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SC: अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर को राहत; शीर्ष अदालत ने आरोप-पत्र पर संज्ञान लेने से ट्रायल कोर्ट को रोका
Mon, 25 Aug 2025 01:15 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Mon, 25 Aug 2025 01:15 PM IST
सार
हरियाणा पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ऑपरेशन सिंदूर पर सोशल मीडिया पोस्ट के लिए अशोका विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के खिलाफ एक एफआईआर में क्लोजर रिपोर्ट दायर की गई है। हालांकि, पुलिस ने यह भी कहा कि पोस्ट के लिए प्रोफेसर के खिलाफ एक अन्य मामले में आरोप पत्र दायर किया गया है। कोर्ट ने फिलहाल प्रोफेसर के खिलाफ दायर आरोप पत्र पर संज्ञान लेने से ट्रायल कोर्ट को रोक दिया है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को निचली अदालत को अशोका विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद के खिलाफ दर्ज एफआईआर में हरियाणा एसआईटी की ओर से दायर आरोप-पत्र पर संज्ञान लेने से रोक दिया। अली खान महमूदाबाद पर 'ऑपरेशन सिंदूर' पर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने निचली अदालत को इस मामले में कोई भी आरोप तय करने से भी रोक दिया।
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महमूदाबाद के खिलाफ उनके विवादास्पद सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर दर्ज दो एफआईआर की जांच के लिए शीर्ष अदालत की ओर से गठित एसआईटी ने पीठ को सूचित किया कि उनमें से एक में उसने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है, जबकि एक में 22 अगस्त को आरोपपत्र दाखिल किया गया था, जब यह पाया गया कि कुछ अपराध सिद्ध हुए थे।
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सिब्बल ने आरोप-पत्र दाखिल करने को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया
महमूदाबाद की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने आरोप-पत्र दाखिल करने को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि उन पर बीएनएस की धारा 152 (देशद्रोह) के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिसकी वैधता को चुनौती दी जा रही है। पीठ ने सिब्बल से आरोप-पत्र का अध्ययन करने और कथित अपराधों का एक चार्ट तैयार करने को कहा। पीठ ने कहा कि वह अगली सुनवाई की तारीख पर इन पर विचार करेगी।
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सभी कार्यवाही रद्द करने का निर्देश
शीर्ष अदालत ने गौर किया कि महमूदाबाद के खिलाफ एक प्राथमिकी में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है और मामले से संबंधित सभी कार्यवाही रद्द करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट में पहले क्या हुआ?
इससे पहले 16 जुलाई को शीर्ष अदालत ने मामले में हरियाणा एसआईटी की जांच की दिशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसने खुद को गलत दिशा में आगे बढ़ाया है। 21 मई को शीर्ष अदालत ने प्रोफेसर को अंतरिम जमानत दे दी थी, लेकिन उनके खिलाफ जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। उसने तीन सदस्यीय एसआईटी को उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों की जांच करने का निर्देश दिया था।
क्या है मामला?
हरियाणा पुलिस ने महमूदाबाद के खिलाफ दो प्राथमिकियां दर्ज होने के बाद 18 मई को उन्हें गिरफ्तार किया था। ऑपरेशन सिंदूर पर उसके विवादास्पद सोशल मीडिया पोस्ट से देश की संप्रभुता और अखंडता को खतरा होने का आरोप है। सोनीपत जिले के राई पुलिस थाने में दो प्राथमिकियां दर्ज की गईं। इनमें एक हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया और दूसरी एक गांव के सरपंच की शिकायत पर आधारित हैं। कई राजनीतिक दलों और शिक्षाविदों ने गिरफ्तारी की निंदा की थी।