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पहाड़ों में भाप इंजन वाली ट्रेन से यात्रा का लुत्फ उठा सकेंगे पर्यटक
अमर उजाला ब्यूरो / नई दिल्ली
Updated Mon, 04 Dec 2017 12:49 AM IST
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भाप इंजन
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पहाड़ की वादियों में भी अब छुक-छुक ट्रेन का आनंद पर्यटक ले सकेंगे। रेलवे ने भाप इंजन से चलने वाली ट्रेनों को मनोरम दृश्य वाले रेलवे ट्रैक पर चलाने की योजना तैयार की है। इसके तहत कालका-शिमला, कांगड़ा वैली, सिल्लिगुड़ी-दार्जिलंग, मैथ्रेन हिली एरिया के पूरे सेक्शन मेंभाप इंजन वाली ट्रेन चलाएगा। बकौल रेलवे बोर्ड अध्यक्ष अश्वनी लोहानी इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा की भाप इंजन से चलने वाली ट्रेनों का यात्रा टिकट बहुत महंगा न हो।
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अश्वनी लोहानी के मुताबिक, कुछ विशेष चिन्हित सर्किटों पर टाइम टेबल वाली भाप इंजन चालित ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। टिकट बहुत महंगा नहीं होने पर प्रत्येक व्यक्ति इन पर यात्रा का आनंद ले सकेगा। 15वीं राष्ट्रीय स्टीम कांग्रेस के आयोजन के मौके पर लोहानी ने यह भी बताया कि भाप इंजन दुनिया भर में परिवहन में क्रांति के लिए पहचाने जाते हैं। भारत में 1825 में रेलवे के आगमन से दूरियां घटीं और दिनों और घंटों में तय की जाने लगीं।
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हमारे देश में यह एक महान राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन था। अब भाप इंजनों का भारतीय रेलवे से परिचालन समाप्तप्राय हो गया है, लेकिन भारत में उनका परिचालन हिल रेलवे सेक्शन में जारी रखा जाएगा। लोकोमोटिव संरक्षक के तौर पर जाने जाने वाले ब्रिटेन के रिचर्ड पेक, हेरिटेज ट्रांसपोर्ट संग्रहालय के सीईओ तरुण ठकराल, सर मार्क तुली भी रेल म्यूजियम में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद थे।
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अश्वनी लोहानी के मुताबिक, कुछ विशेष चिन्हित सर्किटों पर टाइम टेबल वाली भाप इंजन चालित ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। टिकट बहुत महंगा नहीं होने पर प्रत्येक व्यक्ति इन पर यात्रा का आनंद ले सकेगा। 15वीं राष्ट्रीय स्टीम कांग्रेस के आयोजन के मौके पर लोहानी ने यह भी बताया कि भाप इंजन दुनिया भर में परिवहन में क्रांति के लिए पहचाने जाते हैं। भारत में 1825 में रेलवे के आगमन से दूरियां घटीं और दिनों और घंटों में तय की जाने लगीं।
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हमारे देश में यह एक महान राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन था। अब भाप इंजनों का भारतीय रेलवे से परिचालन समाप्तप्राय हो गया है, लेकिन भारत में उनका परिचालन हिल रेलवे सेक्शन में जारी रखा जाएगा। लोकोमोटिव संरक्षक के तौर पर जाने जाने वाले ब्रिटेन के रिचर्ड पेक, हेरिटेज ट्रांसपोर्ट संग्रहालय के सीईओ तरुण ठकराल, सर मार्क तुली भी रेल म्यूजियम में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद थे।