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Transgender Doctors: तेलंगाना के दो किन्नर डॉक्टरों ने रचा इतिहास, सरकारी चिकित्सा सेवा में पाई नियुक्ति

Thu, 01 Dec 2022 11:54 AM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Thu, 01 Dec 2022 11:54 AM IST
सार

प्राची राठौड़ और रुत जॉन पॉल ने हाल ही में हैदराबाद के सरकारी उस्मानिया जनरल हॉस्पिटल (OGH) में चिकित्सा अधिकारी के रूप में प्रभार संभाला है। डॉ. प्राची राठौड़ को किन्नर होने के कारण तेलंगाना के एक सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल ने नौकरी से निकाल दिया था।

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Two transgender doctors script history, join govt service in Telangana
डॉ. रुत जॉन पॉल और डॉक्टर प्राची राठौड़ - फोटो : social media

विस्तार

निजी जीवन की तमाम चुनौतियों से निपटते हुए तेलंगाना के दो किन्नर डॉक्टरों (transgender doctors) ने इतिहास रचा है और मिसाल पेश की। उन्होंने फिर साबित किया है कि जहां चाह है, वहां राह है। ये दोनों राज्य के पहले किन्नर सरकारी चिकित्सक बन गए हैं। 

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प्राची राठौड़ और रुत जॉन पॉल ने हाल ही में हैदराबाद के सरकारी उस्मानिया जनरल हॉस्पिटल (OGH) में चिकित्सा अधिकारी के रूप में प्रभार संभाला है। डॉ. प्राची राठौड़ को किन्नर होने के कारण तेलंगाना के एक सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल ने नौकरी से निकाल दिया था। सरकारी सेवा में आने के मौके पर उन्होंने उस सामाजिक कलंक और भेदभाव को याद किया जिसे उन्हें बचपन से सहना पड़ा। 
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दिल्ली से हैदराबाद लौटना पड़ा
डॉ. प्राची ने आदिलाबाद मेडिकल कॉलेज से 2015 में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी। उनका कहना है कि आपकी सभी उपलब्धियों के बावजूद कलंक और भेदभाव पीछा नहीं छोड़ते। डॉ. प्राची ने बताया कि वह चिकित्सा की स्नातकोत्तर डिग्री पाने के लिए दिल्ली गई थीं, लेकिन प्रतिकूल माहौल के कारण उन्हें थक हार कर हैदराबाद लौटना पड़ा। इसके बाद डॉ. राठौड़ ने एक अस्पताल में काम करते हुए इमरजेंसी मेडिसिन में डिप्लोमा कर लिया। 
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डॉ. राठौड़ ने तीन साल तक हैदराबाद के सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल में काम किया, लेकिन ट्रांसजेंडर होने के कारण उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया, क्योंकि अस्पताल प्रबंधन को लगा कि उनके कारण मरीजों की संख्या कम हो रही है। आखिरकार एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) उनके समर्थन में आगे आया और राठौड़ ने एनजीओ द्वारा चलाए जा रहे क्लिनिक में काम किया। इसके बाद यह उस्मानिया अस्पताल में सरकारी नौकरी हासिल की।


बचपन में देखा था डॉक्टर बनने का सपना, पर यह डर सताता था
डॉ. प्राची ने बताया कि वह बड़ी होकर डॉक्टर बनने का सपना देखती थी, लेकिन 11वीं और 12 वीं कक्षा के दौरान यह चिंता सताती थी कि अन्य छात्रों द्वारा किया जाने वाला उत्पीड़न और बदमाशी से निपटूंगी। उन्होंने कहा कि असल में डॉक्टर बनने के बारे में सोचने से ज्यादा बड़ा मुद्दा यह था कि कैसे अपना बचाव किया जाए। कलंक व भेदभाव से कैसे पार पाया जाए।

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