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कोरोना के संकट में काढ़े को अपनी ताकत बना रहा उत्तराखंडः त्रिवेंद्र सिंह रावत

Sun, 24 May 2020 08:36 AM IST
संजीव कुमार झा डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: संजीव कुमार झा Updated Sun, 24 May 2020 08:36 AM IST
सार

  • उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से अमर उजाला डॉट कॉम (www.amarujala.com) की विशेष बातचीत
  • कोरोना काल के संकट को वरदान बनाने में जुटा पर्वतीय राज्य उत्तराखंड, पर्यटन और जड़ी-बूटी की खेती से बनना चाहता है विशेष आर्थिक ताकत

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Trivendra singh rawat interview with amar ujala, says,Uttrakhand is increasing immunity by kadha in corona crisis
trivendra singh rawat(file photo)

विस्तार

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि कोरोना काल में उपजी आपदा से पूरा देश परेशान है, लेकिन हमें इस संकट में भी आगे बढ़ने की संभावनाएं तलाशनी हैं। उत्तराखंड भी पर्यटन और औषधीय वनस्पतियों की खेती के जरिए अपने विकास की संभावनाएं तलाश रहा है। इस दौरान राज्य के 13 जिलों में 13 विशेष पर्यटन केंद्र विकसित किए जा रहे हैं जहां देश-दुनिया के पर्यटक अपनी रुचि के विषयों से संबंधित स्थलों का पर्यटन कर सकेंगे। इससे राज्य के आर्थिक विकास को बल मिलेगा। 

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उन्होंने कहा कि राज्य अपने प्रवासी मजदूरों को वापस लाने और उनकी पूरी देखरेख के लिए कई योजनाएं बनाकर आगे बढ़ रहा है। कोरोना काल में रोग प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाने के लिए काढ़े का उपयोग वैश्विक स्तर पर बढ़ा है। उत्तराखंड इससे संबंधी जड़ी-बूटियों की खेती को बढ़ावा देकर इस संभावना का पूरा उपयोग करने की राह पर आगे बढ़ रहा है।
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अमर उजाला डॉट कॉम (www.amarujala.com) से शनिवार को विशेष बात करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि कोरोना काल में राज्य को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है। राज्य का अनुमान है कि इससे उसे चार हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। लेकिन इस समस्या के बीच भी वह आगे बढ़ने और विकास की राह निकालने की राह खोज रहा है।
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उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश की अध्यात्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र रहा है। वह अपनी इस क्षमता का पूरा उपयोग करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। इस कोरोना काल में जब पर्यटक बाहर नहीं निकल रहे हैं, चारधाम स्थानम केंद्र के संतों ने भक्तों को ऑनलाइन पूजा कराने और आरती में शामिल होने का विकल्प दिया है। इससे लोगों की धार्मिक भावनाओं की पूर्ति हो सकेगी।

प्रवासियों की पूरी सुरक्षा का ख्याल रख रहा राज्य

अमर उजाला के इस सवाल पर कि उत्तराखंड सरकार अपने प्रवासी श्रमिकों को वापस लाने की क्या व्यवस्था कर रहा है, मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के लगभग हर राज्य से उत्तराखंड के लोगों को लाने का अभियान चलाया जा रहा है। अब तक अनेक राज्यों से दो लाख लोगों को लाया जा चुका है जबकि कुछ जगहों से उन्हें लाया जाना अभी भी जारी है। 

प्रवासियों को लाने के बाद स्क्रीनिंग कर उन्हें उनके घर के बेहद करीब क्वारंटीन में रखा जा रहा है और ग्राम प्रधानों के जरिए उनका क्वारंटीन पूरा कराया जा रहा है। इससे राज्य में कोरोना संक्रमण फैलने की संभावना पैदा नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 50 हेक्टेयर में पिथोरागढ़ में विशेष ट्यूलिप गार्डेन विकसित कर रहा है जो अपनेआप में विशेष होगा। टिहरी झील को 1200 करोड़ रुपये की लागत से पर्यटन के लिए विकसित किया जा रहा है। 


इसी प्रकार हॉर्टीकल्चर विकसित करने पर भी काम चल रहा है। राज्य के चीड़ के पेड़ों से बिजली उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन कदमों से राज्य का आर्थिक विकास किया जा रहा है। 

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