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पंजाब कांग्रेस: कैप्टन 'मजबूरी' तो सिद्धू भी हैं 'जरूरी', दोनों के साथ समाधान चाहती है कांग्रेस

Wed, 23 Jun 2021 06:55 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 23 Jun 2021 06:55 PM IST
सार

कांग्रेस यही संदेश पंजाब के अपने दोनों शीर्ष नेताओं को दे रही है। कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए साफ संदेश हैं कि वह पंजाब में पार्टी की मौजूदा राजनीतिक समस्या का समाधान अपने स्तर से करके ठोस फॉर्मूले के साथ दिल्ली आएं...

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Tussle between Navjot singh sidhu and Capt amrinder singh still going on, Rahul gandhi asked them for concrete solution
राहुल गांधी, नवजोत सिंह सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर सिंह - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पार्टी की कार्यवाहक अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मिलने दिल्ली आए थे, लेकिन मुलाकात का मौका न मिल पाने के बाद चंडीगढ़ लौट गए। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और अन्य वरिष्ठ नेता लगातार पंजाब कांग्रेस के नेताओं, विधायकों, मंत्रियों से मुलाकात कर रहे हैं। पंजाब के प्रभारी हरीश रावत, कमेटी के सदस्य और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जु्न खड़गे लगातार समस्या का हल ढूंढने में लगे हैं। अभी कांग्रेस लगातार यही संदेश दे रही है कि उसके लिए पंजाब में जहां कैप्टन अमरिंदर सिंह मजबूरी हैं, वहीं नवजोत सिंह सिद्धू जरूरी हैं।

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कांग्रेस यही संदेश पंजाब के अपने दोनों शीर्ष नेताओं को दे रही है। कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए साफ संदेश हैं कि वह पंजाब में पार्टी की मौजूदा राजनीतिक समस्या का समाधान अपने स्तर से करके ठोस फॉर्मूले के साथ दिल्ली आएं। यही संदेश नवजोत सिंह सिद्धू के लिए भी है कि वह गलत समय पर गलत बयानबाजी न करें और पार्टी की मर्यादा तथा उसके फोरम के महत्व को समझें। कैप्टन ने सिद्दू के दो परिवारों पर केंद्रित बयान को लेकर गहरी नाराजगी जताई है। कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को भी परिवारवाद की राजनीति को टारगेट करता बयान चुभ रहा है। हरीश रावत ने खुद इसे गलत समय पर दिया गया बयान बताया और राहुल गांधी से मिलने के बाद कहा कि सिद्धू का बयान कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के संज्ञान में है। समझा जा रहा है कि जल्द ही सिद्धू से भी कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व बात करेगा।

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राहुल गांधी ने दिया संदेश, पार्टी और उसके महत्व को समझें नेता

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पंजाब के तमाम नेताओं से मुलाकात की। अभी यह सिलसिला लगातार चल रहा है। प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़, वित्त मंत्री मनप्रीत बादल से भी राहुल ने चर्चा की है। सुखविंदर सिंह सरकारिया, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, परगट सिंग, संगत सिंग गिलजियां, रजिया सुल्ताना, सुखजिंदर सिंह रंधावा, कुशल दीप ढिल्लो, सांसद अमर सिंह समेत अन्य ने राहुल से भेंट और चर्चा की। रवनीत सिंह बिट्टू से भी मंत्रणा की। इस भेंट मुलाकात की चर्चा के दौरान राहुल गांधी कुछ नाराज भी हुए। उन्होंने पार्टी के नेताओं को इसके फोरम और महत्व को समझने, याद रखने की भी नसीहत दी। प्रताप सिंह बाजवा राहुल गांधी के प्रिय नेताओं में गिने जाते हैं। राहुल गांधी ने पंजाब के नेताओं से एक बार फिर अपील की कि वह निजी हित और आपसी मतभेद के बजाय पार्टी के हित में काम करें। वैसे भी पंजाब विधानसभा चुनाव 2023 में प्रस्तावित हैं। इसमें एक साल का समय बचा है। यह समय तैयारियों और जनता के बीच में विश्वास बढ़ाने का है।

कैप्टन को झुकना मंजूर नहीं

पंजाब में लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, गुरुदासपुर, होशियारपुर हर जगह नेताओं से चर्चा कीजिए तो दो ही बातें सुनने को मिल रही हैं। पहली यह कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह बिना किसी तरह की कमजोरी जाहिर किए सिद्धू या नाराज नेताओं को समायोजित करने के पक्ष में हैं। कैप्टन समर्थक धड़ा चाहता है कि 2023 का विधानसभा चुनाव कैप्टन के नेतृत्व में लड़ा जाए। यह सवाल राहुल गांधी मिलने वालों से भी उठाते हैं। वह साफ पूछते हैं कि 2017 के चुनाव में आप लोगों ने ही कैप्टन को चेहरा बनाने की वकालत की थी और अब विरोध कर रहे हैं? कांग्रेस हाईकमान द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति ने भी आगामी विधानसभा चुनाव कैप्टन के नेतृत्व में ही लड़ने की सिफारिश की है।

दूसरी चर्चा यह है कि नवजोत सिंह सिद्धू को यदि कांग्रेस नहीं संभाल पाई, तो वह आम आदमी पार्टी में जा सकते हैं। हालांकि तीन सदस्यीय समिति ने जितनी जरूरत कैप्टन की बताई है, उतना ही महत्व पार्टी के लिए सिद्धू को भी दिया है। सिद्धू चाहते हैं कि उन्हें पंजाब प्रदेश कांग्रेस की जिम्मेदारी दे दी जाए। राज्य सरकार में उपमुख्यमंत्री बना दिया जाए। कैप्टन और उनके खेमे को यह दोनों ही स्थितियां मंजूर नहीं है। कैप्टन का मानना है कि उपमुख्यमंत्री जैसी कोई चीज नहीं होती। गृह, वित्त जैसे विभाग छोड़कर वह सिद्धू को किसी भी विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाने को तैयार हैं। सिद्धू के करीबी दो-तीन चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल करने में भी आपत्ति नहीं है। इसी नाक की लड़ाई़ में पंजाब की कांग्रेसी लड़ाई उलझी है।

पार्टी के रणनीतिकारों का कहना है कि पार्टी के हित में सबको झुकना पड़ेगा। थोड़ा कैप्टन अमरिंदर सिंह को स्थितियों को समझना पड़ेगा और थोड़ा नवजोत सिंह सिद्धू को पार्टी के हित को ध्यान में रखना होगा। परगट सिंह, बाजवा, सुनील जाखड़ को भी कांग्रेस के पार्टी के हितों को अहमियत देनी पड़ेगी। एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि समस्या पेचीदा है, लेकिन बहुत मुश्किल भी नहीं है। जल्द सुलझा ली जाएगी।

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