अलंकरण दिवस: अमित शाह ने अर्द्धसैनिक बलों को किया नमन, बोले- ड्रोन-सुरंगों से हो रही साजिश, लेकिन जवान तैयार
बीएसएफ के 18वें अलंकरण समारोह का आयोजन शनिवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित किया गया। इसमें केंद्रीय मंत्री गृहमंत्री ने देश के लिए बलिदान होने वाले जवानों को याद किया और उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की।
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गृह मंत्री अमित शाह शनिवार को बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के 18वें अलंकरण समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने बिना नाम लिए पाकिस्तान और चीन को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जिस देश की सीमाएं सुरक्षित हों, वह देश सुरक्षित है। आपने देखा ड्रोन भेजे जा रहे। सुरंगे बनवाई जा रही हैं, लेकिन हम इन चुनौतियों के लिए तैयार हैं। देश के खिलाफ की जा रही हर साजिश का करारा जवाब दिया जाएगा।
अमित शाह ने कहा कि पूरा देश जानता है कि आप सजग बनकर देश की सीमाओं की सुरक्षा कर रहे हैं, इसी कारण आज देश लोकतंत्र के अपनाए हुए विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। मैं उन लोगों को नमन करता हूं जिन्होंने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है। उन बलिदानियों को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
हमें अपने जवानों पर भरोसा- अमित शाह
अमित शाह ने कहा कि बीएसएफ और सीमाओं की रक्षा करने वाले हमारे जवानों ने आज भारत का नाम रोशन किया है। अर्धसैनिक बलों के दम पर भारत विश्व में अपनी छाप छोड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा है। हमारे सामने कई चुनौतियां हैं। मुझे अपने अर्धसैनिक बलों पर पूरा भरोसा है।
Delhi | Union Home Minister Amit Shah attends BSF's 18th Investiture Ceremony. Home Secretary Ajay Bhalla and Director of Intelligence Bureau Arvinda Kumar also present pic.twitter.com/caMChqSbuD
— ANI (@ANI) July 17, 2021
https://youtu.be/1dPolfTJ0SI
बांग्लादेश की आजादी में बीएसएफ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई- अमित शाह
अलंकरण समारोह में गृह सचिव अजय भल्ला और खुफिया ब्यूरो के निदेशक अरविंद कुमार भी मौजूद थे। अमित शाह ने बीएसएफ की स्थापना के बारे में बताया कि तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान ( अब बांग्लादेश ) में मानवाधिकारों का हनन हो रहा था। महिलाओं और बच्चों को प्रताड़ित किया जा रहा था। बीएसएफ के जवानों ने बांग्लादेश को आजाद कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।बीएसएफ के संस्थापक खुसरो फरामुर्ज रुस्तमजी की चर्चा करते हुए शाह ने कहा कि रुस्तमजी के नेतृत्व में ऑपरेशन की अगुवाई की गई थी, जिसके बाद बांग्लादेश अलग मुल्क बना।