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नोटबंदी के दो साल: सबसे ऊंचे स्तर पर बेरोजगारी, नौकरी पर भी नहीं रहा भरोसा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Updated Thu, 08 Nov 2018 09:03 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : pexels.com
आज नोटबंदी को पूरे दो साल हो गए हैं। एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि नोटबंदी के बाद से बेरोजगारी का स्तर बढ़कर अक्तूबर माह में 6.9 फीसदी पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा 2 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर है। वहीं काम करने के इच्छुक युवकों का आंकड़ा भी 42.4 फीसदी तक गिर गया है। यह 2016 के बाद का सबसे निचला स्तर है। यह अध्ययन सीएमआईई द्वारा किया गया है। सीएमआईई का यह भी कहना है कि काम करने के इच्छुक वयस्कों की संख्या में कमी नोटबंदी के बाद आई है जिसकी स्थिति अभी भी ठीक नहीं है। हालात सितंबर माह में ठीक थे, लेकिन श्रम बाजार के गिरते आंकड़े अक्तूबर में फिर से पहले जैसेे हो गए।
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कार्यरत लोगों की संख्या अक्तूबर 2018 में 39.7 करोड़ मापी गई। यह आंकड़ा अक्तूबर 2017 में 40.7 करोड़ था। इसमें करीब 2.4 फीसदी की गिरावट आई है। सीएमआईई के बुलेटिन के अनुसार अक्तूबर में बेरोजगार के स्तर में हुई तेजी से गिरावट श्रम बाजार के लिए बेहद चिंताजनक है। वहीं बेरोजगार लोग जो नौकरी की तलाश में हैं, उनकी संख्या भी 2.95 करोड़ पर पहुंच गई है। यह आंकड़ा अक्तूबर 2018 का है। जो कि बीते साल के मुकाबले दो गुना अधिक हो गया है। अक्तूबर 2017 में ऐसे लोगों की संख्या जो नौकरी की तलाश में थे, 1.4 करोड़ था।
सीएमआईई के इन आंकड़ों पर एचआर सर्विसेज सीआईईएल के सीईओ आदित्य नारायण मिश्रा का कहना है, 'भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में अक्तूबर-दिसंबर का समय नौकरी के निर्माण का समय होता है, लेकिन नौकरी की मांग ज्यादा है और नौकरी कम इसलिए इस दौरान यह आंकड़ा इतना चिंताजनक है।' उन्होंने आगे कहा कि हर साल 1.2 करोड़ लोग देश के श्रम बाजार में प्रवेश करते हैं (नौकरी करने के लिए तैयार रहते हैं) लेकिन उनकी संख्या के मुकाबले नौकरी की संख्या बेहद कम होती है।