फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   two year old Pakistani child undergoes bone marrow transplant in Bengaluru

BMT: बेंगलुरु के डॉक्टर्स ने बचाई पाकिस्तान की दो साल की बच्ची की जान, सफल हुआ बोन मैरो ट्रांसप्लांट

Wed, 19 Oct 2022 04:51 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 19 Oct 2022 04:51 PM IST
सार

बच्ची का उपचार करने वाले डॉ. सुनील भट ने कहा कि म्यूकोपॉलीसेकेराइडोसिस एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर का एक एंजाइम गायब हो जाता है। उस एंजाइम की कमी के कारण रोगी के शरीर में बहुत सारे बदलाव होते हैं।

विज्ञापन
two year old Pakistani child undergoes bone marrow transplant in Bengaluru
मां के साथ अमायरा सिकंदर खान - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पाकिस्तान की एक दो साल की बच्ची का बेंगलुरु के एक अस्पताल में सफलतापूर्व बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) हुआ है। नारायणा हेल्थकेअर से कराची निवासी क्रिकेट कमेंटेटर सिकंदर बख्त की बेटी अमायरा सिकंदर खान म्यूकोपॉलीसेकेराइडोसिस टाइप 1 (एमपीएस-I) से ठीक हो गई हैं। 

विज्ञापन


शरीर के कई अंगों को प्रभावित करता है म्यूकोपॉलीसेकेराइडोसिस 
हेल्थकेयर चेन की अध्यक्ष देवी शेट्टी ने बुधवार को संवाददाताओं को बताया कि म्यूकोपॉलीसेकेराइडोसिस एक दुर्लभ स्थिति है जिसमें आंख और मस्तिष्क समेत कई अंगों के कामकाज की क्षमता प्रभावित होती है।  डॉक्टरों ने कहा कि अमायरा (2.6 वर्षीय) को उसके पिता के अस्थि मज्जा (बोन मैरो) का उपयोग करके बचाया गया, जो डोनर थे।
विज्ञापन


बच्ची का इलाज करने वाले डॉक्टर ने क्या कहा?
बच्ची का उपचार करने वाले डॉ. सुनील भट ने कहा कि म्यूकोपॉलीसेकेराइडोसिस एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर का एक एंजाइम गायब हो जाता है। उस एंजाइम की कमी के कारण रोगी के शरीर में बहुत सारे बदलाव होते हैं, यकृत और प्लीहा बड़ा हो जाता है, हड्डियों का आकार बदल जाता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

 
19 वर्ष की आयु तक विकलांग हो जाते हैं इस स्थिति में अधिकांश बच्चे
उन्होंने बताया कि ऐसी दुर्लभ स्थितियों वाले अधिकांश बच्चे 19 वर्ष की आयु तक विकलांग हो जाते हैं और अधिकांश अपने जीवन के दूसरे दशक में मर जाते हैं। तो  बोन मैरो ट्रांसप्लांट इसके लिए उचार के विकल्पों में से एक है।     

लड़की के नहीं भाई-बहन, नहीं मिला था कोई डोनर, फिर पिता..
डॉ. भट ने बताया, लड़की के कोई भाई-बहन नहीं थे। इसलिए हमें डोनर की तलाश की लेकिन को नहीं मिला। इसलिए हमने माता-पिता में से किसी एक को डोनर के रूप में इस्तेमाल करना चुना, जिसे हाफ-मैचेड डोनर ट्रांसप्लांट के रूप में जाना जाता है। 


ट्रांसप्लांट के चार महीनों बाद डॉक्टर्स ने पाया कि वह ठीक हो रही है और एंजाइम सामान्य होने लगे हैं। बच्ची की मां सदफ ने कहा कि उन्हें इस रोग के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने काफी जगह पता किया, बाद में डॉ. भट से संपर्क हुआ। उन्होंने कहा कि डॉक्टर और पैरा-मेडिकल टीम काफी मिलनसार थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed