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Wayanad: इन दो जगहों पर भूस्खलन पीड़ितों के लिए बनाया जाएगा टाउनशिप, केरल के मंत्री ने दी जानकारी
Fri, 30 Aug 2024 08:42 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: पवन पांडेय
Updated Fri, 30 Aug 2024 08:42 PM IST
सार
केरल सरकार ने सभी बचे हुए लोगों को राज्य की तरफ से संचालित छात्रावासों और भवनों में रखा है। अधिकारियों ने कहा कि कुछ लोग अपने रिश्तेदारों के साथ रह रहे हैं। वायनाड भूस्खलन के बाद से अब तक कुल 448 शव और शरीर के अंग बरामद किए गए हैं, जिनमें से 178 की पहचान हो चुकी है। कुल 58 व्यक्तियों वाले 17 परिवारों में कोई भी जीवित नहीं बचा है।
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केरल के राजस्व और आवास मंत्री के. राजन
- फोटो : ANI
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विस्तार
केरल सरकार ने वायनाड भूस्खलन आपदा के पीड़ितों के लिए 'सामुदायिक जीवन शैली' वाली टाउनशिप बनाने के लिए दो जगहों का चयन कर लिया है। मामले में राजस्व और आवास मंत्री के राजन ने शुक्रवार को कहा 30 जुलाई को हुई भीषण आपदा में इस दर्शनीय पर्यटन स्थल जिले के तीन गांव - पुंचिरिमट्टम, चूरलमाला और मुंडक्कई पूरी तरह से नष्ट हो गए थे, जिसमें 200 से अधिक लोगों की जान चली गई थी।
कोट्टापडी और कलपेट्टा को चुना गया- के. राजन
मंत्री राजन ने कहा, हमने कोट्टापडी और कलपेट्टा को दो जगहों के रूप में चुना है, जहां भूस्खलन से प्रभावित लोगों को सामुदायिक जीवन शैली वाली टाउनशिप में पूरी तरह से पुनर्वासित किया जाएगा। केरल सचिवालय में अपने कार्यालय में उन्होंने कहा कि हम केवल बचे हुए लोगों को घर उपलब्ध कराकर उनका पुनर्वास नहीं कर रहे हैं, बल्कि हमारा उद्देश्य उन्हें नौकरी और शिक्षा के साथ एक समग्र जीवन सुनिश्चित करना भी है।
पूर्ण सुविधा क्षेत्र होंगे दोनों जगह- मंत्री
कोट्टप्पाडी आपदा स्थल से लगभग 11 किलोमीटर दूर है, जबकि कलपेट्टा - वायनाड का जिला मुख्यालय - लगभग 35 किलोमीटर दूर है। मंत्री ने आगे कहा कि टाउनशिप को इस विचार के साथ विकसित किया जाएगा कि ये केवल घर नहीं होंगे, बल्कि अस्पताल, सार्वजनिक सुविधाएं, सामुदायिक केंद्र, प्राथमिक विद्यालय आदि समेत पूर्ण सुविधा क्षेत्र होंगे।
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मैंने ऐसी त्रासदी कभी नहीं देखी- राजन
मंत्री ने कहा, मैंने अपने 50 साल के जीवन में ऐसी त्रासदी कभी नहीं देखी। मैं उस दर्द की कल्पना नहीं कर सकता, जिससे वायनाड के लोग गुजरे हैं। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों ने उन्हें बताया है कि दो घातक भूस्खलन उस दिन 1,782 फीट की ऊंचाई पर हुए, जिसके कारण गायत्री नदी में पानी का तेज बहाव आया, जिससे बड़े-बड़े पत्थर, पेड़ के तने और बजरी बहकर प्रभावित गांवों में आ गई।
वहीं मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने गुरुवार को एक सर्वदलीय बैठक में प्रभावित परिवारों के लिए 1,000 वर्ग फीट के एक मंजिला मकान बनाने की अपनी सरकार की योजना के बारे में बताया, जिसमें दो मंजिला मकान बनाने का विकल्प भी शामिल है।
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कोट्टापडी और कलपेट्टा को चुना गया- के. राजन
मंत्री राजन ने कहा, हमने कोट्टापडी और कलपेट्टा को दो जगहों के रूप में चुना है, जहां भूस्खलन से प्रभावित लोगों को सामुदायिक जीवन शैली वाली टाउनशिप में पूरी तरह से पुनर्वासित किया जाएगा। केरल सचिवालय में अपने कार्यालय में उन्होंने कहा कि हम केवल बचे हुए लोगों को घर उपलब्ध कराकर उनका पुनर्वास नहीं कर रहे हैं, बल्कि हमारा उद्देश्य उन्हें नौकरी और शिक्षा के साथ एक समग्र जीवन सुनिश्चित करना भी है।
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पूर्ण सुविधा क्षेत्र होंगे दोनों जगह- मंत्री
कोट्टप्पाडी आपदा स्थल से लगभग 11 किलोमीटर दूर है, जबकि कलपेट्टा - वायनाड का जिला मुख्यालय - लगभग 35 किलोमीटर दूर है। मंत्री ने आगे कहा कि टाउनशिप को इस विचार के साथ विकसित किया जाएगा कि ये केवल घर नहीं होंगे, बल्कि अस्पताल, सार्वजनिक सुविधाएं, सामुदायिक केंद्र, प्राथमिक विद्यालय आदि समेत पूर्ण सुविधा क्षेत्र होंगे।
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मैंने ऐसी त्रासदी कभी नहीं देखी- राजन
मंत्री ने कहा, मैंने अपने 50 साल के जीवन में ऐसी त्रासदी कभी नहीं देखी। मैं उस दर्द की कल्पना नहीं कर सकता, जिससे वायनाड के लोग गुजरे हैं। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों ने उन्हें बताया है कि दो घातक भूस्खलन उस दिन 1,782 फीट की ऊंचाई पर हुए, जिसके कारण गायत्री नदी में पानी का तेज बहाव आया, जिससे बड़े-बड़े पत्थर, पेड़ के तने और बजरी बहकर प्रभावित गांवों में आ गई।
वहीं मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने गुरुवार को एक सर्वदलीय बैठक में प्रभावित परिवारों के लिए 1,000 वर्ग फीट के एक मंजिला मकान बनाने की अपनी सरकार की योजना के बारे में बताया, जिसमें दो मंजिला मकान बनाने का विकल्प भी शामिल है।