ICMR: दुर्गम इलाकों में कैंसर मरीजों तक पहुंचेगा उपचार, ड्रोन आसान करेगा राह, आईसीएमआर को परीक्षण में कामयाबी
जानकारी के अनुसार, आईसीएमआर ने ड्रोन का इस्तेमाल करके टीके और दवाइयां पहुंचाने की व्यवहार्यता का आकलन करने के लिए ‘आई-ड्रोन’ प्रोजेक्ट शुरू किया। आईसीएमआर ने टीएसएडब्ल्यू ड्रोन्स कंपनी के साथ मिलकर तेलंगाना और कर्नाटक में बायोप्सी अध्ययन पूरा किया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कैंसर का इलाज देश के दुर्गम स्थानों तक पहुंचाने के लिए भारतीय शोधकर्ताओं को बड़ी कामयाबी मिली है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने बायोप्सी जांच के लिए रोगी का सैंपल ड्रोन के जरिये बड़े अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाने में सफलता हासिल की है। अब आईसीएमआर जल्द ही राज्यों के साथ दिशा निर्देश साझा करेगा ताकि आखिरी छोर के कैंसर मरीजों का इलाज आसान हो सके।
जानकारी के अनुसार, आईसीएमआर ने ड्रोन का इस्तेमाल करके टीके और दवाइयां पहुंचाने की व्यवहार्यता का आकलन करने के लिए ‘आई-ड्रोन’ प्रोजेक्ट शुरू किया। आईसीएमआर ने टीएसएडब्ल्यू ड्रोन्स कंपनी के साथ मिलकर तेलंगाना और कर्नाटक में बायोप्सी अध्ययन पूरा किया है। दरअसल, भारत में हर साल कैंसर मरीजों की संख्या बढ़ रही है। साल 2022 में 14,61,427 मामले सामने आए हैं लेकिन इसी साल आईसीएमआर ने एक अध्ययन में बताया कि हर राज्य में कैंसर का इलाज और सुविधाएं एक जैसी नहीं है।
द लैंसेट दक्षिण पूर्व मेडिकल जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में आईसीएमआर के बंगलूरू के राष्ट्रीय रोग सूचना विज्ञान और अनुसंधान केंद्र (एनसीडीआईआर) के शोधकर्ताओं ने 38 में से 11 कैंसर रजिस्ट्री के साथ 2012 से 2015 के बीच केरल, महाराष्ट्र, मणिपुर, असम, मिजोरम, गुजरात और कर्नाटक के 5,591 मरीजों पर अध्ययन किया। इसमें पता चला कि दुर्गम स्थानों पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच कठिन होने की वजह से यहां के मरीजों को समय पर कैंसर की जांच नहीं हो पाती है, जिसके चलते इन लोगों में कैंसर की मृत्युदर भी अन्य क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा है।
नमूना नहीं हुआ खराब, जांच का समय भी घटा
आईसीएमआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुमित अग्रवाल ने बताया कि तेलंगाना और कर्नाटक के आदिवासी क्षेत्रों से रोगी के नमूना लेकर ड्रोन के जरिए 40 से 50 किलोमीटर दूर एक अस्पताल भेजा गया और यहां जांच के बाद रोगी की रिपोर्ट वापस ड्रोन के जरिए गांव तक पहुंची। इस पूरी अवधि को सड़क मार्ग के जरिए कवर करने में कम से कम छह से सात घंटे का समय लगता है, लेकिन ड्रोन ने महज 20 मिनट में सैंपल अस्पताल तक पहुंचाया। प्रयोगशाला परीक्षण में नमूने की मात्रा या गुणवत्ता पर कोई प्रभाव नहीं देखा गया।