कोरोना की आड़ में साइबर स्पेस में जबरदस्त घुसपैठ, लॉकडाउन में टारगेट करना हुआ आसान
- पीएम केयर्स के नाम से मिलते जुलते बैंक खाते खोलकर 200 से अधिक लोगों से ठगी
- लॉकडाउन में साइबर अपराधियों की पौ बारह
- कोरोना के नाम से 2700 से ज्यादा डोमेन रजिस्टर हो चुके
- कोरोना की दवा, गाइडलाइन या डिजिटल ट्रांजेक्शन, सब पर अपराधियों की नजर
- साइबर अपराधियों से बचने के उपाय जान लें
विस्तार
जब दुनिया के सारे देश वैश्विक महामारी 'कोरोना' से लड़ने में व्यस्त हैं तो उसी वक्त साइबर स्पेस में जबरदस्त घुसपैठ की जा रही है। दिल्ली पुलिस ने पीएम केयर्स फंड से जुड़े एक ताजा मामले का खुलासा किया है। झारखंड के हजारीबाग में तीन युवकों ने कोरोना पीड़ितों के नाम पर प्रधानमंत्री के राहत कोष (पीएम केयर्स) के नाम से मिलते जुलते बैंक खाते खोलकर 200 से अधिक लोगों को ठग लिया। वे करीब 51 लाख रुपए की राशि एकत्रित कर फरार हो गए। इनके फर्जी अकाउंट से जिन-जिन खातों में पैसे भेजे गए थे, पुलिस ने उन्हें फ्रीज कर दिया है।
लॉकडाउन में साइबर अपराधियों की पौ बारह
कोरोना का लॉकडाउन पीरियड साइबर अपराधियों को बहुत खुले अवसर दे रहा है। पीएम केयर्स फंड, विभिन्न राज्यों के वित्तीय संस्थान, अस्पताल, दवाएं, पीपीई व मास्क बनाने वाली कंपनियां साइबर अपराधियों की हिट लिस्ट में टॉप पर हैं।'वर्क फ्रॉम होम' के दौरान साइबर अपराध से निपटने वाले टूल इतने शक्तिशाली नहीं होते, जितने कार्यालय के स्थापित नेटवर्क सिस्टम में होते हैं। इसी के चलते फ़िशिंग ई-मेल, एसएमएस और वेबसाइट के जरिए लोगों को साइबर क्राइम का शिकार बनाया जा रहा है। पुलिस एवं दूसरी सुरक्षा एजेंसियां कोरोना के बंदोबस्त में लगी हैं, इसलिए ऐसे मामलों पर संजीदगी से कार्रवाई भी नहीं हो पा रही।
साइबर अपराध बढ़े, सामने कम आ रहे
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एवं साइबर मामलों के विशेषज्ञ पवन दुग्गल ने इस बारे में अमर उजाला डॉट कॉम के साथ विस्तृत बातचीत की है। उनका कहना है कि कोरोना एक परिवर्तन है। जब यह खत्म होगा तो दुनिया बदल चुकी होगी। साइबर स्पेस में नए प्रकरण देखने को मिलेंगे। साइबर क्राइम का ग्राफ बड़े पैमाने पर उछाल लेगा। पिछले तीन माह में केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया में साइबर क्राइम में मामले तेजी से बढ़े हैं। यह अलग बात है कि भारत में ऐसे केसों की रिपोर्टिंग कम हो रही है।वजह, इस वक्त सभी एजेंसियों का ध्यान कोरोना की लड़ाई पर है।इसके चलते साइबर अपराधियों के हाथ खुल गए हैं।वे पीएम केयर्स फंड को भी नहीं छोड़ रहे।
प्रधानमंत्री कार्यालय में नेशनल साइबर सिक्योरिटी को-आर्डिनेटर ले.जन राजेश पंत ने लोगों के लिए जो एडवायजरी जारी की थी, उसमें कहा था कि कोरोना के दौरान लोग यह सुनिश्चित करें कि साइबर अपराधी किसी भी तरह उन पर हावी न हों। दो माह के दौरान दुनिया में चार हजार से अधिक बड़े फ्रॉड के मामले सामने आए हैं।पीएम केयर्स फंड जब बनाया गया तो इसके तीस मिनट के अंदर आधा दर्जन से अधिक फर्जी वेबसाइट अस्तित्व में आ गई।जैसे किसी वेबसाइट में पीएम केयर तो दूसरी में पीएम केयर टू आदि शब्द लगा दिए गए।
कोरोना के नाम से 2700 से ज्यादा डोमेन रजिस्टर हो चुके...
साइबर अपराधियों ने कोरोना की लड़ाई के वक्त को अपने लिए बहुत अनुकूल माना है।फ्रॉड करने के मकसद से कोरोना के नाम पर भारत में अभी तक 2700 से ज्यादा डोमेन रजिस्टर हुए हैं। ये हर भाषा में हैं। मास्क, पीपीई, दवा और दूसरे उपकरणों के लिए बोगस वेबसाइट बनाकर लोगों को ठगा जा रहा है। ले.जन राजेश पंत के अनुसार, इस बाबत लोगों को सचेत होना होगा। सुरक्षा एजेंसियां अपने स्तर पर काम कर रही हैं। इंडिया कंप्यूटर इमरजेंसी रेस्पॉंस टीम (सीईआरटी) और बैंकिंग स्टाफ ऐसे फ्रॉड रोकने के लिए दिन-रात लगे हैं।सीईआरटी द्वारा एडवायजरी भी जारी की गई है।
कोरोना की दवा, गाइडलाइन या डिजिटल ट्रांजेक्शन, सब पर अपराधियों की नजर
पवन दुग्गल बताते हैं, डोनेशन से जुड़ी साइटों, कोरोना के इलाज, डब्लूएचओ की गाइडलाइन या फिर डिजिटल ट्रांजेक्शन, इन सब पर साइबर अपराधियों की नजर है।साइबर अपराधियों की ओर से ऐसे मेल आ रहे हैं, जिनमें देखने को मिलता है कि भारत सरकार ने कोरोना की लड़ाई के लिए कौन से कदम उठाए हैं, डब्लूएचओ की ताजा रिपोर्ट क्या है, कोरोना कहां पर तेजी से फैल रहा है और क्या आप मास्क-पीपीई खरीदना चाहते हैं, आदि। जो कोई मेल को क्लिक कर देता है वो फंस जाता है। वैसे भी भारत में फ़िशिंग एक दंडनीय अपराध नहीं है। मामलों की अंडर रिपोर्टिंग हो रही है।ऐसे अपराधों के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के शिकायत पोर्टल हैं, लेकिन अब वहां गंभीरता से मामलों की जांच नहीं हो रही।
सरकारी-प्राइवेट अस्पताल भी निशाने पर
पवन दुग्गल के अनुसार, केंद्र सरकार राज्यों को पैसा दे रही है। इसके चलते सरकारी और प्राइवेट अस्पताल भी निशाने पर हैं। साइबर अपराधी केंद्र सरकार के नाम पर ई-मेल भेजकर पूछते हैं कि आपके यहां क्या क्या सुविधाएं हैं।सरकार आपको ये सुविधा मुहैया कराने पर विचार कर रही है।ऐसे में साइबर अपराधी आसानी से अस्पतालों के नेटवर्क में सेंध लगा रहे हैं। पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन बिल अभी संसद में विचाराधीन है।सांसद मीनाक्षी लेखी की अध्यक्षता में गठित जेपीसी इसके प्रावधानों पर गौर कर रही है।
साइबर अपराधियों से इस तरह बचें...
- कोविड 19 के नाम से आई किसी भी मेल को ओपन न करें
- न ही उसे फॉरवर्ड करें और डाउनलोड आइटम पर जाएं
- अधिकृत सोर्स वाली जानकारी पर भरोसा करें
- वित्तीय जानकारी ई-मेल के जरिए न भेजें, वित्त से जुड़ा कोई मैसेज ओपन न करें
- मोबाइल फोन या अपने पीसी में प्रभावशाली एंटी वायरस रखें
- अगर कोई डराने वाली मेल है कि अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो ये हो जाएगा, उसका जवाब न दें
- अधिकांश कार्य कंपनी के डिवाइस पर करें
- कॉर्पोरेट डाटा निजी सिस्टम पर इस्तेमाल न करें
- वर्क फ्रॉम होम के दौरान अपने सिस्टम से परिवार को दूर रखें
- आईडी, पासवर्ड को बदलकर उसे लॉकिंग सिस्टम में रखें