{"_id":"5a734ebf4f1c1b92268b7b19","slug":"union-budget-2018-p-chidambaram-said-budget-2018-is-a-deficit-budget-jugglery-of-data-by-government","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Budget 2018 - स्वास्थ्य बीमा नया जुमला है, किसान की आय नहीं बढ़ी तो दोगुनी कैसे होगी: पी चिदंबरम","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
Budget 2018 - स्वास्थ्य बीमा नया जुमला है, किसान की आय नहीं बढ़ी तो दोगुनी कैसे होगी: पी चिदंबरम
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
Updated Fri, 02 Feb 2018 04:40 AM IST
विज्ञापन
पी चिदंबरम
- फोटो : PTI
आम बजट 2018-19 पर पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने काफी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे डेफिसिट बजट बताया है। अपनी प्रतिक्रिया में उन्होंने कहा कि सरकार बजटीय घाटे को लेकर भी बाजीगरी की है। रोजगार, सरकार के 10 करोड़ परिवारों को स्वास्थ्य बीमा देने के मामले में भी उन्होंने खुलकर राय रखी। वह अपने लेखों के जरिए भी लगातार मोदी सरकार की अर्थ व्यवस्था को कठघरे में खड़ा करते रहे हैं। इससे पहले एक प्रतिक्रिया में पी चिदंबरम ने कहा कि केन्द्र सरकार को भारतीय अर्थव्यवस्था की आधारभूत (बेसिक्स) समझ नहीं है। अपनी प्रतिक्रिया में आज भी वह इसी के इर्द-गिर्द रहे।
मुद्रा लोन और रोजगार
पी चिदंबरम ने केन्द्र सरकार की मुद्रा लोन योजना पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि इसके जरिए सरकार देशवासियों को गुमराह कर रही है। पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि मुद्रा योजना से आखिर कैसे रोजगार पैदा होगा? चिदंबरम ने कहा कि जितने लोगों को मुद्रा योजना का ऋण दिया गया है, उसका औसत 43 हजार रुपये आ रहा है। उन्होंने कहा कि 43 हजार रुपये के ऋण के बूते उनके हिसाब से कोई रोजगार नहीं पैदा कर सकता।
चिदंबरम ने कहा कि रोजगार पैदा करने का जरिया लघु, मझोले उद्योग हो सकते थे। लेकिन केन्द्र सरकार ने जिस तरह से नोटबंदी और जीएसटी को लागू किया है, उससे इस क्षेत्र की दशा बेहद खराब चल रही है। उन्होंने हवाला देते हुए कहा कि सीएसडीएस का सर्वे देखा जा सकता है। मेरे हिसाब से वह सही है और देश की सच्ची तस्वीर पेश कर रहा है।
विज्ञापन
कर में राहत भी नहीं दी
पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार औसत कर दाताओं को कोई राहत नहीं दिया। 250 करोड़ से ऊपर के कॉरपोरेट घराने के लिए जरूर पांच प्रतिशत की रियायत दी है। आय और बचत को लेकर मध्यवर्ग के लिए बजट में एक कर खारिज किया तो दूसरा थोप दिया है। वास्तविकता यह है कि सरकार करदाता को स्टैंडर्ड डिडक्शन के जरिए आठ हजार करोड़ रुपये की छूट दे रही है तो एलटीसीजी और चार प्रतिशत शिक्षा तथा स्वास्थ्य के अधिभार के जरिए 31 हजार करोड़ रुपये की आय कर रही है।
स्वास्थ्य बीमा नया बड़ा जुमला है
केन्द्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी आम बजट को ईज ऑफ लिविंग की दिशा में उठाया गया कदम बता रहे हैं। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने सरकार की 10 करोड़ परिवारों को पांच लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुविधा देने पर सवाल उठाया है। चिदंबरम ने 10 करोड़ परिवार और 50 करोड़ लोगों को लाभ पहुंचाने के दावे पर भी सवाल उठाया। पूर्व वित्तमंत्री ने कहा कि यह स्वास्थ्य बीमा है तो क्या सभी लोग इसमें पूरी राशि क्लेम करेंगे। ऐसा तो होता नहीं कि सभी लोग क्लेम करें। पूर्व वित्त मंत्री के अनुसार बजट में इसके आर्थिक पक्ष का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। यह समझ में नहीं आ रहा है कि यदि यह एक स्वास्थ्य बीमा है तो इसका प्रीमियम (किस्त) कौन देगा या फिर सरकार ने बजट में किस तरह से व्यवस्था की है।
चिदंबरम ने उदाहरण देते हुए कहा कि फर्ज कीजिए प्रति परिवार पांच लाख रुपये का दसवां हिस्सा यानी 50 हजार रुपये की सुविधा लेगा। इस हिसाब से हर साल यह राशि पांच लाख करोड़ रुपये की होगी। यदि यह राशि बीमा कंपनी वहन करेगी तो इसका प्रीमियम पांच हजार से 15 हजार रुपये प्रति परिवार होगा। यानी 50 हजार से 1.50 लाख करोड़ रुपये सालाना। क्या वित्त मंत्री इसे लेकर गंभीर हैं?
विज्ञापन
मुद्रा लोन और रोजगार
पी चिदंबरम ने केन्द्र सरकार की मुद्रा लोन योजना पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि इसके जरिए सरकार देशवासियों को गुमराह कर रही है। पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि मुद्रा योजना से आखिर कैसे रोजगार पैदा होगा? चिदंबरम ने कहा कि जितने लोगों को मुद्रा योजना का ऋण दिया गया है, उसका औसत 43 हजार रुपये आ रहा है। उन्होंने कहा कि 43 हजार रुपये के ऋण के बूते उनके हिसाब से कोई रोजगार नहीं पैदा कर सकता।
विज्ञापन
चिदंबरम ने कहा कि रोजगार पैदा करने का जरिया लघु, मझोले उद्योग हो सकते थे। लेकिन केन्द्र सरकार ने जिस तरह से नोटबंदी और जीएसटी को लागू किया है, उससे इस क्षेत्र की दशा बेहद खराब चल रही है। उन्होंने हवाला देते हुए कहा कि सीएसडीएस का सर्वे देखा जा सकता है। मेरे हिसाब से वह सही है और देश की सच्ची तस्वीर पेश कर रहा है।
विज्ञापन
कर में राहत भी नहीं दी
पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार औसत कर दाताओं को कोई राहत नहीं दिया। 250 करोड़ से ऊपर के कॉरपोरेट घराने के लिए जरूर पांच प्रतिशत की रियायत दी है। आय और बचत को लेकर मध्यवर्ग के लिए बजट में एक कर खारिज किया तो दूसरा थोप दिया है। वास्तविकता यह है कि सरकार करदाता को स्टैंडर्ड डिडक्शन के जरिए आठ हजार करोड़ रुपये की छूट दे रही है तो एलटीसीजी और चार प्रतिशत शिक्षा तथा स्वास्थ्य के अधिभार के जरिए 31 हजार करोड़ रुपये की आय कर रही है।
स्वास्थ्य बीमा नया बड़ा जुमला है
केन्द्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी आम बजट को ईज ऑफ लिविंग की दिशा में उठाया गया कदम बता रहे हैं। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने सरकार की 10 करोड़ परिवारों को पांच लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुविधा देने पर सवाल उठाया है। चिदंबरम ने 10 करोड़ परिवार और 50 करोड़ लोगों को लाभ पहुंचाने के दावे पर भी सवाल उठाया। पूर्व वित्तमंत्री ने कहा कि यह स्वास्थ्य बीमा है तो क्या सभी लोग इसमें पूरी राशि क्लेम करेंगे। ऐसा तो होता नहीं कि सभी लोग क्लेम करें। पूर्व वित्त मंत्री के अनुसार बजट में इसके आर्थिक पक्ष का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। यह समझ में नहीं आ रहा है कि यदि यह एक स्वास्थ्य बीमा है तो इसका प्रीमियम (किस्त) कौन देगा या फिर सरकार ने बजट में किस तरह से व्यवस्था की है।
चिदंबरम ने उदाहरण देते हुए कहा कि फर्ज कीजिए प्रति परिवार पांच लाख रुपये का दसवां हिस्सा यानी 50 हजार रुपये की सुविधा लेगा। इस हिसाब से हर साल यह राशि पांच लाख करोड़ रुपये की होगी। यदि यह राशि बीमा कंपनी वहन करेगी तो इसका प्रीमियम पांच हजार से 15 हजार रुपये प्रति परिवार होगा। यानी 50 हजार से 1.50 लाख करोड़ रुपये सालाना। क्या वित्त मंत्री इसे लेकर गंभीर हैं?
किसान और न्यूनतम समर्थन मूल्य का छलावा
पेट्रोल-डीजल की कीमत
पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि जब तक मोदी सरकार सत्ता में है, उन्हें पेट्रोल और डीजल की कीमत में कोई कमी आने के संकेत नहीं दिखाई पड़ रहे हैं। क्योंकि इस सरकार के समय में लगातार पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी सबसे ज्यादा रही है। ऐसा ही आगे भी रहने के पूरे आसार हैं। सरकार अपनी होने वाली आय में कोई कमी नहीं करना चाहती। वह लोगों की जेब पर ही इसका बोझ डाल रही है।
ओएनजीसी का विनिवेश
पूर्व वित्तमंत्री ने कहा कि सरकार ने ओएनजीसी के विनिवेश की घोषणा की है, लेकिन उन्हें नहीं लग रहा है कि इससे कोई रणनीतिक सफलता मिल पाएगी। ऐसा वह अपने अनुभवों और जानकारी के आधार पर कह रहे हैं।
किसान और न्यूनतम समर्थन मूल्य
सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य में 1.5 गुणा की बढ़ोत्तरी की घोषणा की है। लेकिन यह कैसे करेगी, इसके लिए बजटीय प्रावधान क्या हैं? चिदंबरम ने कहा कि आम बजट में यह स्पष्ट नहीं है। उन्होंने स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों को भी पिछले साल सरकार द्वारा याद किए जाने का जिक्र किया। ई-मार्केट के लिए 2000 करोड़ और आपरेशन ग्रीन (कैबिनेट की मंजूरी) योजना की भी याद दिलाई।
पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट और सरकारी आंकड़े से साबित हो रहा है कि चार साल में किसानों की आय में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। बल्कि यह क्षेत्र लगातार दबाव में है। यह संकट जारी है और गहरा रहा है। जबकि अधिकांश लोगों की जीविका का साधन कृषि ही है। ऐसे में यह सवाल मौजूं है कि जब साल में किसान की आय नहीं बढ़ी तो आखिरी एक साल में दो गुनी कैसे हो जाएगी।
बजटीय घाटा
वित्त मंत्री अरुण जेटली इसमें फेल साबित हुए हैं। 2017-18 के लिए बजट इस्टीमेट में बजटीय घाटे का लक्ष्य 3.2 प्रतिशत का रखा गया था। लेकिन परिणाम 3.5 फीसदी रहा। यह भी सवाल के घेरे में है। इसी तरह से 2018-19 का लक्ष्य 3.0 प्रतिशत का है लेकिन वित्त मंत्री 3.20 का बता रहे हैं।
बजट आवंटन घटना चिंता का विषय
पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने बजट 2018-19 में मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, राष्ट्रीय पेयजल मिशन, स्वच्छ भारत अभियान, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मिड डे मील, नार्थ ईस्टर्न इनवेस्टमेंट प्रमोशन, मूल्य स्थिरीकरण फंड, ग्राम ज्योति योजना आदि योजना में आवंटन घटा है। पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि यह चिंता का विषय है और बजट पर संसद में चर्चा के दौरान सरकार को इस मुद्दे पर घेरा जाएगा।
पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि जब तक मोदी सरकार सत्ता में है, उन्हें पेट्रोल और डीजल की कीमत में कोई कमी आने के संकेत नहीं दिखाई पड़ रहे हैं। क्योंकि इस सरकार के समय में लगातार पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी सबसे ज्यादा रही है। ऐसा ही आगे भी रहने के पूरे आसार हैं। सरकार अपनी होने वाली आय में कोई कमी नहीं करना चाहती। वह लोगों की जेब पर ही इसका बोझ डाल रही है।
ओएनजीसी का विनिवेश
पूर्व वित्तमंत्री ने कहा कि सरकार ने ओएनजीसी के विनिवेश की घोषणा की है, लेकिन उन्हें नहीं लग रहा है कि इससे कोई रणनीतिक सफलता मिल पाएगी। ऐसा वह अपने अनुभवों और जानकारी के आधार पर कह रहे हैं।
किसान और न्यूनतम समर्थन मूल्य
सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य में 1.5 गुणा की बढ़ोत्तरी की घोषणा की है। लेकिन यह कैसे करेगी, इसके लिए बजटीय प्रावधान क्या हैं? चिदंबरम ने कहा कि आम बजट में यह स्पष्ट नहीं है। उन्होंने स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों को भी पिछले साल सरकार द्वारा याद किए जाने का जिक्र किया। ई-मार्केट के लिए 2000 करोड़ और आपरेशन ग्रीन (कैबिनेट की मंजूरी) योजना की भी याद दिलाई।
पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट और सरकारी आंकड़े से साबित हो रहा है कि चार साल में किसानों की आय में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। बल्कि यह क्षेत्र लगातार दबाव में है। यह संकट जारी है और गहरा रहा है। जबकि अधिकांश लोगों की जीविका का साधन कृषि ही है। ऐसे में यह सवाल मौजूं है कि जब साल में किसान की आय नहीं बढ़ी तो आखिरी एक साल में दो गुनी कैसे हो जाएगी।
बजटीय घाटा
वित्त मंत्री अरुण जेटली इसमें फेल साबित हुए हैं। 2017-18 के लिए बजट इस्टीमेट में बजटीय घाटे का लक्ष्य 3.2 प्रतिशत का रखा गया था। लेकिन परिणाम 3.5 फीसदी रहा। यह भी सवाल के घेरे में है। इसी तरह से 2018-19 का लक्ष्य 3.0 प्रतिशत का है लेकिन वित्त मंत्री 3.20 का बता रहे हैं।
बजट आवंटन घटना चिंता का विषय
पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने बजट 2018-19 में मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, राष्ट्रीय पेयजल मिशन, स्वच्छ भारत अभियान, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मिड डे मील, नार्थ ईस्टर्न इनवेस्टमेंट प्रमोशन, मूल्य स्थिरीकरण फंड, ग्राम ज्योति योजना आदि योजना में आवंटन घटा है। पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि यह चिंता का विषय है और बजट पर संसद में चर्चा के दौरान सरकार को इस मुद्दे पर घेरा जाएगा।