{"_id":"5bdd815bbdec226985592465","slug":"unaware-of-the-previous-rafale-fighter-deal-being-scrapped-by-the-nda-government-says-hal","type":"story","status":"publish","title_hn":"राफेल मामले में नया मोड़, एचएएल ने कहा- पिछला सौदा रद्द होने की नहीं थी जानकारी ","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
राफेल मामले में नया मोड़, एचएएल ने कहा- पिछला सौदा रद्द होने की नहीं थी जानकारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 03 Nov 2018 04:37 PM IST
विज्ञापन
राफेल विमान (सांकेतिक चित्र)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राफेल सौदे को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप- प्रत्यारोप का दौर अभी भी जारी है। मौजूदा मामले में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की ओर से कहा गया है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि पिछले राफेल सौदे को एनडीए की सरकार रद्द कर चुकी है। इसके साथ ही एचएएल ने यह भी कहा कि उसे नहीं पता था कि मोदी सरकार ने पिछला सौदा रद्द करने के बाद फ्रांसीसी कंपनी दासो एविएशन के साथ नए सिरे से सौदा किया।
विज्ञापन
शनिवार को एचएएल के चेयरमैन आर. माधवन ने एक समाचार एजेंसी से कहा, ‘हमें पिछला सौदा रद्द किए जाने के बारे में नहीं मालूम था। हम राफेल पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते, क्योंकि अब हम इस सौदे का हिस्सा नहीं हैं।’ माधवन ने राफेल एयरक्राफ्ट निर्माण का जिक्र करते हुए आगे कहा कि राफेल उन परियोजनाओं में से एक थी जिसमें हम शामिल थे और यह हमारी एकमात्र परियोजना नहीं थी। उन्होंने कहा कि राफेल सौदे में सरकार शामिल थी इस वजह से हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड इसकी कीमत और नीतियों को लेकर कोई भी टिप्पणी नहीं कर सकती है।
विज्ञापन
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस राफेल सौदे को बोफोर्स जैसा मुद्दा बनाने की कोशिश में है। विपक्ष मौजूदा केंद्र सरकार पर राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर कथित घोटाले का आरोप लगाकर लगातार हमले बोल रहा है। हालांकि इस सौदे को लेकर अभी तक जांच नहीं हुई है, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी देश के जाने- माने उद्योगपति की कंपनी को विमान सौदे में 30 हजार करोड़ रुपये का ठेका दिलाने का आरोप लगाकर भाजपा के खिलाफ आगामी विधानसभा चुनाव में मुद्दा बनाने की कोशिश में जुटे हैं।
विज्ञापन
जानिए किसने बनाई एचएएल
23 दिसंबर 1940 को देश के माने-जाने उद्ममी वालचन्द हीराचन्द को लगा क्यों न ऐसी कंपनी बनाई जाए, जिससे भारत में ही जहाज बनने लगे। इसी सोच के साथ उन्होंने चार करोड़ रुपये की शुरूआती पूंजी के साथ मैसूर की तत्कालीन सरकार के सहयोग से 23 दिसंबर 1940 को कंपनी की नींव डाली।
1941 में भारत सरकार ने एक तिहाई शेयर खरीद लिया और 1942 में पूरा मैनेजमेट अपने हाथ में ले लिया। फिर अमेरिका की इंटर कॉन्टीनेंटल एयरक्राफ्ट कंपनी के सहयोग से देश की यह कंपनी हॉक फाइटर और बॉम्बर एयरक्राफ्ट बनाने लगी।
1945 में यह कंपनी मिनिस्ट्री ऑफ इंडस्ट्री एंड सप्लाई और फिर जनवरी 1951 में इसे मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस के अधीन कर दिया गया। अगस्त 1951 में एचटी-2 ट्रेनर एयरक्राफ्ट को डिजाइन कर कंपनी ने निर्माण किया। अपने निर्देशन में बने इस विमान को पहली बार डॉ. वीएम घटगे ने उड़ाने में सफलता हासिल की। इसके बाद कंपनी ने करीब डेढ़ सौ ट्रेनर एयरक्राफ्ट बनाकर एयरफोर्स को सप्लाई किए गए। फिर टू सीटर पुष्पक, कृषक, जेट फाइटर मारुत और जेट ट्रेनर किरन नामक एयरक्राफ्ट इस कंपनी ने बनाए।
इस बीच अगस्त 1963 में मिग 21 बनाने के लिए एयरोनॉटिक्स इंडिया लिमिटेड (एआइएल) अस्तित्व में आई। जून 1964 में सरकार ने हिंदुस्तान एयरक्राफ्ट लिमिटेड को एयरोनॉटिक्स इंडिया लिमिटेड के साथ मिला दिया। इस प्रकार हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड का जन्म हुआ।
यह विलय एक अक्टूबर 1964 को हुआ, फिर इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड का नाम मिला। कंपनी का मुख्य काम प्लेन की डिजाइनिंग, मैन्यूफैक्चरिंग, रिपेयरिंग और एयरक्राफ्ट, हेलीकॉप्टर के इंजन की मरम्मत करने का है।