त्रिपुरा: जनजातीय संगीत वाद्ययंत्र वादक और पद्मश्री थांगा डारलोंग का निधन
मुख्यमंत्री साहा ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, महान रोसम वादक पद्मश्री थांगा डारलोंग के निधन से मुझे गहरा दुख हुआ है। उनके निधन से राज्य के सांस्कृतिक जगत में एक अपूरणीय क्षति हुई है। डारलोंग का जन्म 20 जुलाई 1920 को त्रिपुरा के मुरुई गांव में हुआ था...
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जाने-माने और लोकप्रिय आदिवासी संगीतकार पद्मश्री थंगा डारलोंग, जो त्रिपुरा के स्वदेशी आदिवासी संगीत वाद्ययंत्र रोजम (स्वदेशी वाद्ययंत्र रोजम बांस से बना बांसुरी जैसा एक वाद्ययंत्र) बजाने में महारत रखने) के आखिरी वादक थे, का रविवार को उनाकोटी जिले में उनके आवास पर निधन हो गया। वह 103 वर्ष के थे। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने उनके निधन पर गहरा शोक जताया है।
जानकारी के मुताबिक संगीतकार अस्वस्थ थे और 15 नवंबर को उन्हें वृद्धावस्था संबंधी बीमारियों के कारण उनाकोटि जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मुख्यमंत्री साहा ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, महान रोसम वादक पद्मश्री थांगा डारलोंग के निधन से मुझे गहरा दुख हुआ है। उनके निधन से राज्य के सांस्कृतिक जगत में एक अपूरणीय क्षति हुई है। डारलोंग का जन्म 20 जुलाई 1920 को त्रिपुरा के मुरुई गांव में हुआ था।
उन्होंने लोक संगीत में प्रारंभिक प्रशिक्षण अपने पिता हकवुंगा डारलोंग से प्राप्त किया। बाद में उन्हें संगीत उस्ताद डार्थुआमा डारलोंग ने डारलोंग समुदाय के पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्र रोजम को बजाने की बारीकियां सिखाई और तैयार किया। बचपन से ही, डारलोंग ने अपने समुदाय के विभिन्न पारंपरिक त्योहारों में प्रदर्शन किया था और रोज़ेम बजाने में कई स्वदेशी शिष्यों का मार्गदर्शन किया था।