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तुषार मेहता की सुप्रीम कोर्ट से अपील: न्यायमित्र की हो भूमिका तय, वे सरकार नहीं चला सकते
Thu, 18 Mar 2021 03:49 AM IST
Kuldeep Singh
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Thu, 18 Mar 2021 03:49 AM IST
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Solicitor General Tushar Mehta
- फोटो : फाइल फोटो
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि एक रेखा खींची जानी चाहिए कि किस हद तक न्याय मित्र (अमाइकस क्यूरी) कोर्ट की सहायता कर सकते हैं। जस्टिस एन वी रमन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मेहता ने कहा, हम दशकों से न्याय मित्र की भूमिका को देख रहे हैं।
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उनकी भूमिका और दायरे को अदालत द्वारा तय किया जाना चाहिए। वे सरकार को नहीं चल सकते। हालांकि वह किसी व्यक्ति विशेष पर उसकी भूमिका को लेकर सवाल नहीं उठा रहे हैं। मेहता ने ये बातें मणिपुर में पुलिस व सशस्त्र बलों के द्वारा कथित तौर पर फर्जी एनकाउंटर करने से संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कही।
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दरअसल, सुप्रीम कोर्ट कथित फर्जी एनकाउंटर की जांच कर रही एसआईटी के सदस्य को मुक्त करने के मसले पर सुनवाई कर रही थी। मेहता ने कहा कि इस मामले में न्याय मित्र को कुछ नहीं कहना चाहिए। इस पर पीठ ने कहा कि अदालत ने न्याय मित्र नियुक्त किया है।
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इस पर मेहता ने कहा, न्याय मित्र से तब सहायता ली जाती है जब अदालत उससे सहयोग मांगती है। वह सीबीआई प्रशासन को नहीं चला सकते। अदालत कर सकती है वे नहीं। वह इस मामले को लेकर बात नहीं कर रहे हैं यह हर दिन किसी न किसी मामले में होता है।
कानूनी सवाल पर अलग-अलग राय होने पर न्यायालय मित्र का सिद्धांत आया था। इसका यह उद्देश्य कतई नहीं था कि ऐसा किया जाना चाहिए या ऐसा नहीं किया जाना चाहिए। बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट ने एसएसपी महेश भारद्वाज को एसआईटी से मुक्त करने की इजाजत दे दी।