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आयुष्मान भारत: निजी अस्पतालों में नहीं होगा ‘मानसिक’ बीमारियों का इलाज

Mon, 24 Sep 2018 03:50 AM IST
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 24 Sep 2018 03:50 AM IST
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Under the ayushman bharat scheme mental illnesses patient will not be treated in private hospitals
प्रतीकात्मक तस्वीर

दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी हेल्थ स्कीम प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना 25 सितंबर से पूरे देशभर में लागू हो जाएगी। वहीं सरकार ने इस योजना में निजी अस्पतालों की मनमानी रोकने के लिए भी खास इंतजाम किए हैं। सरकार ने 40 फीसदी मेडिकल पैकेज को केवल सरकार अस्पतालों के लिए अधिकृत किया है। यानी कि कुछ बीमारियों का इलाज केवल सरकारी अस्पतालों में ही होगा। इस योजना में अभी तक 13 हजार से ज्यादा अस्पताल जुड़ चुके हैं, इनमें तकरीबन 7 हजार प्राइवेट अस्पताल शामिल हो चुके हैं।

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प्रधानमंत्री ने रविवार को रांची से इस योजना को हरी झंडी दिखाई। इस योजना के तहत सरकार 10 करोड़ गरीब परिवारों को 5 लाख रुपये का इंश्योरेंस कवर दे रही है। आयुष्मान भारत के सीईओ इंदु भूषण का कहना है कि इस योजना के तहत 1350 हेल्थ पैकेज को कवर किया जा रहा है, जिसमें सर्जरी, मेडिकल, दवाओं के खर्चे, डायग्नोस्टिक जैसी चीजें मुफ्त मिल सकेंगी। वहीं 40 फीसदी हेल्थ पैकेज का इलाज केवल सरकारी अस्तपालों में ही मिलेगा।
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भूषण का कहना है कि अगर किसी लाभार्थी को ऑपरेशन कराना है या वह मानसिक बीमारी से ग्रस्त है, तो इसके इलाज के लिए उसे सरकारी अस्पताल में ही भर्ती होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि अकसर देखा जाता है कि प्राइवेट अस्पताल ऐसे मामलों में इलाज को ज्यादा लंबा खींच देते हैं और फालतू की प्रक्रियाओं में चले जाते हैं, जिससे धोखाधड़ी की संवाभनाएं बढ़ जाती हैं।
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वहीं मानसिक चिकित्सा विशेषज्ञों ने सरकार के इस फैसले की कड़ी निंदा की है। न्यूरो साइकेट्रिस्ट विशेषज्ञ डॉक्टर संजय वर्मा का कहना है कि मानसिक बीमारियों को लेकर सरकार का प्राइवेट सेक्टर पर भरोसा न करना सरासर गलत है और कहीं से भी न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि इस फैसले को देख कर लग रहा है कि पैकेज में शामिल करने बाद भी सरकार मानसिक बीमारियों को गंभीरता से नहीं ले रही है।

उनका कहना है कि मानसिक बीमारियों के इलाज को लेकर देश में बहुत कम सरकारी संस्थान हैं। वहीं सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कालेजों में भी ऐसे मरीजों के इलाज को लेकर पर्याप्त संख्या में डाक्टर हैं और न ही प्रशिक्षित स्टाफ है। उन्होंने कहा कि संभव है कि ऐसी बीमारियों के दावों को लेकर सरकार के पास अनुभव की कमी है, संभव है कि भविष्य में यह प्रतिबंध हटा दिए जाएं।  

योजना से खजाने पर हर साल 5 हजार करोड़ रुपये का बढ़ेगा बोझ

Under the ayushman bharat scheme mental illnesses patient will not be treated in private hospitals
आयुष्मान भारत योजना 2018

आयुष्मान भारत के सूत्रों का कहना है कि तेज पेट दर्द, तेज बुखार, टांके, उत्तकों में चोट, हिस्टेरेक्टोमीज, मनोवस्था संबंधी विकार, मानसिक विकारों, व्यवहार सिंड्रोम, सीजोफ्रेनिया का इलाज केवल सरकारी अस्पतालों में ही किया जाएगा। वहीं गर्भावस्था में ज्यादा जोखिम होने पर या इमरजेंसी वाले मामलों को ही केवल प्राइवेट अस्पतालों में रेफर किया जाएगा।

आयुष्मान भारत योजना से फिलहाल खजाने पर हर साल करीब 5,000 करोड़ रुपये का बोझ बढ़ेगा। जो कि अगले साल बढ़कर 10,000 करोड़ हो जाएगा। इस साल 8 करोड़ लोग इससे लाभान्वित हो सकते हैं, वहीं 2020 तक 10 करोड़ लोगों तक पहुंचाने का टारगेट रखा गया है। पहले साल में कुल खर्च में से करीब 3,000 करोड़ केंद्र सरकार देगी। यह कार्यक्रम लाभार्थियों को तत्काल मौके पर कैशलेस और पेपरलेस की सुविधा देगा। 

इस योजना के तहत 5 लाख तक के खर्च में, अस्पताल में भर्ती होने के अलावा जरुरी जांच, दवाई, भर्ती से पहले का खर्च और इलाज पूरा होने तक का खर्च भी शामिल है। अगर किसी को पहले से कोई बीमारी है तो उस बीमारी का भी खर्च इस योजना द्वारा उठाया जाएगा।

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