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राज्यों को 'फ्री ऑफ कॉस्ट' मिले कोरोना वैक्सीन, दस संगठनों ने प्रधानमंत्री को भेजा 11 प्वाइंट फार्मूला

Thu, 29 Apr 2021 05:24 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 29 Apr 2021 05:24 PM IST
सार

चिट्ठी के मुताबिक, केंद्र ने वैक्सीन पॉलिसी में भी भेदभाव बरता है। वैक्सीन की कीमतों के निर्धारण के मामले में सरकार पूरी तरह फेल रही। भारतीय अस्पतालों में 600 रुपये से 1200 रुपये का रेट तय कर दिया, जबकि विदेश में यही वैक्सीन सस्ते रेट पर बिक रही है...

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Trade Unions write a letter to PM Modi to provide Free of Cost vaccine to all the states under PM cares Fund
कोरोना वैक्सीन - फोटो : iStock

विस्तार

देश में कोरोना से जंग जीतना आसान हो जाएगा, अगर केंद्र सरकार सभी राज्यों को 'फ्री ऑफ कॉस्ट' वैक्सीन मुहैया करा दे। इसके लिए 'पीएम केयर फंड' को वैक्सीन का खर्च उठाना होगा। वजह, इस फंड में जनता और कार्मिकों का भी योगदान है। पब्लिक सेक्टर जो कि पहले से ही ऑक्सीजन उत्पादन करने में अव्वल रहा है, सरकार को अब उसमें निवेश करना चाहिए। इससे तकनीक एवं दूसरे संसाधनों को अपग्रेड किया जा सकेगा। ज्वाइंट प्लेटफॉर्म ऑफ सेंट्रल ट्रेड यूनियन और सेक्टोरल फेडरेशन ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी गई चिट्ठी में यह बात कही है। जिन ट्रेड यूनियनों ने चिट्ठी पर हस्ताक्षर किए हैं, उनमें आईएनटीयूसी, एआईटीयूसी, एचएमएस, सीआईटीयू, एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, एसईडब्लूए, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ और यूटीयूसी शामिल हैं। इस चिट्ठी में सरकार को 11 प्वाइंट फार्मूला सुझाया गया है। खास बात है कि आरएसएस समर्थित 'भारतीय मजदूर संघ' ने पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए।

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केंद्र ने वैक्सीन पॉलिसी में भेदभाव किया

अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ के महासचिव सी. श्रीकुमार के मुताबिक, कोरोना के लॉकडाउन में केंद्र सरकार की गलत नीतियों का खामियाजा सभी को भुगतना पड़ रहा है। एकाएक लगाए जा रहे लॉकडाउन के कारण लोग घरों से बाहर जाने को मजबूर हैं। वजह, उनके सामने जीवन का संकट है। इस तरह के फैसले से लाखों-करोड़ों लोगों का रोजगार खत्म हो जाता है। केंद्र सरकार ने बतौर फ्रंटलाइन वर्कर, जिनमें आंगनवाड़ी वर्कर, आशा और सैनिटाइजर वर्कर शामिल हैं, उन्हें झूठा आश्वासन दे दिया है। ये सभी वर्कर कोविड 19 के सर्वे में लगे हुए हैं। सरकार ने इन्हें मुआवजा देने की बात कही थी।

चिट्ठी में लिखा है, केंद्र सरकार के पास कोरोना से निपटने के लिए कोई मजबूत प्लान नहीं है। नियमों में कठोरता का अभाव है। हर तरह की प्लानिंग में भेदभावपूर्ण नीतियां सामने आ रही हैं। गैर-भाजपा सरकारों पर सहयोग न करने का आरोप लगाया जा रहा है। सच्चाई यह है कि भेदभावपूर्ण खेल तो स्वयं केंद्र की तरफ से खेला जा रहा है। कोरोना काल में जब केंद्र सरकार को देश की एकता के लिए अति सक्रियता दिखानी चाहिए थी, वह नहीं दिखाई दी।

चिट्ठी के मुताबिक, केंद्र ने वैक्सीन पॉलिसी में भी भेदभाव बरता है। लोगों के जीवन के मुकाबले, कॉरपोरेट घरानों का हित साधने का प्रयास किया गया है। सरकार को एक समय सीमा में सभी लोगों को वैक्सीन लगाने की नीति बनानी चाहिए थी। सरकार ने इस तरफ ध्यान देने की बजाए अंतरराष्ट्रीय ड्रग माफिया का ख्याल रखा। वैक्सीन की कीमतों के निर्धारण के मामले में सरकार पूरी तरह फेल रही। भारतीय अस्पतालों में 600 रुपये से 1200 रुपये का रेट तय कर दिया, जबकि विदेश में यही वैक्सीन सस्ते रेट पर बिक रही है।

यूरोप में कोविशील्ड के 160 रुपये, यूएस में 300, बांग्लादेश में 300, यूके में 226 और ब्राजील में 237 रुपये में ये वैक्सीन मिल जाती है। सीरम इंस्टीट्यूट ने अब राज्यों के लिए इस वैक्सीन का रेट चार सौ से तीन सौ रुपये कर दिया है। पहले यह रेट केंद्र के लिए डेढ़ सौ रुपये, राज्य के लिए चार सौ और प्राइवेट अस्पतालों को छह सौ रुपये था।

भारत बायोटेक ने केंद्र को 150 रुपये, राज्यों को 600 रुपये और प्राइवेट अस्पतालों को 1200 रुपये में कोवैक्सीन देने का रेट तय किया है। ये सब केंद्र सरकार की गलत नीतियों के चलते हो रहा है। दवा की कीमतें निर्धारित करने वाला प्राधिकरण क्या कर रहा है। किसान विरोधी कानून, सीएए, नई शिक्षा नीति और पावर, रक्षा, ट्रांसपोर्ट व दूसरे क्षेत्रों से जुड़े कानूनों को संसद में संख्या बल से पास करा लिया गया। चिट्ठी में इस बात का जिक्र किया गया है कि ये सभी भेदभावपूर्ण कानून रहे हैं।

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कोरोना जैसी आपदा से निपटने के लिए 11 प्वाइंट फार्मूला ...

  • वैक्सीन का उत्पादन बढ़ाकर सरकार सुनिश्चित करे कि एक तय समय सीमा के अंदर वैक्सीन प्रक्रिया पूरी हो जाए।
  • मौजूदा परिस्थितियों में सभी जरुरतमंदों को ऑक्सीजन की फ्री सप्लाई दी जाए
  • जन विरोधी, भेदभावपूर्ण एवं कॉर्पोरेट समर्थक वैक्सीन नीति को समाप्त करें
  • जन स्वास्थ्य आधारिक संरचना को मजबूती प्रदान की जाए और पर्याप्त संख्या में स्वास्थ्य कर्मी भर्ती किए जाएं
  • ऐसा कोई भी आदेश जो आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत जारी हुआ है, उसके द्वारा आवागमन, आंदोलन व कर्फ्यू के दौरान सख्ती बरती जाए। अगर कोई इन आदेशों की अवहेलना करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो। निवास से बाहर निकलने का आदेश कठोरता से लागू किया जाए।
  • मजदूरों के खिलाफ बने लेबर कोड्स, किसान विरोधी कृषि कानून और बिजली बिल कानून खत्म किए जाएं
  • निजीकरण प्रक्रिया बंद करें, पीएसयू एवं सरकारी विभागों को विनिवेश के दायरे से बाहर लाया जाए  
  • सभी ऐसे लोग, जो गैर-आयकर श्रेणी वाले परिवारों में शामिल हैं, उनके खाते में 7500 रुपये प्रति महीना राशि जमा कराई जाए
  • अगले छह माह के लिए दस किलो फ्री अनाज मुहैया कराया जाए
  • जो मरीज कोरोना से पीड़ित नहीं हैं, उन्हें सरकारी अस्पतालों में प्रभावी इलाज की सुविधा प्रदान की जाए
  • कोरोना संक्रमण की जंग में ड्यूटी दे रहे सभी कर्मियों और फ्रंटलाइन वर्करों को प्रोटेक्टिव गियर मुहैया कराए जाएं। आशा वर्कर और आंगनवाड़ी कर्मियों को भी इंश्योरेंस के दायरे में लाया जाए।
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