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आखिर कैसे हुई यह चूक: गुजरात के मेहसाणा में नाबालिग महिला चुनी गई गांव की सरपंच, अब अधिकारी करेंगे जांच

Sat, 05 Jul 2025 11:15 PM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेहसाणा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेहसाणा Published by: शिव शुक्ला Updated Sat, 05 Jul 2025 11:15 PM IST
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Underage woman becomes sarpanch of Gujarat village; officials accept lapse in checking her forms
पंचायत चुनाव - फोटो : अमर उजाला

गुजरात के मेहसाणा में एक नाबालिग महिला को गांव का सरपंच चुन लिया गया। चुनाव अधिकारियों ने उसके नामांकन पत्र को बिना जांचे ही स्वीकार कर लिया था। महिला ने नामांकन में अपनी उम्र 21 वर्ष बताई जो कि चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र है। अधिकारी ने बताया कि यह मामला बृहस्पतिवार को तब प्रकाश में आया, जब अगले दिन गांधीनगर में एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की ओर से नवनिर्वाचित युवा सरपंचों की सूची तैयार की जा रही थी।

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तालुका विकास अधिकारी (टीडीओ) आशीष पटेल ने बताया कि 22 जून को गुजरात भर में हुए ग्राम पंचायत चुनावों में अफरोज परमार गिलोसन गांव की सरपंच चुनी गईं। नियमों के अनुसार, सरपंच बनने के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष है। अपना फॉर्म जमा करते समय, उसने दावा किया कि वह 21 वर्ष की है। मुख्यमंत्री के समारोह से पहले, अधिकारियों ने हमसे ऐसे सरपंचों का विवरण मांगा था। उस समय, हमें पता चला कि परमार कम उम्र के बावजूद निर्वाचित हुई हैं। जबकि उनके चुनाव पहचान पत्र में उनकी जन्मतिथि 8 दिसंबर, 2004 है, उनके स्कूल छोड़ने के प्रमाण पत्र में 7 जनवरी, 2005 है। दोनों मामलों में, वह चुनाव लड़ने के लिए 21 वर्ष की न्यूनतम आयु की आवश्यकता को पूरा नहीं करती थी।

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टीडीओ ने कहा कि आगे की कार्रवाई के लिए उप प्रभागीय मजिस्ट्रेट को एक रिपोर्ट भेजी गई है। सब डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) उर्विश वलांड ने कहा कि आरओ ने फॉर्म स्वीकार कर लिया है क्योंकि उम्मीदवारों को फॉर्म में केवल अपनी उम्र का उल्लेख करना होता है, जन्मतिथि का नहीं। मुझे टीडीओ की रिपोर्ट मिल गई है। इसे आगे की कार्रवाई के लिए कलेक्टर और राज्य चुनाव आयोग को भेज दिया है। प्रथम दृष्टया, ऐसा लगता है कि निर्वाचित उम्मीदवार ने गलत जानकारी दी है। एसईसी को यह तय करना है कि यह एक वास्तविक गलती थी या जानबूझकर की गई थी।

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