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TB: जल्द शुरू होगा टीबी वैक्सीन का बड़े पैमाने पर ट्रायल, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन करेगी फंडिंग
Sat, 27 Jan 2024 12:36 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Sat, 27 Jan 2024 12:36 PM IST
सार
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनियाभर में टीबी से मरने वाले लोगों की संख्या कोविड-19 के बाद सबसे ज्यादा है। टीबी की बीमारी सभी उम्र के लोगों को हो सकती है और इससे बचाव भी संभव है।
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बिल और मेलिंडा गेट्स
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
टीबी की नई वैक्सीन के बड़े पैमाने पर ट्रायल जल्द शुरू होंगे। बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन इस ट्रायल की फंडिंग करेगी। फाउंडेशन के सीईओ मार्क सुजमैन ने इसकी पुष्टि की है। बीते 100 सालों में नई टीबी वैक्सीन का बड़े पैमाने पर यह पहला ट्रायल होगा। मार्क सुजमैन ने बताया कि उनके फाउंडेशन ने इस ट्रायल के लिए फंडिंग देने का फैसला किया है क्योंकि निजी कंपनियों इसके लिए निवेश नहीं कर रही हैं।
अरबों डॉलर खर्च करेगी गेट्स फाउंडेशन
मार्क सुजमैन ने कहा कि 'हम ट्रायल पर सैंकड़ों करोड़ डॉलर खर्च करेंगे। जिन लोगों को टीबी की बीमारी है, वह अधिकतर गरीब लोग हैं और वह इलाज के लिए पैसे खर्च नहीं कर सकते।' सुजमैन ने कहा कि 'अगर यह ट्रायल सफल रहता है तो इसका सबसे ज्यादा फायदा भारत को मिलेगा। भारत में टीबी के सबसे ज्यादा मरीज हैं।' जून 2023 में वेलकम फाउंडेशन और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने टीबी की वैक्सीन एम72 को विकसित करने के लिए फंडिंग करने का एलान किया था। बीते 100 सालों में यह टीबी की पहली वैक्सीन हो सकती है। अभी टीबी की एकमात्र वैक्सीन बीसीजी है, जिसे पहली बार साल 1921 में लगाया गया था। उसके बाद अब टीबी वैक्सीन के ट्रायल शुरू हो रहे हैं। ट्रायल पर गेट्स फाउंडेशन, वेलकम फाउंडेशन के साथ मिलकर करीब 550 मिलियन डॉलर खर्च करेगी। सैंकड़ों करोड़ डॉलर खर्च करेगी।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनियाभर में टीबी से मरने वाले लोगों की संख्या कोविड-19 के बाद सबसे ज्यादा है। टीबी की बीमारी सभी उम्र के लोगों को हो सकती है और इससे बचाव भी संभव है। टीबी में मरीज के फेफड़ों में बैक्टीरिया का संक्रमण हो जाता है। टीबी मरीज के संपर्क में आने से यह संक्रमण होने का खतरा होता है। केंद्र सरकार भी टीबी उन्मूलन के लिए कार्यक्रम चला रही है। सरकार ने साल 2025 तक भारत को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा है।
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सरकार भी टीबी उन्मूलन के खिलाफ चला रही योजना
सरकार ने साल 2022 में सरकार ने नि-क्षय मित्र कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत सरकार टीबी मरीजों की जांच, उन्हें पोषण और वॉकेशनल सपोर्ट देने का काम कर रही है। इसके लिए सरकार कई एनजीओ के साथ मिलकर काम कर रही है। इस योजना का असर दिख भी रहा है और साल 2014 में जहां भारत में टीबी के 15.5 लाख मरीज रजिस्टर हुए थे। साल 2022 में यह आंकड़ा बढ़कर 24.22 लाख हो गया था।
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अरबों डॉलर खर्च करेगी गेट्स फाउंडेशन
मार्क सुजमैन ने कहा कि 'हम ट्रायल पर सैंकड़ों करोड़ डॉलर खर्च करेंगे। जिन लोगों को टीबी की बीमारी है, वह अधिकतर गरीब लोग हैं और वह इलाज के लिए पैसे खर्च नहीं कर सकते।' सुजमैन ने कहा कि 'अगर यह ट्रायल सफल रहता है तो इसका सबसे ज्यादा फायदा भारत को मिलेगा। भारत में टीबी के सबसे ज्यादा मरीज हैं।' जून 2023 में वेलकम फाउंडेशन और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने टीबी की वैक्सीन एम72 को विकसित करने के लिए फंडिंग करने का एलान किया था। बीते 100 सालों में यह टीबी की पहली वैक्सीन हो सकती है। अभी टीबी की एकमात्र वैक्सीन बीसीजी है, जिसे पहली बार साल 1921 में लगाया गया था। उसके बाद अब टीबी वैक्सीन के ट्रायल शुरू हो रहे हैं। ट्रायल पर गेट्स फाउंडेशन, वेलकम फाउंडेशन के साथ मिलकर करीब 550 मिलियन डॉलर खर्च करेगी। सैंकड़ों करोड़ डॉलर खर्च करेगी।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनियाभर में टीबी से मरने वाले लोगों की संख्या कोविड-19 के बाद सबसे ज्यादा है। टीबी की बीमारी सभी उम्र के लोगों को हो सकती है और इससे बचाव भी संभव है। टीबी में मरीज के फेफड़ों में बैक्टीरिया का संक्रमण हो जाता है। टीबी मरीज के संपर्क में आने से यह संक्रमण होने का खतरा होता है। केंद्र सरकार भी टीबी उन्मूलन के लिए कार्यक्रम चला रही है। सरकार ने साल 2025 तक भारत को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा है।
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सरकार भी टीबी उन्मूलन के खिलाफ चला रही योजना
सरकार ने साल 2022 में सरकार ने नि-क्षय मित्र कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत सरकार टीबी मरीजों की जांच, उन्हें पोषण और वॉकेशनल सपोर्ट देने का काम कर रही है। इसके लिए सरकार कई एनजीओ के साथ मिलकर काम कर रही है। इस योजना का असर दिख भी रहा है और साल 2014 में जहां भारत में टीबी के 15.5 लाख मरीज रजिस्टर हुए थे। साल 2022 में यह आंकड़ा बढ़कर 24.22 लाख हो गया था।