फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Union Cabinet approves bill to replace Delhi services ordinance Sources Latest News Update

Modi Cabinet: दिल्ली अध्यादेश से जुड़े विधेयक को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी; मानसून सत्र में हो सकता है पेश

Tue, 25 Jul 2023 10:01 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Tue, 25 Jul 2023 10:01 PM IST
विज्ञापन
Union Cabinet approves bill to replace Delhi services ordinance Sources Latest News Update
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। - फोटो : PTI

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को दिल्ली अध्यादेश से जुड़े विधेयक को मंजूरी दे दी है। यह बिल दिल्ली में ग्रुप-ए अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग के लिए एक प्राधिकरण के निर्माण के लिए जारी अध्यादेश की जगह लेगा। सूत्रों के हवाले से समाचार एजेंसी पीअीआई ने यह जानकारी दी है। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार शाम केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई। इस दौरान अहम विधेयक को मंजूरी दी गई। सूत्रों की मानें तो अध्यादेश को कानून में तब्दील करने वाला विधेयक संसद के वर्तमान मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है।

विज्ञापन


क्या होता है अध्यादेश?

  • सुप्रीम कोर्ट के किसी भी फैसले को पलटने के लिए केंद्र सरकार अध्यादेश ला सकती है। ये अध्यादेश राष्ट्रपति की तरफ से जारी होते हैं। जब संसद का सत्र नहीं चलता है और जरूरत पड़ने पर इसी के तहत कानून बनाया जाता है। संसद सत्र चलने के दौरान अध्यादेश नहीं लाया जा सकता है।
  • विज्ञापन
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 123 में अध्यादेश का जिक्र है। केंद्रीय मंत्रिमंडल की सलाह पर राष्ट्रपति के पास अध्यादेश जारी करने का अधिकार है। ये अध्यादेश संसद से पारित कानून जितने ही शक्तिशाली होते हैं। अध्यादेश के साथ एक शर्त जुड़ी होती है। अध्यादेश जारी होने के छह महीने के भीतर इसे संसद से पारित कराना जरूरी होता है।
  • विज्ञापन
    विज्ञापन
  • अध्यादेश के जरिए बनाए गए कानून को कभी भी वापस लिया जा सकता है। अध्यादेश के जरिए सरकार कोई भी ऐसा कानून नहीं बना सकती, जिससे लोगों के मूल अधिकार छीने जाएं। केंद्र की तरह ही राज्यों में राज्यपाल के आदेश से अध्यादेश जारी हो सकता है।


सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया था?
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुआई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने पिछले दिनों फैसला सुनाते हुए कहा कि दिल्ली में जमीन, पुलिस और कानून-व्यवस्था को छोड़कर बाकी सारे प्रशासनिक फैसले लेने के लिए दिल्ली की सरकार स्वतंत्र होगी। अधिकारियों और कर्मचारियों का ट्रांसफर-पोस्टिंग भी कर पाएगी। उपराज्यपाल इन तीन मुद्दों को छोड़कर दिल्ली सरकार के बाकी फैसले मानने के लिए बाध्य हैं। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने इस मामले में सर्वसम्मति से फैसला सुनाया था। शीर्ष अदालत के 11 मई के फैसले से पहले दिल्ली सरकार के सभी अधिकारियों के स्थानांतरण और तैनाती उपराज्यपाल के कार्यकारी नियंत्रण में थे।



फिर केंद्र सरकार ने क्या किया? 
दिल्ली में अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला सुनाया था, वह केजरीवाल सरकार के पक्ष में था। ऐसे में इसे कानून में संशोधन करके या नया कानून बनाकर ही पलटा जाना संभव था। संसद उस वक्त चल नहीं रही थी, ऐसे में केंद्र सरकार ने अध्यादेश लाकर इस कानून को पलट दिया। अब छह महीने के अंदर संसद के दोनों सदनों में इस अध्यादेश को पारित कराना जरूरी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed