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UGC: यूजीसी के बहाने बढ़त लेने के मूड में सपा-बसपा, सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर टिकी भाजपा की नजर

Fri, 30 Jan 2026 07:31 PM IST
संध्या डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: संध्या Updated Fri, 30 Jan 2026 07:31 PM IST
सार

यूजीसी के फैसलों से भाजपा के चुनावी समीकरण प्रभावित हुए हैं, जिसका फायदा उठाने के लिए सपा और बसपा सक्रिय हो गई हैं। दोनों दल ब्राह्मण सहित सामान्य वर्ग के नाराज़ वोटरों को साधकर चुनावी बढ़त और पुराने राजनीतिक आधार को फिर से मजबूत करना चाहती हैं।

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UGC SP and BSP gain advantage using the UGC issue BJP focus on Supreme Court decision
UGC New Rule 2026 Row - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूजीसी ने जहां भाजपा के चुनावी समीकरण गड़बड़ा दिए हैं, वहीं सपा-बसपा दोनों ही इसका लाभ उठाने की कोशिश कर रही हैं। सपा-बसपा दोनों ही पार्टियों की नजर इस बार ब्राह्मण सहित सामान्य वोट बैंक पर है जो यूजीसी के कारण भाजपा से नाराज चल रहा है। सपा का आकलन है कि यदि सामान्य वर्ग का एक हिस्सा वोट भी उसके साथ वापस आ जाता है तो विधानसभा चुनाव में वह बढ़त हासिल कर सकती है। वहीं, प्रदेश में अपनी मजबूत वापसी के लिए कोशिश कर रही बसपा एक बार फिर ब्राह्मणों को साधकर 2007 का करिश्मा दोहराना चाहती है। 

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समाजवादी पार्टी इस समय हरिशंकर तिवारी के बेटे विनय शंकर तिवारी को आगे रखकर प्रदेश के ब्राह्मणों के बीच छोटी-छोटी बैठक कराकर अपने से जोड़ने की कोशिश कर रही है। माता प्रसाद पांडेय को नेता प्रतिपक्ष बनाकर भी उसने ब्राह्मणों को एक संदेश देने का काम किया है। अखिलेश यादव ने यूजीसी विवाद के बाद जिस तरह 'किसी के साथ भी अन्याय न होने' की बात कही है, उसे ब्राह्मणों सहित अन्य सामान्य वर्ग को साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। 

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ये इतिहास सपा के साथ

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आईपी सिंह ने अमर उजाला से कहा कि यूपी का अब तक का इतिहास रहा है कि जो लोकसभा चुनाव में बढ़त हासिल करता है, प्रदेश में उसकी सरकार बनती है। भाजपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव में बढ़त हासिल की थी, उसे 2017 में यूपी में सरकार बनाने का अवसर मिला। उसने 2019 के लोकसभा चुनाव में यूपी में बढ़त हासिल की और 2022 में भी सरकार बनाई। 

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लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी में भाजपा को झटका लगा, जबकि समाजवादी पार्टी ने शानदार बढ़त हासिल की। सपा ने कांग्रेस के साथ मिलकर यूपी की 43 सीटों पर जीत हासिल की। विधानसभा वार इस परिणाम का आकलन करें तो समाजवादी पार्टी को 235 विधानसभा सीटों पर साफ बढ़त मिलती हुई दिखाई देती है। यही कारण है कि सपा अपना प्रदर्शन बेहतर करने के लिए पीडीए वर्ग के साथ-साथ ब्राह्मणों और अन्य सामान्य वर्ग को साधने की कोशिश कर रही है। आईपी सिंह का दावा है कि इस बार समाजवादी पार्टी प्रदेश में सरकार बनाने में सफल रहेगी। 

समाजवादी पार्टी का अनुमान है कि यूजीसी विवाद के साथ-साथ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद से भी उसको लाभ हो सकता है।

बसपा को अपनी मजबूत वापसी का भरोसा

मायावती यूपी में एक बार फिर अपने पैरों पर खड़ी होने की पुरजोर कोशिश कर रही हैं। बसपा का अनुमान है कि यूजीसी विवाद बढ़ने पर ब्राह्मण मतदाता भाजपा से दूर छिटकते हैं तो वे उसके पास आ सकते हैं और उसके लिए 2007 का 'जिताऊ समीकरण' तैयार हो सकता है। सतीश चंद्र मिश्रा के नेतृत्व में बसपा ने एक बार फिर ब्राह्मणों को साधने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। यूजीसी विवाद ने पार्टी को नई उम्मीद देने का काम किया है।  

बसपा प्रवक्ता फैजान खान ने अमर उजाला से कहा कि उनकी नेता मायावती ने साफ कह दिया है कि किसी के साथ भी अन्याय नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर यह निर्णय किया गया होता तो आज यह तनाव की स्थिति पैदा न होती। उन्होंने कहा कि विभिन्न समाजों के बीच जो तनावपूर्ण माहौल बन रहा है, उसे हर हालत में टालने की कोशिश की जानी चाहिए। फैजान खान ने दावा किया कि उनकी नेता मायावती के नेृत्व में हर वर्ग को न्याय सुनिश्चित होगा। 

जानबूझकर संघर्ष बढ़ाने की कोशिश कर रही भाजपा- अजय कुमार लल्लू

उत्तर प्रदेश के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने आरोप लगाया कि भाजपा जानबूझकर एक संघर्ष की स्थिति पैदा करना चाहती है जिससे लोगों का असली मद्दों से ध्यान भटक जाए। उन्होंने कहा कि उनके नेता राहुल गांधी ओबीसी समुदाय की ज्यादा भागीदारी देने की बात करते हैं। उन्होंने ही जातिगत आरक्षण का मुद्दा उठाकर भाजपा को इस मुद्दे पर सामने आने के लिए मजबूर कर दिया। लेकिन भाजपा ओबीसी समुदाय को कुछ देना नहीं चाहती, लिहाजा वह लोगों के बीच तनाव बढ़ाकर कुछ करने से बचने की कोशिश कर रही है।   

अजय कुमार लल्लू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकारों ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में ओबीसी समुदाय को जो अधिकार दिए हैं, भाजपा उसे उन्हें नहीं देना चाहती। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर मुखर रहेगी और ओबीसी समुदाय का हित सुरक्षित करेगी। 

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का इंतजार - भाजपा

भाजपा अभी इस मुद्दे पर कुछ भी कहने से बचने की कोशिश कर रही है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने शुक्रवार को कहा कि यह मुद्दा सर्वोच्च न्यायालय के सामने विचाराधीन है। ऐसे में पार्टी इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहेगी। लेकिन उन्होंने कहा कि भाजपा किसी भी वर्ग के साथ कोई अन्याय नहीं होने देगी। 

 

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