भगवाकरण से रुक रहे हैं भारत में बड़े आर्थिक सुधार: अमेरिकी थिंक टैंक
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अमेरिका के एक थिंक टैंक का तर्क है कि भारत में ‘सांस्कृतिक मुद्दों और भगवाकरण’ की वजह से आर्थिक क्षेत्र में कुछ खास बदलाव नहीं हो पा रहा है। खासकर बड़े आर्थिक सुधारों की गति भी थमी है। वाशिंगटन स्थित हडसन इंस्टीट्यूट का कहना है कि एनडीए सरकार ने अभी तक नए भारत बनाने को लेकर उम्मीदें पूरी नहीं की है। इंस्टीट्यूट का कहना है कि अगर भारत ढांचागत, बुनियादी सुविधाओं में सुधार के साथ साथ लाल फीताशाही में लगाम लगाता है तो उसमें दोहरे अंक की आर्थिक वृद्धि हासिल करने की क्षमता है। संस्थान की टिप्पणी है कि भारत महंगाई को काबू करने में सफल रहा है।
थिंक टैंक ने मोदी सरकार के दो साल का लेखा जोखा पेश किया है। रिपोर्ट में वस्तु एवं सेवा कर विधेयक के पास होने को बेहद महत्वपूर्ण कदम बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि विधेयक का पारित होना भारतीय बाजारों के लिए बेहद जरूरी था।
रिपोर्ट आगे कहती है कि अगर भारत ब्रिटिश जमाने के सड़क, रेल, हवाई परिवहन और पोत जैसे ढांचागत क्षेत्र को मरम्मत और दोबारा से खड़ा करने का काम करता है। साथ ही सरकार बिजली, पानी और अफसरशाही के प्रभाव को कम करती है तो उसके लिए उच्च आर्थिक वृद्धि हासिल करना कोई कठिन काम नहीं है।