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चिंताजनक: यूक्रेन संकट, मुद्रास्फीति और ब्याज दरों से 60 हजार करोड़ रुपये बढ़ सकता है जोखिम वाला कर्ज
Mon, 25 Apr 2022 10:17 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Mon, 25 Apr 2022 10:17 PM IST
सार
रिपोर्ट के मुताबिक, अर्थव्यवस्था के समक्ष मौजूद इन समस्याओं के कारण वित्त वर्ष 2022-23 के आखिर तक जोखिम वाले कर्ज की मात्रा 6.9 लाख करोड़ रुपये हो जाएगी।
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भारतीय अर्थव्यवस्था
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से बढ़ी हुई मुद्रास्फीति, ब्याज दर को लेकर रिजर्व बैंक के सख्त रुख और कमजोर रुपये जैसे कारणों से जोखिम वाले कर्ज का आकार चालू वित्त वर्ष में 60,000 करोड़ रुपये बढ़ जाने की आशंका है। रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स ने सोमवार को अपनी एक रिपोर्ट में यह चेतावनी दी।
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रिपोर्ट के मुताबिक, अर्थव्यवस्था के समक्ष मौजूद इन समस्याओं के कारण वित्त वर्ष 2022-23 के आखिर तक जोखिम वाले कर्ज की मात्रा 6.9 लाख करोड़ रुपये हो जाएगी। अगर रूस-यूक्रेन जंग नहीं छिड़ती तो चालू वित्त वर्ष में जोखिम वाले कर्ज का अनुपात 6.3 लाख करोड़ रुपये ही रहता। जोखिम वाले कर्ज से रेटिंग एजेंसी का आशय कंपनियों के परिचालन लाभ के मद्देनजर लिए गए पांच गुना से अधिक कर्ज से है।
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रेटिंग एजेंसी ने 1,385 कंपनियों के विश्लेषण के आधार पर यह अनुमान जताया है। ऐसी स्थिति में उसने युद्ध के बाद के परिदृश्य में कंपनियों के लिए राजस्व वृद्धि अनुमान में कटौती करने के साथ ही जिंसों की ऊंची कीमतों के कारण लाभ मार्जिन में कमी का भी अनुमान लगाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में ब्याज दरों में एक प्रतिशत तक की वृद्धि और रुपये में 1-10 फीसदी की गिरावट आने से मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।
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एजेंसी ने कहा कि जिंसों की कीमतों में तेजी और ब्याज दरों में मजबूती का कंपनियों और विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय इकाइयों पर असमान असर पड़ सकता है। बड़े आकार वाली कंपनियां बहीखाते की अच्छी स्थिति, वित्तपोषण और मूल्य निर्धारण शक्ति तक आसान पहुंच के कारण लचीलापन दिखा पाएंगी, वहीं छोटी और मझोली कंपनियों को इन मुश्किलों से जूझना पड़ सकता है।