके गंभीर परिणाम हो रहे हैं, क्योंकि डायलिसिस, कैंसर के लिए दवाएं और एड्स की दवाइयों समेत आवश्यक चिकित्सकीय उपचार जरूरतमंद लोगों को नहीं मिल पा रहे।
चुराचांदपुर जिला अस्पताल के चिकित्सकीय अधीक्षक डॉ. तिंगलोनलेई ने कहा, हमें इस स्थिति में चिकित्सकों की वास्तव में आवश्यकता है। हमें अब भी और अधिक वरिष्ठ चिकित्सकों, वरिष्ठ सर्जन और कार्डियोथोरेसिक सर्जन की जरूरत है और यदि सरकार हमें गोलियां लगने और घायल होने से अत्यधिक खून बहने के जटिल मामलों से निपटने के लिए एक हर्ट सर्जन, एक हृदय रोग विशेषज्ञ उपलब्ध करा सके तो हम वाकई बहुत आभारी होंगे।
गृह मंत्री अमित शाह के मई में हिंसा प्रभावित राज्य का दौरा करने के बाद केंद्र ने चिकित्सकों के छह दल मणिपुर भेजे थे। डॉ. तिंगलोनलेई ने कहा, हम पिछले महीने एम्स (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान), गुवाहाटी से दो चिकित्सकों को चुराचांदपुर भेजे जाने के लिए आभारी हैं, लेकिन हमें गंभीर बीमारियों के लिए विशेषज्ञों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में दवाओं और सर्जिकल वस्तुओं की भी जरूरत है।
इस क्षेत्र में रोजाना हो रही गोलीबारी की छिटपुट घटनाएं
चुराचांदपुर-बिष्णुपुर क्षेत्र में रोजाना होने वाली गोलीबारी की छिटपुट घटनाओं से स्थिति और भी जटिल हो गई है। डॉ. तिंगलोनलेई ने बताया कि गोलियों से लगी चोटों का पता लगाने में मदद करने वाली एकमात्र मशीन इस समय खराब है, जिससे पहले से ही गंभीर हालात और खराब हो गए हैं।
इन जिलों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति खराब
तेंगनौपाल और चंदेल जिलों में भी स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति खराब है क्योंकि घाटी क्षेत्रों में एशियाई राजमार्ग पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित हुई हैं। मोरे कस्बे में महिला मानवाधिकार समूह की अध्यक्ष चोंग हाओकिप ने कहा, हमारे अस्पताल में दवाएं खत्म हो गई हैं। विशेषज्ञों की बात तो छोड़िए, वायरल बुखार के उपचार के लिए भी चिकित्सक उपलब्ध नहीं हैं। हर चीज की कीमत दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है। हम अपने बच्चों की खातिर अधिक कीमत चुकाने को भी तैयार हैं, लेकिन कई चीजें बाजार में उपलब्ध नहीं हैं।
सामानों की तेजी से बढ़ी कीमतों से जूझ रहे लोग
मैतेई समुदाय की बहुलता वाले गांव क्वाथा के निवासियों ने भी इसी तरह की चिंताएं व्यक्त कीं। छह कुकी बहुल गांवों और तीन नगा बहुल गांवों के बीच बसे क्वाथा के लोग शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। गांव की एक गृहिणी टी रत्ना ने कहा, हम कुकी समुदाय के लोगों से घिरे हैं। उन्होंने अब तक हम पर हमला नहीं किया है। हम भोजन और दवाओं की कमी से जूझ रहे हैं। हम शांति चाहते हैं। अब तक असम राइफल्स घरेलू वस्तुओं और दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है। स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव के अलावा स्थानीय आबादी चीजों की तेजी से बढ़ी कीमतों से भी जूझ रही है।
सेना के वाहनों और वस्तुओं की आपूर्ति के आवागमन पर नजर रख रहे महिला नागरिक समाज समूह ‘मीरा पैबी’ ने आरोप लगाया कि असम राइफल्स निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रही। दूसरी ओर, असम राइफल्स ने कहा कि उसने दोनों पक्षों के लोगों की जान बचाई है। आधिकारिक रिकॉर्ड से पता चलता है कि हिंसा के केंद्र चुराचांदपुर से 9,000 से अधिक मैतेई लोगों को सुरक्षित बचाया गया, जबकि मोरेह से 3,500 मैतेई को बचाया गया। यदि चुराचांदपुर और टेंग्नौपाल जिलों की सड़कें अवरुद्ध रहती हैं तो कुकी समूहों को नाकाबंदी वापस लेने के लिए मजबूर करने के लिए बैक-चैनल चर्चा की स्थिरता सवालों के घेरे में होगी।
वामपंथी नेताओं ने का दावा, बीरेन सिंह सरकार का बने रहना मणिपुर में शांति बहाल करने में बड़ी बाधा
हिंसा प्रभावित पूर्वोत्तर राज्य की तीन दिवसीय यात्रा के बाद सीपीआई (एम) और सीपीआई सांसदों के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने दावा किया कि बीरेन सिंह सरकार का बने रहना मणिपुर में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने में एक बड़ी बाधा है। एक बयान में, पार्टियों ने कहा कि राज्य को किनारे से लाने के लिए एक सार्थक अभ्यास के लिए नागरिक समाज के साथ-साथ सभी समुदायों और वर्गों को एक साथ लाने की जरूरत है।
सीपीआई (एम) के बिकाश रंजन भट्टाचार्य (Bikash Ranjan Bhattacharya) और जॉन ब्रिटास (John Brittas) और सीपीआई के बिनॉय विश्वम (Binoy Viswam), के सुब्बारायण और पी संदोश कुमार के प्रतिनिधिमंडल ने छह जुलाई से तीन दिनों के लिए राज्य में शरणार्थी शिविरों का दौरा किया। मैदानों और पहाड़ी इलाकों में शरणार्थियों के साथ बातचीत करने वाले प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इस सच्चाई को नहीं भूल सकता कि उनकी बड़ी परेशानियों में आश्चर्यजनक रूप से एक समानता थी। 60,000 से अधिक लोग उजड़ गए हैं, उनका जीवन और आजीविका तबाह हो गई है। वे अपने घरों को आग लगा दिए जाने और परिवार के सदस्यों की गोली मारकर हत्या किए जाने के सदमे से परेशान हैं।
प्रतिनिधिमंडल के एक बयान के अनुसार, उन्होंने नागरिक समाज के विभिन्न वर्गों के साथ खुलकर चर्चा की। उनका मुख्य विचार यह था कि मुख्यमंत्री द्वारा वैधता और विश्वसनीयता खोने के साथ राज्य प्रशासन पूरी तरह से ध्वस्त हो गया। बयान में कहा गया है कि संघर्षग्रस्त मणिपुर का दौरा करने के बाद सीपीआई (एम) और सीपीआई के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल का विचार है कि बीरेन सिंह सरकार का बने रहना राज्य में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने में बड़ी बाधा है।
बयान में दावा किया गया कि राज्य में लोग प्रधानमंत्री की गहरी चुप्पी से दुखी और आहत हैं। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल अनुसुइया उइके से मुलाकात की थी और उनसे स्थिति को शांत करने के लिए हर संभव कदम उठाने का आग्रह किया था। बयान में कहा गया है, राज्यपाल ने कहा कि वह घटनाओं से व्याकुल हैं और विश्वास दिलाया कि उन्हें अपने जीवन में कभी ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा। उन्होंने कहा कि वह तत्परतापूर्वक राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और गृह मंत्री को विस्तृत रिपोर्ट सौंप रही हैं।
बयान में यह भी कहा गया है कि प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि हालांकि विभिन्न बलों के 60,000 सशस्त्र कर्मी जातीय संघर्षग्रस्त राज्य में तैनात हैं, लेकिन वे एक कार्यात्मक नागरिक प्रशासन की अनुपस्थिति में प्रभावी नहीं हैं। प्रतिनिधिमंडल ने महसूस किया कि सभी आरोपों, दावों और प्रतिदावों को स्थगित रखा जाना चाहिए और एकमात्र उद्देश्य मणिपुर में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करना होना चाहिए। बयान में कहा गया, केंद्र और राज्य प्रशासन को सभी वर्गों को एकजुट करने, पुनर्वास के लिए तत्काल उपायों की घोषणा करने और लोगों की पीड़ा को कम करने के लिए सभी प्रयास करने चाहिए।