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संसदीय समिति के सामने ट्विटर के सीईओ और अधिकारियों ने पेश होने से किया इनकार
Sat, 09 Feb 2019 03:05 PM IST
Shani Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shani Mishra
Updated Sat, 09 Feb 2019 03:05 PM IST
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ट्विटर के सीईओ और शीर्ष अधिकारियों ने संसदीय समिति के समक्ष उपस्थित होने से इनकार कर दिया है।
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर की अगुवाई वाली कमेटी ने एक फरवरी को ट्विटर को समन जारी किया था। संसदीय दल की बैठक सात फरवरी को होनी थी मगर ट्विटर के सीईओ जैक डॉर्सी और अन्य अधिकारियों के अनुपलब्ध रहने की वजह से 11 फरवरी के लिए टाल दिया है। ट्विटर ने कहा कि भारत की यात्रा करने में दस दिन का समय लगेगा फिर भी सुनावाई इतनी जल्दी की जा रही है।
संस्थान को एक फरवरी को भेजा पत्र संसदीय कमेटी ने साफ तौर ट्विटर के सीईओ को पेश होने को कहा गया था। साथ ही यह भी कहा गया था कि उन्हें अन्य अधिकारियों के साथ भी पेश होना पड़ सकता है। संसदीय कमेटी को ट्विटर के कानूनी मामलों के प्रमुख ने एक पत्र भेजा गया था जिसमें कहा गया था कि ट्विटर इंडिया के लिए काम करने वाला कोई भी व्यक्ति भारत में सामग्री और खाते से जुड़े हमारे नियमों के संबंध में कोई प्रभावी फैसला नहीं करता है। भारतीय संसदीय समिति के सामने ट्विटर के प्रतिनिधित्व के लिए किसी छोटे कर्मचारी को भेजना भारतीय नीति निर्माताओं को अच्छा नहीं लगा, खासकर ऐसे में जब उनके पास निर्णय लेने का कोई अधिकार नहीं है।
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भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर की अगुवाई वाली कमेटी ने एक फरवरी को ट्विटर को समन जारी किया था। संसदीय दल की बैठक सात फरवरी को होनी थी मगर ट्विटर के सीईओ जैक डॉर्सी और अन्य अधिकारियों के अनुपलब्ध रहने की वजह से 11 फरवरी के लिए टाल दिया है। ट्विटर ने कहा कि भारत की यात्रा करने में दस दिन का समय लगेगा फिर भी सुनावाई इतनी जल्दी की जा रही है।
संस्थान को एक फरवरी को भेजा पत्र संसदीय कमेटी ने साफ तौर ट्विटर के सीईओ को पेश होने को कहा गया था। साथ ही यह भी कहा गया था कि उन्हें अन्य अधिकारियों के साथ भी पेश होना पड़ सकता है। संसदीय कमेटी को ट्विटर के कानूनी मामलों के प्रमुख ने एक पत्र भेजा गया था जिसमें कहा गया था कि ट्विटर इंडिया के लिए काम करने वाला कोई भी व्यक्ति भारत में सामग्री और खाते से जुड़े हमारे नियमों के संबंध में कोई प्रभावी फैसला नहीं करता है। भारतीय संसदीय समिति के सामने ट्विटर के प्रतिनिधित्व के लिए किसी छोटे कर्मचारी को भेजना भारतीय नीति निर्माताओं को अच्छा नहीं लगा, खासकर ऐसे में जब उनके पास निर्णय लेने का कोई अधिकार नहीं है।
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