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Amit Shah: 'एजेंसियां ऐसा कठोर रुख अपनाएं, जिससे नया आंतकवादी संगठन नहीं बन सके', अमित शाह ने स्पष्ट की नीति
Thu, 05 Oct 2023 05:52 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Thu, 05 Oct 2023 05:52 PM IST
सार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को नई दिल्ली में एनआईए की ओर से आयोजित दो दिवसीय 'आतंकवाद विरोधी सम्मेलन 2023' का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने एनआईए अधिकारियों को पदक भी दिए।
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Amit Shah
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि एनआईए, एटीएस और एसटीएफ जैसी संस्थाओं का काम सिर्फ जांच करना नहीं है। उन्हें जांच के दायरे से बाहर निकलकर आउट ऑफ बॉक्स उपायों के साथ आतंकवाद पर प्रहार करने की दिशा में काम करना चाहिए। सिर्फ आतंकवाद को नहीं, बल्कि उसके पूरे इकोसिस्टम को खत्म करने की जरूरत है। इसके लिए जरूरी है कि केंद्र और राज्य मौजूदा संगठनों को ध्वस्त करने के साथ ऐसे कड़े उपाय निकालें, जिससे कोई नया संगठन खड़ा ही ना हो सके।
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दो दिवसीय आतंकवाद-निरोधी सम्मेलन 2023 के पहले दिन गुरुवार को शाह ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य की एजेंसियों ने पिछले नौ वर्ष में देश में आतंकवाद के सभी स्वरूपों पर मजबूती से नकेल कसने में सफलता प्राप्त की है। सरकार उसे समूल खत्म करने को लेकर प्रतिबद्ध है। अपने मकसद की कामयाबी के लिए जरूरी है कि राज्य और केंद्र की एजेंसियों की कार्यपद्धति में एकरूपता हो और वे साथ काम करें। इसके लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की अगुवाई में आतंक विरोधी मानक तैयार करना होगा, जिसमें सभी राज्यों की संरचना और जांच के मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) एक जैसी हो।
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शाह ने कहा, आतंकवाद की कोई सीमा नहीं होती और कोई भी राज्य अकेले आतंकवाद का सामना नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि हम सबको मिलकर इस बुराई को जड़ से खत्म करना होगा। गृह मंत्री ने दो दिवसीय सम्मेलन के हर सत्र में पांच कार्रवाई योग्य बिंदुओं को तैयार कर उन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजने का सुझाव दिया। गृह मंत्री ने एनआईए के अधिकारियों को उत्कृष्ट सेवा के लिए पदक भी प्रदान किए।
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डाटाबेस का प्रयोग करें राज्य
शाह ने कहा, केंद्रीय एजेंसियों ने पिछले पांच साल में एक बड़ा डाटाबेस तैयार किया है। राज्य इसका बहुआयामी इस्तेमाल करें, ताकि सफलता सुनिश्चित की जा सके। विभिन्न देशों के साथ साझा कार्यक्रम पर काम जारी : गृह मंत्री ने कहा, एजेंसियां गांव से ग्लोबल स्तर तक की संरचना में भागीदार हों सरकार इसके लिए विभिन्न देशों के साथ भी साझा कार्यक्रम पर काम कर रही है। सरकार ने क्रिप्टो, टेरर फंडिंग, संगठित अपराध सिंडिकेट, नार्को टेरर जैसी चुनौतियों पर सख्त रुख अपनाया है। इसके काफी अच्छे परिणाम मिले हैं, लेकिन लड़ाई काफी लंबी है। इसे आपसी तालमेल के बिना लड़ना संभव नहीं।
अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार के कड़े निर्णयों की वजह से जम्मू-कश्मीर, नक्सल प्रभावित इलाकों और पूर्वोत्तर में हिंसा में कमी लाने में बड़ी सफलता मिली है। पीएम मोदी ने क्रिप्टो, हवाला, आतंकवाद वित्तपोषण से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए कड़ा रुख अपनाया है। इसके बहुत अच्छे नतीजे आए हैं, लेकिन बहुत कुछ किया जाना अभी भी बाकी है।
साझा करने की जरूरत वाली सोच से करें काम
शाह ने कहा, सभी केंद्रीय और राज्यस्तरीय आतंकवाद-निरोधी एजेंसियों के लिए एक सामान्य प्रशिक्षण मॉड्यूल होना चाहिए, जिससे आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की कार्यपद्धति में एकरूपता लाई जा सके। एनआईए और आईबी को इस दिशा में काम करना होगा। शाह ने कहा, अब ‘जानने की जरूरत’ से ‘साझा करने की जरूरत’ और ‘साझा करने के कर्तव्य’ की सोच के साथ काम करने का समय आ गया है।
आतंकी घटनाओं की संख्या 6,000 से 900 तक आई
शाह ने कहा, 2001 में आतंकी घटनाओं की संख्या 6,000 थी, जिसे वर्ष 2022 में घटाकर 900 तक लाने का काम केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने किया है। उन्होंने 94 फीसदी से अधिक दोष सिद्धि दर हासिल करने के लिए एनआईए की प्रशंसा की और कहा कि इस दिशा में और अधिक काम करने की जरूरत है। शाह ने सभी राज्यों से भी दोष सिद्धि दर बढ़ाने के लिए कदम उठाने को कहा।
जम्मू-कश्मीर में बदलाव
शाह ने सम्मेलन के दौरान जम्मू-कश्मीर में 2004 से 2014 के 10 वर्षों के मुकाबले 2014 से 2023 के नौ वर्षों में हिंसक घटनाओं में आई भारी कमी का भी जिक्र किया। कहा, 2004-14 के बीच कुल 7,217 घटनाएं हुईं। 70 फीसदी गिरावट के साथ 2014 से 2023 में कुल 2,197 घटनाएं हुईं। 2004-14 के बीच कुल 2,829 लोग मारे गए, जिनमें 1,769 आम नागरिक और 1,060 सेना के जवान थे। वहीं, 20214-23 के बीच कुल 891 लोगों की मौत हुई, जिनमें 336 आम नागरिक और 555 सुरक्षा बलों के जवान थे।