प्रदूषित कोहरे की चादर में लिपटी दिल्ली, यूएनईपी विशेषज्ञ ने कहा- वायु प्रदूषण अदृश्य कातिल
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भारत की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंचने के बाद दिल्ली सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति की घोषणा की है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के विशेषज्ञ वेलेन्टीन फोल्टेस्कू ने कहा है कि वायु प्रदूषण को अदृश्य कातिल माना जाता है, लेकिन उसके असहनीय स्तर के कारण यह अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
प्रदूषित कोहरे की चादर ने पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है जिसके कारण हवाई यातायात भी प्रभावित हुआ है और कुछ उड़ानों का रास्ता बदलना पड़ा है। मीडिया रिपोर्टों में राजधानी दिल्ली में रह रहे लोगों को अभी इस समस्या से एक सप्ताह और जूझने की आशंका जाहिर की गई है।
भारत में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम में वरिष्ठ कार्यक्रम प्रबंधन अधिकारी वेलेन्टीन फोल्टेस्कू ने यूएन न्यूज को बताया कि हवा में मौजूद प्रदूषण के बारीक कणों का मौजूदा स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों से 40 गुना ज्यादा हो गया है। ये ऐसे कण हैं जो मानव स्वास्थ्य के नजरिए से बेहद नुकसानदेह हैं।
वायु प्रदूषण की मुख्य वजह कृषि के खराब तरीके बताए गए हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के आस-पास के राज्यों में किसान बड़े पैमाने पर खुले खेतों में पराली जला रहे हैं जिसका धुंआ दिल्ली और उसके आसपास के शहरों में अपना असर दिखा रहा है।
कचरा प्रबंधन की सही व्यवस्था ना होने और भारी यातायत और उससे निकलने वाले धुंए से जहरीली हवा का स्तर ज्यादा हो गया है। यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने पार्टिकुलेट मैटर - हवा में मौजूद खतरनाक बारीक कण से मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को रेखांकित करते हुए बताया है कि इससे बच्चों के मस्तिष्क का विकास रुक जाता है, ह्रदय रोग होने की आशंका बढ़ती है, और फेफड़ों का कैंसर होने का खतरा पैदा होता है।
दुनिया में हर 10 में से 9 व्यक्ति जिस हवा में सांस लेते हैं वह स्वास्थ्य के लिए अनुकूल नहीं है। एक अनुमान के अनुसार वायु प्रदूषण से हर साल 70 लाख असामयिक मौतें हो रही हैं जिनमें छह लाख से ज्यादा बच्चे हैं।
यूएन पर्यावरण एजेंसी दिल्ली सहित अन्य इलाकों में प्रदूषण और जहरीली हवा से निपटने के लिए कई सैक्टरों से मिलकर काम कर रही है। इसके तहत सरकार के नेतृत्व में कृषि संबंधी पहल शुरू की गई हैं और पराली जलाने की नुकसानदेह परंपरा की रोकथाम के लिए परियोजना चलाई जा रही है।