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Union Home Ministry: एससी-एसटी के खिलाफ अपराध में बिना विलंब दर्ज हो एफआईआर, दो महीने से लंबी जांच चले तो बारीकी से निगरानी भी जरूरी

Fri, 01 Jul 2022 03:08 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Fri, 01 Jul 2022 03:08 AM IST
सार

गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे संदेश में कहा कि जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) को समय पर उपस्थिति और अभियोजन पक्ष के सभी गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।

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Union Home Ministry said to States Governments FIR against SC ST Crime should be registered without delay
केंद्रीय गृह मंत्रालय - फोटो : ANI

विस्तार

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों से स्पष्ट कहा कि एससी और एसटी के खिलाफ अपराधों के मामलों में एफआईआर दर्ज करने में कोई देरी नहीं होनी चाहिए। ऐसे मामलों में जहां जांच दो महीने से लंबी चले बारीकी से निगरानी होनी चाहिए।

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गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे संदेश में कहा कि जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) को समय पर उपस्थिति और अभियोजन पक्ष के सभी गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। इसमें पुलिस अधिकारियों व आधिकारिक गवाहों को भी सुरक्षा देनी होगी ताकि अनुसूचित जाति व जनजाति के मामलों की सुनवाई तेजी से हो सके। इन मामलों में एफआईआर दर्ज होने से लेकर संबंधित कोर्ट की ओर से फैसला सुनाए जाने तक उचित स्तर पर निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
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गृह मंत्रालय ने कहा, जांच अगर 60 दिनों से अधिक चले तो जिला व राज्य स्तर पर इसकी निगरानी की जाए। जहां आवश्यक हो वहां जांच में तेजी लाने के लिए विशेष डीएसपी को जिम्मेदारी सौंपी जाए। राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति समेत विभिन्न स्रोतों से मिलने वाले अत्याचार की शिकायतों की रिपोर्ट का नियमित फॉलोअप लेना चाहिए।
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मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि एससी-एसटी पर अत्याचार वाले स्थानों को चिह्नित किया जाए और वहां लोगों को जानमाल के नुकसान को बचाने के लिए कदम उठाए जाएं। ऐसे संवेदनशील इलाकों में पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किए जाएं।

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