Nuh Violence: जी20 में 'नूंह' को नहीं बनने देंगे 'दिल्ली', एक्शन में है गृह मंत्रालय और खुफिया एजेंसी
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विस्तार
अगले माह नौ और 10 तारीख को दिल्ली में होने जा रही 'जी20' देशों के राष्ट्राध्यक्षों / सरकार के प्रमुखों की बैठक को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय और खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि 2020 के दौरान जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत आए थे तो दिल्ली में दंगों की साजिश रची गई थी। इस बार कुछ वैसी ही साजिश हरियाणा के 'नूंह' में रची जा रही है। इसका मकसद, विदेशी मेहमानों के सामने देश की छवि खराब करना है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय और इंटेलिजेंस एजेंसियां, इस बाबत लगातार अपने कंट्रोल सेंटर से अपडेट ले रही हैं। हरियाणा सरकार में खुफिया महकमे के प्रमुख आलोक मित्तल 'नूंह' की स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल के संपर्क में हैं। केंद्रीय एजेंसियां अपने इनपुट के आधार पर 'नूंह' को देख रही हैं। प्रदेश के नवनियुक्त डीजीपी शत्रुजीत कपूर की पसंद के आईपीएस अफसर नूंह में तैनात किए गए हैं।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के समक्ष पेश की गई रिपोर्ट ...
बता दें कि पिछले दिनों नूंह में जलाभिषेक यात्रा के दौरान दंगा हो गया था। दोनों समुदायों ने इसके लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया था। कई दिन बाद जब नूंह में हालात सामान्य हुए तो भाजपा से जुड़े संगठनों ने दोबारा से यात्रा निकालने की बात कही। इस मामले में हरियाणा सरकार को विपक्षी दलों की आलोचना का सामना करना पड़ा। सरकार पर यह दबाव भी रहा है कि मौजूदा परिस्थितियों में वहां पर यात्रा निकालने की इजाजत न दी जाए। इस मामले में खुफिया एजेंसियों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के समक्ष एक रिपोर्ट पेश की थी। इसमें भी यात्रा को लेकर प्रदेश सरकार और प्रशासन को सचेत किया गया था। जी20 सम्मेलन के दौरान अगर नूंह में दोबारा से कानून व्यवस्था बिगड़ती है तो उसका देश की छवि पर पड़ेगा।
इस बाबत सीएम मनोहर लाल खट्टर को भी अवगत करा दिया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएम खट्टर और डीजीपी शत्रुजीत कपूर ने लोगों से कहा कि किसी भी संगठन को 28 अगस्त को नूंह में ब्रजमंडल यात्रा निकालने की इजाजत नहीं दी गई है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की है कि वे मंदिरों में पूजा-अर्चना कर सकते हैं। नूंह की तरफ यात्रा आदि निकालने से गुरेज करें। वहीं, जिला प्रशासन ने यात्रा से एक दिन पहले ही पूरे इलाके में धारा 144 लगा दी थी। शिक्षण संस्थान बंद कर दिए गए। इतना ही नहीं, नूंह में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय की दो टूक, हिंसा बर्दास्त नहीं होगी ...
सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस मामले में हरियाणा सरकार को दो टूक शब्दों में कह दिया था कि नूंह में किसी भी तरह की हिंसा बर्दास्त नहीं होगी। केंद्रीय एजेंसी और प्रदेश का सीआईडी महकमा नूंह के हर क्षेत्र में सक्रिय हो गया। मुख्यमंत्री और डीजीपी की अपील के बावजूद जब विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि नूंह में 28 अगस्त को यात्रा की शुरुआत होगी। इसमें यात्रा की इजाजत लेने जैसा कुछ नहीं है। सावन का आखिरी सोमवार है, इसलिए श्रद्धालु मंदिर में पहुंचकर जलाभिषेक करेंगे। इसके बाद नूंह की तरफ जाने वाले हर मार्ग को सील कर दिया गया। बाद में सरकार की तरफ से कहा गया कि वीएचपी प्रमुख सहित कुछ लोगों को मंदिर में जलाभिषेक की इजाजत दी गई है। वे शांतिपूर्वक तरीके से जलाभिषेक कर सकते हैं। गृह मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि जी20 शिखर सम्मेलन के मद्देनजर नूंह में सुरक्षा व्यवस्था का पुख्ता इंतजाम किया गया है। एडीजीपी ममता सिंह के मुताबिक, भारी सुरक्षा के बीच कुछ लोगों को जलाभिषेक की इजाजत दी गई है। नलहड़ मंदिर तक पुलिस उनके साथ जाएगी और जलाभिषेक के बाद उन्हें वापस लेकर आएगी। पुलिस प्रशासन को दोनों समुदायों के लोगों का सहयोग मिल रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा के दौरान हुआ दंगा ...
अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 2020 में 24-25 फरवरी को भारत यात्रा पर आए थे। उस दौरान दिल्ली में तीन दिन तक हुए दंगों में 53 लोगों की मौत हो गई थी। दिल्ली पुलिस ने अपनी एफआईआर में कहा था कि दंगों के लिए साजिश रची गई। इस मामले में उमर खालिद सहित कई लोगों को आरोपी बनाया गया। पीएफआई के मोहम्मद दानिश पर आरोप था कि उन्होंने दंगा कराने के मकसद से लोगों की भीड़ जुटाई थी। बाद में इस केस की जांच, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को दे दी गई।
आरोप था कि वैश्विक स्तर पर भारत की छवि खराब करने के लिए दंगा कराया गया। दंगों के माध्यम से आरोपी यह संदेश देना चाहते थे कि भारत में अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न किया जा रहा है। लोगों को एकत्रित करने के लिए भड़काऊ भाषण दिए गए थे। लोगों से कहा गया कि वे डोनाल्ड ट्रंप की 24-25 फरवरी की भारत यात्रा के दौरान सड़कों पर एकत्रित होकर प्रदर्शन करें। मार्च 2020 में दिल्ली दंगों पर लोकसभा में जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 17 फरवरी को दिए गए एक भाषण का जिक्र किया था। उस भाषण में ऐसी बात कही गई थी कि भारत में एक समुदाय के साथ क्या हो रहा है। लोगों से कहा गया कि वे देश के शासकों के खिलाफ बाहर निकलें। उस भाषण के एक सप्ताह बाद ही दिल्ली में दंगा शुरू हो गया था।