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तमिलनाडु: एमडीएमके को बड़ा झटका, 150 से अधिक नेता डीएमके में शामिल; जानें क्यों टूटा DMK से गठबंधन
Sun, 28 Jun 2026 04:23 PM IST
Rahul Kumar
पीटीआई, चेन्नई।
पीटीआई, चेन्नई।
Published by: Rahul Kumar
Updated Sun, 28 Jun 2026 04:23 PM IST
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एमडीएमके के 150 नेता डीएमके में शामिल।
- फोटो : पीटीआई
एमडीएमके को रविवार को बड़ा राजनीतिक झटका लगा। पार्टी के 150 से अधिक पदाधिकारियों और नेताओं ने औपचारिक रूप से डीएमके की सदस्यता ग्रहण कर ली। इनमें राज्य स्तरीय नेता, जिला सचिव, अधिवक्ता और छात्र शामिल हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब एक दिन पहले ही एमडीएमके की सामान्य परिषद ने पार्टी प्रमुख वाइको की अगुवाई में डीएमके से गठबंधन समाप्त करने का फैसला किया था।
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डीएमके मुख्यालय अन्ना अरिवालयम में आयोजित कार्यक्रम में पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की मौजूदगी में इन नेताओं ने डीएमके का दामन थामा। यह घटनाक्रम एमडीएमके के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षति मानी जा रही है।
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डीएमके का बढ़ा वर्चस्व, कई जिलों में मजबूत पकड़
डीएमके में शामिल होने वालों में शिवगंगा के पुलावर एस. सेवन्थियप्पन, तिरुवल्लूर के टी. आर. आर. सेंगुट्टुवन, प्रचार सचिव तिरुपरंकुंद्रम अलगुसुंदरम और विरुधुनगर के आर. एम. एस. शेखर जैसे वरिष्ठ नेता और जिला सचिव शामिल हैं। इन नेताओं के शामिल होने से शिवगंगा, तिरुवल्लूर, विरुधुनगर और तिरुपुर जिलों में डीएमके की स्थिति मजबूत होने की बात कही जा रही है।
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इसके अलावा तमिलनाडु डॉ. अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी के 40 छात्रों ने भी डीएमके की सदस्यता ली। इसे एमडीएमके के छात्र और युवा संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं के संगठित रूप से डीएमके में शामिल होने के तौर पर देखा जा रहा है।
एमडीएमके ने डीएमके पर लगाए गंभीर आरोप
उधर, शनिवार को हुई एमडीएमके की सामान्य परिषद की बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि 4 मई 2026 को तमिलनाडु विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद यह सामने आया कि पर्दे के पीछे हुए राजनीतिक समझौतों ने जनता के जनादेश के विपरीत काम किया। प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि एआईएडीएमके की सरकार बनाने के लिए "व्यवस्थाएं" की गईं, हालांकि इसमें डीएमके का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया गया।
प्रस्ताव में कहा गया कि इसी कारण सामान्य परिषद ने डीएमके के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस से अलग होने का निर्णय लिया है। साथ ही यह भी कहा गया कि आगामी चुनाव के समय पार्टी अपने गठबंधन को लेकर उचित फैसला करेगी। एमडीएमके ने यह भी याद दिलाया कि वह पिछले आठ वर्षों से अधिक समय से डीएमके के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस का हिस्सा रही है।