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परीक्षाएं आयोजित कराए बगैर डिग्री देने पर राज्य निर्णय नहीं कर सकते :यूजीसी
Tue, 18 Aug 2020 10:27 PM IST
Amit Mandal
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Tue, 18 Aug 2020 10:27 PM IST
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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि छह जुलाई का उसका निर्देश कोई फरमान नहीं हैं जिसमें उसने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को 30 सितंबर तक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं आयोजित करने के लिए कहा है। साथ ही, यूजीसी ने यह भी कहा कि परीक्षाएं कराये बगैर डिग्री देने का निर्णय राज्य नहीं कर सकते हैं।
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यूजीसी की तरफ से पेश हुए सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा कि आयोग का निर्देश छात्रों के हित में है क्योंकि विश्वविद्यालयों को स्नात्कोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों के लिए नामांकन प्रारंभ करना है और राज्य के अधिकारी यूजीसी के दिशानिर्देशों की अवहेलना नहीं कर सकते हैं।
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पीठ में न्यायमर्ति आर. एस. रेड्डी और न्यायमूर्ति एम. आर. शाह भी शामिल हैं। अदालत ने कहा कि मुद्दा यह है कि अगर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने निर्णय किया है कि स्थिति परीक्षाएं आयोजित करने के अनुकूल नहीं हैं तो क्या वे यूजीसी की अवहेलना कर सकते हैं।
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पीठ ने इससे संबद्ध कई याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें यूजीसी के छह जुलाई के निर्देश पर सवाल उठाए गए हैं। पीठ ने कहा कि यह एक अन्य मुद्दा है कि क्या आयोग राज्य के अधिकारियों की अवहेलना कर सकता है और विश्वविद्यालयों को दी गई तारीख पर परीक्षाएं आयोजित कराने के लिए कह सकता है।
वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से हुई सुनवाई में मेहता ने पीठ से कहा कि राज्य निर्धारित किये गये समय को आगे बढ़ाने की मांग कर सकते हैं, लेकिन वे बिना परीक्षाओं के डिग्री दिए जाने पर निर्णय नहीं कर सकते हैं।