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Manipur: हिंसा झेल चुके इस राज्य में चुनावी माहौल ही गायब, पार्टियों के बैनर-झंडे नदारद, जानें मौजूदा हाल
Sat, 06 Apr 2024 03:28 PM IST
काव्या मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Sat, 06 Apr 2024 03:28 PM IST
सार
मणिपुर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रदीप झा का कहना है कि चुनाव प्रचार गतिविधियों पर कोई आधिकारिक प्रतिबंध नहीं है, लेकिन पार्टी प्रतिनिधियों ने राज्य के हालात को बिगड़ने से बचाने के लिए यह कदम उठाया है।
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चुनाव अधिकारियों द्वारा लगाए गए होर्डिंग
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
हिंसा प्रभावित मणिपुर में लोकसभा चुनाव शुरू होने में दो सप्ताह से भी कम का समय रह गया है। फिर भी यहां की राजनीति में कोई हलचल नहीं है। राजनीतिक दलों के पोस्टर, बड़ी रैलियां और नेताओं की आवाजाही जैसा कुछ भी यहां नहीं देखा जा रहा है। यहां महज स्थानीय चुनाव अधिकारियों द्वारा लगाए गए होर्डिंग देखे जा सकते हैं, जिसमें नागरिकों से वोट डालने का आग्रह किया गया है।
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मणिपुर का दौरा करने से परहेज किया
देशभर में चुनाव के उत्साह के बीच पार्टी के प्रमुख नेताओं ने चुनाव प्रचार करने या चुनावी वादे करने के लिए मणिपुर का दौरा करने से परहेज किया है। जहां भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जैसी प्रमुख हस्तियों को स्टार प्रचारक बनाया है। वहीं कांग्रेस की ओर से सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य प्रमुख नेता प्रचार कर रहे हैं। हालांकि, इनमें से कोई भी अभी तक मणिपुर में नहीं दिखा है। बता दें, मणिपुर में 19 और 26 अप्रैल को दो चरणों में होने वाले लोकसभा चुनाव होने हैं।
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कोई आधिकारिक प्रतिबंध नहीं
मणिपुर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रदीप झा का कहना है कि चुनाव प्रचार गतिविधियों पर कोई आधिकारिक प्रतिबंध नहीं है, लेकिन पार्टी प्रतिनिधियों ने राज्य के हालात को बिगड़ने से बचाने के लिए यह कदम उठाया है। ऐसी किसी भी चीज की अनुमति दी जाएगी जो आदर्श आचार संहिता के दायरे में आती है।
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यह लोग हैं चुनावी मैदान में
हालांकि, राज्य में चुनावी मैदान में उतारे गए उम्मीदवार अपनी-अपनी जीत के लिए एक अनूठा समाधान लेकर आए हैं। भाजपा के थोनाओजम बसंत कुमार सिंह, कांग्रेस के अंगोमचा बिमोल अकोइजम, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के महेश्वर थोनाओजम और मणिपुर पीपुल्स पार्टी (एमपीपी) के राजमुकर सोमेंद्रो सिंह ने समाधान निकाला है। वे गैर-पारंपरिक तरीके से मतदाताओं तक पहुंच रहे हैं, जिसमें उनके आवास या पार्टी कार्यालयों में बैठकें आयोजित करना और उनके समर्थक डोर-टू-डोर प्रचार करना शामिल हैं।
ऐसे कर रहे प्रचार
घर-घर जाकर प्रचार के लिए स्वयंसेवकों की टीमों को तैनात करने वाले महेश्वर थौनाओजम ने कहा, 'बेहतर होता कि मैं जनसभाओं को संबोधित करता और रैलियां करता, लेकिन मैंने प्रचार अभियान को सादगी से रखने का फैसला किया है। मतदाताओं को राज्य के हालात के बारे में पता है। वह अपने वोट के महत्व को समझते हैं इसलिए वह उचित विकल्प चुनेंगे। '
राज्य के मौजूदा शिक्षा और कानून मंत्री बसंत कुमार सिंह, जो इस बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं, अपने आवास और पार्टी कार्यालय पर छोटी बैठकें कर रहे हैं। इसी तरह, दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अकोइजाम ज्यादातर अपने आवास पर लोगों से मिलते हैं।
राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के पोस्टर भी कांग्रेस कार्यालय में लगाए गए हैं। राज्य में भाजपा अध्यक्ष ए शारदा देवी ने कहा, 'हमारे लिए चुनाव महत्वपूर्ण हैं, लेकिन हम दिखावा करके लोगों के घावों पर नमक नहीं छिड़क सकते। चुनाव भी एक त्योहार की तरह है, लेकिन वर्तमान स्थिति के कारण हम जोर शोर से त्योहार नहीं मना सकते। लोग अपने घरों से दूर रह रहे हैं। हम चाहते हैं कि वे हम पर विश्वास करें, लेकिन हम प्रचार नहीं कर रहे हैं।'
पार्टी जोखिम नहीं उठाना चाहती
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि किसी भी तरह का जोरदार प्रचार राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति के लिए हानिकारक हो सकता है। अधिकारी ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा कि हालांकि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन किसी भी तरह का जोरदार प्रचार राज्य की कानून व्यवस्था के लिए नुकसानदेह हो सकता है और कोई भी पार्टी यह जोखिम नहीं उठाना चाहती।