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सात दिन में 18 खुदकुशी: तीन लाख छात्रों की उत्तरपुस्तिका की दोबारा होगी जांच

Thu, 25 Apr 2019 10:40 AM IST
Shilpa Thakur न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Thu, 25 Apr 2019 10:40 AM IST
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TSBIE Result: 18 Students commit suicide in seven days over bad result
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pexels.com

तेलंगाना बोर्ड ऑफ इंटरमीडिएट एजुकेशन (टीएसबीआईई) के परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद से अब तक 18 छात्र आत्महत्या कर चुके हैं। बोर्ड ने कक्षा 11वीं और 12वीं के परिणाम 18 अप्रैल को जारी किए थे। 


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छात्र समूहों और माता-पिता के विरोध प्रदर्शन करने के बाद बुधवार को राज्य सरकार ने उन तीन लाख बच्चों की उत्तरपुस्तिकाएं दोबारा जांच करने का आदेश दिया है, जिन्हें फेल किया गया है। इस साल कुल 9.74 लाख छात्रों ने परीक्षा दी। जिनमें से 3.28 लाख छात्र फेल किए गए और अब इनकी उत्तरपुस्तिकाओं की दोबारा जांच की जाएगी। 

यहां राज्य सरकार ने परीक्षा नामांकन और परिणामों की प्रक्रिया का कॉन्ट्रैक्ट एक निजी कंपनी को दिया था। अब छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि कंपनी सिस्टम ने हजारों छात्रों को गलती से फेल कर दिया है। और उन्हें परीक्षा में मौजूद होने के बावजूद भी अनुपस्थित दिखाया।
 
जिन छात्रों ने खुदकुशी की है, उनमें से एक नागेंद्र भी था। नागेंद्र ने अपने घर में फांसी लगा ली क्योंकि वह गणित में फेल हो गया था। नाग्रेंद्र के पिता जी. विवेकानंद का कहना है कि उन्हें भी यकीन नहीं हुआ था, जब नागेंद्र गणित में फेल हुआ। क्योंकि यह उसका पसंदीदा विषय था। लेकिन किसी ने ये नहीं सोचा था कि वो अपनी जान ले लेगा। वहीं वी वेनेल्ला नामक छात्र ने 18 अप्रैल को ही कीटनाशक खाकर अपनी जान ले ली। वह दो विषयों में फेल हो गया था। 

तेलंगाना पेरेंट असोसिएशन के अध्यक्ष एन नारायण का कहना है कि मूल्यांकन प्रणाली में तकनीकी गड़बड़ी होने के कारण मेधावी छात्रों को कुछ विषयों में 5 और 10 नंबर मिले। वहीं हजारों छात्रों को परीक्षा देने के बजाय भी अनुपस्थित बताया गया है।

जब परीक्षा के परिणाम घोषित हुए तो कंपनी ने भी तकनीकी गड़बड़ी वाली बात स्वीकार की। लेकिन ये भी कहा कि सुधार कर लिया गया है। लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि पूरी प्रक्रिया में ही गड़बड़ी हुई है। बेशक कंपनी अपनी गलती अब ठीक करे, लेकिन उसकी इस चूक के कारण कई बच्चे अपनी जान ले चुके हैं।

अभिभावकों में से एक विशुवर्धन रेड्डी ने कहा, "जिन छात्रों ने कक्षा 11वीं में 95 फीसदी अंक हासिल किए थे, उन्हें 12वीं में फेल कर दिया गया। हम समझ सकते हैं अगर बच्चे पहले से कम अंक लाएं, लेकिन एक और उससे अधिक विषयों में फेल हो जाने से सवाल खड़े होते हैं।"

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