फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Today's Interview: ITI Limited's business will grow by government decision

साक्षात्कार: सरकारी फैसले से बढ़ेगा आईटीआई लिमिटेड का कारोबार

Mon, 17 Dec 2018 04:46 AM IST
संदीप भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संदीप भट्ट Updated Mon, 17 Dec 2018 04:46 AM IST
विज्ञापन
Today's Interview: ITI Limited's business will grow by government decision
आजादी के बाद दूरसंचार क्षेत्र के लिए संवेदनशील उपकरण बनाने को गठित सरकारी कंपनी आईटीआई (इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज) लिमिटेड विविधीकरण की राह पर है। कंपनी एसटीपी पाइप, प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, स्मार्ट इलेक्ट्रिक मीटर, जिओ फेंसिंग और बैंकिंग क्षेत्र के लिए स्मार्ट कार्ड बनाने के साथ नोट गिनने वाली मशीन भी बना रही है। कंपनी के कामकाज पर शिशिर चौरसिया ने आईटीआई लिमिटेड के सीएमडी के. अलगेसन से बातचीत की। पेश हैं अंश:
विज्ञापन


प्रश्न- सरकार ने स्मार्ट इलेक्ट्रिक मीटर का जो खाका खींचा है, उससे देशभर में तेजी से इसकी मांग बढ़ेगी। इतने स्मार्ट मीटर बंगलूरू कारखाने में बन पाएंगे?
विज्ञापन

उत्तर- फिलहाल 25 लाख स्मार्ट मीटर तो बंगलूरू कारखाने में बनेंगे। यदि ऐसे ही ऑर्डर मिलते रहे तो उत्तर प्रदेश के मनकापुर में स्थित अपने कारखाने में भी स्मार्ट मीटर बनाना शुरू कर दिया जाएगा। मनकापुर कारखाना सभी कारखानों में नया है, इसलिए यहां ज्यादा निवेश की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। इस कारखाने में वाई-फाई से जुड़े उपकरण ओएनटी और ओएलटी बनाए जा रहे हैं। इसके लिए 25 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। कंपनी बैंक या वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के लिए नोट गिनने और नकली नोट पकड़ने वाली मशीन (फेक नोट डिटेक्टर) भी बनाती है। देखा जाए तो कंपनी ने अपने सभी कारखानों में निवेश कर उनका आधुनिकीकरण किया है ताकि उनमें नए जमाने के उपकरण बनाए जा सकें।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रश्न- नवंबर में मंत्रिमंडल के एक फैसले से आईटीआई लिमिटेड सुर्खियों में आई। फैसला क्या है और इससे कंपनी पर कैसा असर पड़ेगा?
उत्तर- 8 नवंबर को मंत्रिमंडल के आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने बीएसएनएल, एमटीएनएल और भारत ब्रॉडबैंड निगम लिमिटेड की खरीद में आईटीआई लिमिटेड के लिए 30 फीसदी का कोटा निर्धारित किया है। इससे कारोबार बढ़ने के साथ कंपनी की प्रतिस्पर्धी क्षमता भी बढ़ेगी। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि भले ही कंपनी को खरीद में कोटा मिल गया हो, लेकिन गुणवत्ता और कीमतों के मामले में वैश्विक कंपनियों से बराबरी तो करनी ही होगी।

प्रश्न- कंपनी स्मार्ट इलेक्ट्रिक मीटर बनाने के क्षेत्र में भी कदम रखने जा रही है?
उत्तर- कंपनी ने बंगलूरू स्थित कारखाने में स्मार्ट इलेक्ट्रिक मीटर बनाना शुरू कर दिया है। कंपनी को इसी साल ईईएसएल (ऊर्जा दक्षता सेवा लिमिटेड) से 25 लाख स्मार्ट मीटर की आपूर्ति का 800 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है। इससे पहले कंपनी ने प्रोटोटाइप मीटर बनाकर सेंट्रल पावर रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीपीआरई) से प्रमाणपत्र भी ले लिया है। इस तरह के इलेक्ट्रिक उपकरणों की आपूर्ति के लिए यह प्रमाणपत्र जरूरी है। ईईएसएल के लिए सिंगल फेज से लेकर तीन फेज वाले स्मार्ट मीटर बनाकर तीन साल में आपूर्ति करनी है। एक साल ही बीता है। तय समय में ईईएसएल को आपूर्ति हो जाएगी।

प्रश्न- कंपनी सोलर पैनल भी बना रही है?
उत्तर- कंपनी ने उत्तर प्रदेश के नैनी में अपने कारखाने में एक ऑटोमेटिक प्लांट लगाया है। यहां 18 मेगावाट की क्षमता वाले सोलर पैनल बनते हैं। कंपनी जिपॉन उपकरण एसपीवी भी बना रही है, जिसका इस्तेमाल सोलर पैनल को जोड़ने के लिए किया जाता है। इसके लिए वहां 30 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश किया गया है।

प्रश्न- भारत इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल दुनिया में तेजी से कदम बढ़ा रहा है, लेकिन प्रिंटेड सर्किट बोर्ड का निर्माण नहीं होना इस दिशा में बड़ी बाधा है। इससे कैसे पार पाया जा सकेगा?
उत्तर- इस असुविधा से बचने के लिए बंगलूरू कारखाने में एसएमटी मशीन और सीएनसी पावर प्रेस लगाया गया है। कंपनी इसकी मदद से आठ परत वाली प्रिंटेड सर्किट बोर्ड बना सकती है। साथ ही वह सभी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक असेंबल करने में भी सक्षम हो गई है। इसके अलावा केरल स्थित पालघाट कारखाने में 12 परत वाली प्रिंटेड सर्किट बोर्ड बनाने के लिए ढांचागत संरचना खड़ा कर लिया गया है। वहीं पर बैंकों के स्मार्ट कार्ड भी बनते हैं।

प्रश्न- रायबरेली स्थित कारखाने में इन दिनों क्या बन रहा है?
उत्तर- रायबरेली स्थित कारखाने में इस समय ओएफसी केबल और एसटीपी पाइप बनाई जा रही हैं। आप टेलीफोन केबल बिछाते वक्त रंग-बिरंगे पाइप देखते होंगे, उसे ही एसटीपी पाइप कहा जाता है। इसके लिए वहां करीब 100 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश किया गया है। हमने वहां जितनी क्षमता जुटाई है, जिससे हर साल 30,000 किलोमीटर एसटीपी पाइप बनाई जा सके।

प्रश्न- डिजिटल और ई-पेमेंट क्षेत्र में डाटा के चोरी या नष्ट होने की आशंका बढ़ गई है। इससे बचने को कंपनी ने डाटा सेंटर बनाया है। इस क्षेत्र में कारोबार की क्या संभावना है?
उत्तर-  बहुत अच्छी संभावना है। कुछ साल पहले कंपनी ने एक निजी साझेदार के साथ मिलकर बंगलूरू में पीपीपी मॉडल पर एक डाटा सेंटर बनाया था। इसका उपयोग बैंक, वित्तीय संस्थान और अन्य कंपनियां कर रही हैं। कंपनी ने 200 करोड़ रुपये के निवेश से डाटा सेंटर में 350 रैक बनाया था, जिसका शत प्रतिशत की क्षमता से उपयोग हो रहा है। अब वहां कंपनी 1,000 रैक बना रही है, जहां ई-पेमेंट और डिजिटल ट्रांजेक्शन आदि का संवेदनशील डाटा जमा की जाती है। इस सेंटर का उपयोग सरकारी कंपनियों से लेकर सरकारी विभाग भी कर रहे हैं। लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से उनके नामों का खुलासा नहीं किया जा सकता है। कंपनी ने क्षमता विस्तार के लिए हाल ही में सूचना तकनीक दुनिया की जानी-मानी कंपनी से समझौता किया है। हालांकि, सुरक्षा के लिहाज से उसका नाम नहीं बताया जा सकता है। लेकिन, इतना मानकर चलिए कि इस क्षेत्र में कंपनी सशक्त भूमिका का निर्वहन कर रही है। 


''मंत्रिमंडल ने बीएसएनएल, एमटीएनएल और भारत ब्रॉडबैंड निगम लिमिटेड की खरीद में कंपनी के लिए 30 फीसदी का कोटा निर्धारित किया है। इससे कारोबार बढ़ने के साथ कंपनी की प्रतिस्पर्धी क्षमता भी बढ़ेगी।'' - के. अलगेसन, सीएमडी, आईटीआई लिमिटेड
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed