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समान नागरिक संहिता: उत्तराखंड सरकार को सौंपा गया मसौदा, जानें कितने समय में बनी रिपोर्ट और इससे क्या बदलेगा

Fri, 02 Feb 2024 07:51 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Fri, 02 Feb 2024 07:51 PM IST
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सार
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता पर गठित कमेटी ने यूसीसी के लिए अपना मसौदा सरकार को सौंप दिया है। समिति ने बैठकों, परामर्शों, क्षेत्र के दौरे और विशेषज्ञों और जनता के साथ बातचीत के बाद मसौदा तैयार किया। इस प्रक्रिया में 13 महीने से अधिक का समय लगा।
 
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Uniform Civil Code Draft Submitted to Uttarakhand CM Pushkar Singh Dhami Know Key Changes implementation
उत्तराखंड यूसीसी - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

जल्द ही उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बन सकता है। इससे पहले गोवा में शुरुआत से ही यह कानून लागू है। शुक्रवार को जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई समिति के अंतिम मसौदे को मुख्यमंत्री को सौंप दिया। आगामी दिनों में इसे विधानसभा और राज्यपाल से मंजूरी मिल सकती है और इसके बाद यह कानून बन जाएगा। इस बीच, यूसीसी रिपोर्ट पर राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने खुशी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि राज्य में सबको समान अधिकार प्रदान करने हेतु सदैव संकल्पित हैं। 


इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी देश में यूसीसी लागू करने की बात कर चुके हैं। अब जब उत्तराखंड द्वारा तैयार कानून लागू होने को है ऐसे में यह अहम विषय बन सकता है। भाजपा शासित कई सरकारें चुनावी घोषणा के रूप में इस कानून को अपने-अपने राज्यों में लागू कर सकती हैं। 


आइये जानते हैं कि उत्तराखंड में यूसीसी को लेकर अभी क्या हुआ है? इसके प्रावधान क्या हैं? मसौदा कितने समय में बनकर तैयार हुआ? राज्य में कानून कब तक लागू हो जाएगा? 

उत्तराखंड यूसीसी
उत्तराखंड यूसीसी - फोटो : Amar Ujala
उत्तराखंड में यूसीसी को लेकर अभी क्या हुआ है?
राज्य में समान नागरिक संहिता पर गठित कमेटी ने यूसीसी के लिए अपना मसौदा सरकार को सौंप दिया है। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में सीएम धामी को रिपोर्ट सौंपी। 

इस दौरान मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि लंबे समय से हमें इस मसौदे का इंतजार था, आज हमें मसौदा मिल गया है। हमने उत्तराखंड की जनता से वादा किया था कि नई सरकार के गठन के बाद हम समान नागरिक संहिता के लिए कानून बनाएंगे।
 

उत्तराखंड यूसीसी
उत्तराखंड यूसीसी - फोटो : AMAR UJALA
कितने समय में तैयार हुआ मसौदा?
उत्तराखंड सरकार ने मई 2022 में सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में विशेषज्ञों की एक समिति गठित की थी। इस समिति को उत्तराखंड के निवासियों के व्यक्तिगत नागरिक मामलों को विनियमित करने वाले विभिन्न मौजूदा कानूनों की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके साथ ही इसे विवाह, तलाक, संपत्ति के अधिकार, उत्तराधिकार, विरासत, गोद लेने, रखरखाव जैसे विषयों पर मसौदा कानून या कानूनों को तैयार करना या मौजूदा कानूनों में बदलाव का सुझाव देने का काम भी सौंपा गया था। 

इस संबंध में एक अधिसूचना 27 मई 2022 को जारी की गई थी और शर्तें 10 जून 202 को अधिसूचित की गई थीं। समिति ने बैठकों, परामर्शों, क्षेत्र के दौरे और विशेषज्ञों और जनता के साथ बातचीत के बाद मसौदा तैयार किया। इस प्रक्रिया में 13 महीने से अधिक का समय लगा। 

कमेटी के अध्यक्ष जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई के मुताबिक, समिति ने अपनी पहली बैठक 4 जुलाई 2022 को दिल्ली में की थी। मसौदे के महत्वपूर्ण पहलुओं पर जुलाई 2023 में एक मैराथन बैठक में विचार-विमर्श किया गया और इसे अंतिम रूप दिया गया।

उत्तराखंड यूसीसी
उत्तराखंड यूसीसी - फोटो : ANI
कैसे तैयार की गई है रिपोर्ट? 
कमेटी ने कहा है कि उसने अपनी रिपोर्ट तैयार करने से पहले राज्यभर में समाज के विशिष्ट लोगों, समाजसेवियों, धार्मिक नेताओं, संतों और जागरूक नागरिकों के साथ-साथ राजनीतिक दलों, राज्य वैधानिक आयोगों के प्रतिनिधियों से बातचीत की है। कमेटी को समान नागरिक संहिता पर ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से करीब 20 लाख सुझाव मिले हैं। इनमें से कमेटी ने लगभग ढाई लाख लोगों से सीधे मिलकर इस मुद्दे पर उनकी राय जानी है।

कमेटी ने कहा है कि रिपोर्ट तैयार करने के लिए उसने राज्य के हर जिले के हर समूह से बात की है और रिपोर्ट में सबकी बातों को समाहित किया गया है। 

इसके अलावा उत्तराखंड यूसीसी समिति ने 2 जून 2023 को दिल्ली में विधि आयोग के अध्यक्ष और उसके सदस्यों के साथ भी इस विषय पर राय-शुमारी की। 

इस तरह समान नागरिक संहिता पर अंतिम रिपोर्ट बनाने के लिए कम से कम 143 बैठकों का आयोजन किया गया। अंतिम बैठक 24 जून 2023 को दिल्ली में हुई थी, जिसमें उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों के लोगों से बातचीत कर उनकी राय ली गई थी। 

उत्तराखंड यूसीसी
उत्तराखंड यूसीसी - फोटो : ANI
इसके प्रावधान क्या हैं?
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि विवाह पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा। जो व्यक्ति अपनी शादी का पंजीकरण नहीं कराएंगे वे सरकारी सुविधाओं के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे। 

लिव-इन जोड़ों को अपने फैसले के बारे में अपने माता-पिता को सूचित करना होगा और 'हलाला' और 'इद्दत' की प्रथा बंद कर दी जाएगी। बहुविवाह (एक से अधिक पत्नियां रखने की प्रथा) भी गैरकानूनी होगा। पति-पत्नी को तलाक लेने का समान हक दिया जाएगा। मसौदे में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर भी सिफारिश की गई है। 

यूसीसी समिति की अध्यक्ष देसाई ने शुक्रवार को कहा, 'हमारा जोर महिलाओं, बच्चों और दिव्यांग  व्यक्तियों को ध्यान में रखते हुए लैंगिक समानता सुनिश्चित करना है। हमने मनमानी और भेदभाव को खत्म कर सभी को एक समान स्तर पर लाने का प्रयास किया है। समिति ने मुस्लिम देशों सहित विभिन्न देशों में मौजूदा कानूनों का अध्ययन किया है।

उन्होंने कहा, 'हमने सब कुछ देखा है, पर्सनल लॉ का अध्ययन किया है। हमने विधि आयोग की रिपोर्ट का भी अध्ययन किया है। यदि आप हमारा मसौदा पढ़ेंगे तो आपको लगेगा कि समिति ने हर चीज पर विचार किया है। यदि मसौदा लागू किया जाता है, तो हमारे देश का धर्मनिरपेक्ष ताना-बाना मजबूत होगा।'

उत्तराखंड यूसीसी
उत्तराखंड यूसीसी - फोटो : Social media
यह कब तक लागू हो जाएगा?
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार होने पर सीएम धामी ने प्रदेशवासियों को बधाई दी है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा 'जल्द ही देवभूमि उत्तराखण्ड में यूसीसी लागू किया जाएगा।' उन्होंने कहा कि यूसीसी पर भारत के संविधान की मूल भावना के अनुरूप ही निर्णय होने हैं। सबके हित में निर्णय आएगा। उत्तराखंड से इसकी शुरुआत हुई है। देवभूमि इसकी अगुआई कर रही है। हमारी यह अपेक्षा है कि आने वाले समय में देशभर में यूसीसी लागू हो। 

इस बीच रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि धामी सरकार जुलाई के दूसरे सप्ताह में विधानसभा का सत्र बुला सकती है। इस दौरान समिति के अंतिम मसौदे को मंजूरी दिला सकती है।

उत्तराखंड यूसीसी
उत्तराखंड यूसीसी - फोटो : ANI
उत्तराखंड में भाजपा का था चुनावी वादा 
बता दें कि यूसीसी राज्य में भाजपा का चुनावी मुद्दा रहा है। पार्टी ने 2022 विधानसभा चुनाव में अपने घोषणा पत्र में इसे लागू करने का वादा किया था। राज्य में सरकार बनने के बाद मार्च 2022 में यह कैबिनेट में पास हुआ था।
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